केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने भारत की कोयला आवंटन प्रणाली में पारदर्शिता, निष्पक्षता और दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से कोलसेतु नामक एक नई नीति को मंजूरी दी है। इस नीति के तहत मौजूदा NRS (Non-Regulated Sector) लिंकज नीति में एक नया “कोलसेतु विंडो” जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य दीर्घकालिक नीलामी तंत्र के माध्यम से किसी भी औद्योगिक उपयोग और निर्यात के लिए कोयला उपलब्ध कराना है।
2016 की NRS लिंकज नीलामी नीति में एक अलग नीलामी विंडो जोड़ी जा रही है।
कोलसेतु विंडो के माध्यम से कोयले की आवश्यकता रखने वाला कोई भी घरेलू औद्योगिक उपभोक्ता दीर्घकालिक लिंकज के लिए नीलामी में भाग ले सकता है।
कोकिंग कोयला इस विंडो के अंतर्गत उपलब्ध नहीं होगा।
एंड-यूज़ (उपयोग) श्रेणियों पर पहले से लगी पाबंदियां हटाई गई हैं।
अब उद्योग किसी एक तय क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेंगे; कोयले का उपयोग विभिन्न औद्योगिक गतिविधियों या निर्यात के लिए किया जा सकेगा।
मौजूदा NRS लिंकज नीति के तहत सीमेंट, स्पंज आयरन, स्टील (कोकिंग), एल्यूमिनियम और उनके कैप्टिव पावर प्लांट्स जैसे क्षेत्रों को नीलामी के माध्यम से कोयला लिंकज दी जाती रही है।
पहले ये लिंकज निर्धारित एंड-यूज़र तक सीमित थीं।
कोयला बाजार में बदलाव और कारोबार को आसान बनाने की आवश्यकता को देखते हुए सरकार ने अधिक लचीलापन देने की जरूरत महसूस की।
चूंकि वाणिज्यिक खनन (Commercial Mining) में पहले से ही एंड-यूज़ की पाबंदी नहीं है, इसलिए अब लिंकज नीति को भी उसी के अनुरूप उदार बनाया जा रहा है।
कोयला लिंकज का आवंटन दीर्घकालिक नीलामी के आधार पर होगा।
कोई भी औद्योगिक उपभोक्ता भाग ले सकता है, लेकिन ट्रेडर्स (व्यापारी) पात्र नहीं होंगे।
कोकिंग कोयला शामिल नहीं होगा।
मौजूदा निर्दिष्ट एंड-यूज़र उप-क्षेत्र भी इसमें भाग ले सकेंगे।
कोयले का उपयोग स्व-उपभोग, निर्यात, कोयला धुलाई (Coal Washing) या अन्य स्वीकृत उद्देश्यों के लिए किया जा सकेगा,
लेकिन भारत के भीतर पुनः बिक्री (Resale) की अनुमति नहीं होगी।
लिंकज धारक अपने आवंटित कोयले का अधिकतम 50% तक निर्यात कर सकेंगे।
ग्रुप कंपनियां इस विंडो के तहत प्राप्त कोयले को लचीले ढंग से साझा कर सकेंगी।
ये प्रावधान कोयला क्षेत्र को अधिक खुला, पारदर्शी और दक्ष बनाने की दिशा में हैं।
भारत की बढ़ती ऊर्जा मांग और औद्योगिक विस्तार के लिए कोयले का कुशल उपयोग अत्यंत आवश्यक है। पहले की पाबंदियों के कारण कई उद्योगों को आयातित कोयले पर निर्भर रहना पड़ता था।
कोलसेतु के माध्यम से सरकार का उद्देश्य है—
घरेलू कोयले के उपयोगकर्ताओं का दायरा बढ़ाना
आयात निर्भरता कम करना
ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस में सुधार
मौजूदा कोयला भंडार के उपयोग में तेजी
लिंकज नीतियों को वाणिज्यिक खनन सुधारों के अनुरूप बनाना
इससे उद्योगों के लिए समान अवसर पैदा होंगे और नियमित कोयला आपूर्ति की आवश्यकता को बेहतर ढंग से पूरा किया जा सकेगा।
मंत्रिमंडल ने कोलसेतु को मंजूरी दी—NRS लिंकज नीति में नया विंडो।
दीर्घकालिक नीलामी के जरिए किसी भी औद्योगिक उपयोग और निर्यात के लिए कोयला लिंकज।
कोकिंग कोयला बाहर, ट्रेडर्स पात्र नहीं।
लिंकज धारक 50% तक कोयले का निर्यात कर सकते हैं।
मौजूदा एंड-यूज़र सेक्टर भी नए विंडो में भाग ले सकेंगे।
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