रानी वेलु नाचियार तमिलनाडु की एक साहसी और दूरदर्शी शासिका थीं, जिन्होंने 1857 के विद्रोह से बहुत पहले ही ब्रिटिश विस्तार के खिलाफ संघर्ष किया। वर्ष 1730 में जन्मी रानी वेलु नाचियार प्रतिरोध, वीरता और महिला नेतृत्व की प्रतीक बनीं। 3 जनवरी को उनकी जयंती पर उन्हें शिवगंगई राज्य को पुनः प्राप्त करने और औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध निडर संघर्ष के लिए स्मरण किया जाता है।
उनकी राजसी परवरिश और शिक्षा ने उन्हें उस दौर में नेतृत्व और कूटनीति के लिए तैयार किया, जब राजनीतिक परिस्थितियाँ अत्यंत चुनौतीपूर्ण थीं।
वे ब्रिटिशों के विरुद्ध सक्रिय युद्ध करने वाली पहली भारतीय रानी बनीं, जिसने उनकी रणनीतिक कुशलता को उजागर किया।
रानी वेलु नाचियार आज भी प्रतिरोध, साहस और राष्ट्रीय गौरव की एक अमिट प्रतीक बनी हुई हैं।
[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के लिए राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit)…
स्मृति मंधाना ने नवीनतम ICC महिला वनडे बल्लेबाजी रैंकिंग में अपना नंबर-1 स्थान बरकरार रखा…
टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड ने रैमको सिस्टम्स के साथ मिलकर भारत में भारतीय वायु सेना…
प्रख्यात इतिहासकार और इंडोलॉजिस्ट हरमन कुलके का 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया।…
भारत सरकार ने पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच एलपीजी (LPG) और प्राकृतिक…
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) का एक पुराना सैटेलाइट अब पृथ्वी की ओर लौट रहा…