दक्षिण अफ्रीका से कैपुचिन बंदरों का बन्नेरघट्टा जैविक उद्यान में आयात

बेंगलुरु के पास स्थित बन्नेरघट्टा जैविक उद्यान (Bannerghatta Biological Park) ने संरक्षण-उन्मुख चिड़ियाघर प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए दक्षिण अफ्रीका से आठ ब्लैक-कैप्ड कैपुचिन बंदरों का आयात किया है। यह आयात एक औपचारिक पशु विनिमय कार्यक्रम के तहत किया गया, जो वैज्ञानिक वन्यजीव प्रबंधन, आनुवंशिक विविधता बनाए रखने और वैश्विक संरक्षण मानकों के पालन पर भारत के बढ़ते जोर को दर्शाता है।

आयातित प्रजाति के बारे में

आयात किए गए जानवर ब्लैक-कैप्ड कैपुचिन बंदर हैं, जिनका वैज्ञानिक नाम Sapajus apella है। ये प्राइमेट्स मूल रूप से दक्षिण अमेरिका के निवासी हैं और अपनी उच्च बुद्धिमत्ता, सामाजिक व्यवहार तथा अनुकूलन क्षमता के लिए जाने जाते हैं। कैपुचिन बंदरों का अध्ययन अक्सर उनकी समस्या-समाधान क्षमता और औजारों के उपयोग के लिए किया जाता है। इस तरह की प्रजातियों की स्वस्थ बंदी आबादी बनाए रखने के लिए आनुवंशिक विविधता और समृद्ध आवास आवश्यक होते हैं, जिसके लिए नियंत्रित अंतरराष्ट्रीय विनिमय कार्यक्रम महत्त्वपूर्ण माने जाते हैं।

आयात का विवरण

कुल आठ कैपुचिन बंदर—चार नर और चार मादा—दक्षिण अफ्रीका से आयात किए गए। ये जानवर केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, बेंगलुरु पर पहुंचे और वहां से सीधे बन्नेरघट्टा जैविक उद्यान के भीतर निर्धारित क्वारंटीन सुविधा में ले जाए गए। निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार, क्वारंटीन अवधि के दौरान इन बंदरों का अनिवार्य स्वास्थ्य परीक्षण और निगरानी की जाएगी। पशु-चिकित्सकीय स्वीकृति मिलने के बाद ही इन्हें चिड़ियाघर के बाड़ों में स्थानांतरित किया जाएगा।

नियामक और कानूनी अनुपालन

यह आयात भारत में वन्यजीवों की आवाजाही से संबंधित वैधानिक और नियामक ढांचे के सख्त अनुपालन के साथ किया गया। इसके लिए कई प्राधिकरणों से पूर्व अनुमोदन प्राप्त किए गए। केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA), नई दिल्ली से अंतरराष्ट्रीय पशु स्थानांतरण की अनिवार्य अनुमति ली गई। इसके अलावा, राज्य के मुख्य वन्यजीव संरक्षक, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC), पशुपालन एवं डेयरी विभाग तथा वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी प्राप्त किए गए।

पृष्ठभूमि

आधुनिक चिड़ियाघर अब केवल पशुओं के प्रदर्शन तक सीमित नहीं हैं। वे एक्स-सीटू संरक्षण, बंदी प्रजनन, शिक्षा और अनुसंधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समय के साथ बंदी आबादी में सीमित आनुवंशिक विविधता के कारण इनब्रीडिंग और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसी समस्या के समाधान के लिए दुनिया भर के चिड़ियाघर पशु विनिमय कार्यक्रमों में भाग लेते हैं, जिससे नई आनुवंशिक रेखाओं को शामिल किया जा सके।

मुख्य बिंदु

  • बन्नेरघट्टा जैविक उद्यान ने दक्षिण अफ्रीका से आठ कैपुचिन बंदरों का आयात किया।
  • आयातित प्रजाति: ब्लैक-कैप्ड कैपुचिन (Sapajus apella)।
  • यह आयात पशु विनिमय कार्यक्रम के तहत किया गया।
  • अंतरराष्ट्रीय पशु स्थानांतरण के लिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की अनुमति अनिवार्य है।
  • भारत में आयात से पहले पशु क्वारंटीन सेवाओं की स्वीकृति आवश्यक होती है।
[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

भारत का कौन-सा राज्य कहलाता है “Spice Garden of India”? जिसके मसालें दुनिया-भर में है मशहूर

भारत अपने मसालों के लिए सदियों से पूरी दुनिया में प्रसिद्ध रहा है। भारतीय मसालों…

1 day ago

भारत का सबसे अमीर गांव कौन-सा है? यहां हर घर में करोड़ों की संपत्ति, बैंक में जमा हैं हजारों करोड़

भारत गांवों का देश कहा जाता है। यहां लाखों गांव हैं, जिनमें से कई आज…

2 days ago

क्या आप जानते हैं भारत का Tea Capital कौन-सा राज्य है? यहां उगती है सबसे ज्यादा चाय

रेलवे स्टेशन हो, ऑफिस हो या गांव की चौपाल — चाय हर जगह लोगों की…

2 days ago

भारत का कौन-सा शहर कहलाता है “Mini India”? जानिए क्यों मिली यह खास पहचान

भारत अपनी विविधता, संस्कृति, भाषाओं और परंपराओं के लिए दुनिया भर में जाना जाता है।…

3 days ago

भारत का पहला पूरी तरह डिजिटल बैंकिंग अपनाने वाला राज्य कौन-सा है? जानिए कैसे बदली बैंकिंग की तस्वीर

भारत में पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल क्रांति ने बैंकिंग सेक्टर की तस्वीर पूरी तरह…

3 days ago

World Red Cross Day 2026: क्यों मनाया जाता है रेड क्रॉस डे? जानें इतिहास, थीम, महत्व

प्रत्येक वर्ष 8 मई को दुनिया-भर में World Red Cross Day के रूम में मनाया जाता…

6 days ago