देश के बड़े आयुर्वेदाचार्यों में शुमार डॉ. पीके वारियर ने शनिवार को केरल के कोट्टाक्कल स्थित अपने घर पर अंतिम सांल ली। डॉ पीके कोट्टक्कल आर्य वैद्य शाला के मुख्य चिकित्सक और मैनेजिंग ट्रस्टी भी थे। इस वैद्यशाला की शाखाएं पूरे देश में फैली हुई हैं।
प्रख्यात आयुर्वेदाचार्य डॉ वारियर को 1999 में पद्मश्री और 2010 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। स्मृतिपर्वम नामक उनकी आत्मकथा ने 2009 में केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार जीता।
[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
भारत सरकार ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लेते हुए Reserve Bank of India के नए…
क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा शहर भी है, जिसे ‘झंडों का…
भारत में वन्यजीवों की समृद्ध विरासत के बीच एशियाई हाथी एक महत्वपूर्ण प्रजाति है। ऐसे…
भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव किया गया है। अनुग्रह…
भारतीय सिनेमा और इंटरनेशनल फिल्म इंडस्ट्री के लिए बड़ी खबर सामने आई है। सूचना एवं…
भारत के लिए गर्व की बात है कि भारतीय वैज्ञानिक परवीन शेख को 2026 का…