ऑस्ट्रेलिया ने शुरुआती चरण के उपयोग के लिए अल्जाइमर ड्रग लेकेनमैब को मंजूरी दी

डिमेंशिया देखभाल के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए, ऑस्ट्रेलिया की Therapeutic Goods Administration (TGA) ने लेकेनेमैब (Lecanemab) को शुरुआती चरण के अल्ज़ाइमर रोग के उपचार के लिए मंज़ूरी दे दी है। सितंबर 2025 में लिया गया यह निर्णय ऑस्ट्रेलिया में बढ़ते अल्ज़ाइमर मामलों के बीच आया है — जो अब देश में मृत्यु का प्रमुख कारण बन चुका है। लेकेनेमैब इस बीमारी को संशोधित (disease-modifying) करने वाली केवल दूसरी दवा है जिसे ऑस्ट्रेलिया में नियामक स्वीकृति मिली है। हालांकि यह रोगियों के लिए आशा की किरण है, लेकिन लागत, उपलब्धता और सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएँ भी उठी हैं।

लेकेनेमैब कैसे काम करती है

  • यह एक मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थेरेपी है जो एमाइलॉयड-बीटा (amyloid-beta) प्लाक्स को निशाना बनाती है — जो अल्ज़ाइमर रोग की मुख्य पहचान मानी जाती है।

  • ये प्लाक्स तब बनते हैं जब असामान्य प्रोटीन मस्तिष्क की कोशिकाओं के बीच जमा होकर उनकी संचार प्रणाली को बाधित करते हैं।

  • लेकेनेमैब घुलनशील एमाइलॉयड प्रोटोफाइब्रिल्स से जुड़कर प्रतिरक्षा प्रणाली को उन्हें साफ करने के लिए प्रेरित करती है, जिससे रोग की प्रगति धीमी पड़ती है — विशेषकर हल्के संज्ञानात्मक ह्रास (mild cognitive impairment) या माइल्ड डिमेंशिया वाले मरीजों में।

क्लिनिकल परिणाम और प्रभावशीलता

18 महीनों के एक फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल (1,795 प्रतिभागी) में दवा ने प्रभावी परिणाम दिखाए —

  • 27–30% तक धीमा संज्ञानात्मक पतन (placebo की तुलना में)

  • 5–6 महीने तक रोग की प्रगति में विलंब

  • ब्रेन स्कैन में एमाइलॉयड प्लाक में निरंतर कमी

हालांकि, यह दवा लक्षणों को उलट नहीं सकती और न ही रोग को पूरी तरह रोक सकती है। इसका मुख्य लाभ केवल शुरुआती चरणों में याददाश्त ह्रास को धीमा करने में है।

सुरक्षा चिंताएँ और MRI निगरानी

TGA ने दवा की स्वीकृति कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल्स के साथ दी है, क्योंकि इससे मस्तिष्क सूजन (ARIA-E) और सूक्ष्म रक्तस्राव (ARIA-H) का खतरा रहता है —

  • 12.6% मरीजों में मस्तिष्क में सूजन देखी गई

  • जिन मरीजों में APOE ε4 जीन की दो प्रतियाँ थीं, उनमें यह जोखिम 32.6% तक बढ़ गया

  • दुष्प्रभाव: सिरदर्द, चक्कर, धुंधला दिखना, और दुर्लभ मामलों में गंभीर रक्तस्राव

  • मरीजों को हर तीन महीने में MRI स्कैन कराना अनिवार्य होगा

इसी कारण, TGA ने यह दवा केवल उन रोगियों के लिए स्वीकृत की है जो APOE ε4 जीन के गैर-वाहक (non-carriers) या heterozygotes हैं।

लागत और उपलब्धता

लेकेनेमैब की ऊँची कीमत इसे आम मरीजों की पहुँच से दूर बनाती है —

  • लागत: लगभग A$40,000 प्रति वर्ष

  • अतिरिक्त खर्च: बार-बार MRI स्कैन, चिकित्सक परामर्श, और इन्फ्यूजन फीस

  • अभी यह Pharmaceutical Benefits Scheme (PBS) के तहत सब्सिडी में शामिल नहीं है

  • Pharmaceutical Benefits Advisory Committee (PBAC) इस पर समीक्षा कर रही है

  • फिलहाल, यह उपचार केवल विशेषज्ञ मेमोरी क्लीनिकों और चुनिंदा केंद्रों में ही उपलब्ध रहेगा।

कौन लेकेनेमैब से लाभान्वित हो सकता है

योग्य मरीज:

  • शुरुआती चरण के अल्ज़ाइमर (माइल्ड कॉग्निटिव इंपेयरमेंट या माइल्ड डिमेंशिया)

  • एमाइलॉयड प्लाक्स की पुष्टि (PET स्कैन या CSF टेस्टिंग से)

  • APOE ε4 जीन के गैर-वाहक या heterozygotes

अनुशंसित नहीं:

  • उन्नत अल्ज़ाइमर वाले मरीज

  • अन्य प्रकार के डिमेंशिया (जैसे वैस्कुलर या लुई बॉडी)

  • रक्त-पतला करने वाली दवाएँ (blood thinners) लेने वाले मरीज

इस दवा के उपयोग के लिए शुरुआती पहचान, मेमोरी टेस्टिंग, और जीन परीक्षण बेहद आवश्यक होंगे ताकि योग्य मरीजों की पहचान की जा सके।

सारांश:

लेकेनेमैब (Leqembi) की मंज़ूरी अल्ज़ाइमर के इलाज में एक वैज्ञानिक मील का पत्थर है। यह रोग की गति को धीमा करने में मदद कर सकती है, पर इसके उच्च खर्च, सुरक्षा जोखिम और सीमित पात्रता इसे फिलहाल एक चुनिंदा उपचार बनाते हैं।

[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

दुनिया का सबसे जहरीला बिच्छू कौन सा है?, जानें कहाँ पाए जाते हैं सबसे ज्यादा बिच्छू

धरती पर मौजूद सबसे डरावने जीवों में बिच्छू (Scorpion) का नाम जरूर लिया जाता है।…

2 days ago

भारत में कहाँ है एशियाई शेरों का असली घर? दुनिया की इकलौती जगह जहाँ जंगल में आज़ादी से घूमते हैं Asiatic Lions

शेरों का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में अफ्रीका के विशाल जंगलों की तस्वीर…

4 days ago

भारत का कौन-सा राज्य कहलाता है “Spice Garden of India”? जिसके मसालें दुनिया-भर में है मशहूर

भारत अपने मसालों के लिए सदियों से पूरी दुनिया में प्रसिद्ध रहा है। भारतीय मसालों…

5 days ago

भारत का सबसे अमीर गांव कौन-सा है? यहां हर घर में करोड़ों की संपत्ति, बैंक में जमा हैं हजारों करोड़

भारत गांवों का देश कहा जाता है। यहां लाखों गांव हैं, जिनमें से कई आज…

6 days ago

क्या आप जानते हैं भारत का Tea Capital कौन-सा राज्य है? यहां उगती है सबसे ज्यादा चाय

रेलवे स्टेशन हो, ऑफिस हो या गांव की चौपाल — चाय हर जगह लोगों की…

6 days ago

भारत का कौन-सा शहर कहलाता है “Mini India”? जानिए क्यों मिली यह खास पहचान

भारत अपनी विविधता, संस्कृति, भाषाओं और परंपराओं के लिए दुनिया भर में जाना जाता है।…

1 week ago