असम सरकार द्वारा असम मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम और नियम 1935 को निरस्त कर दिया गया है। सीएम सरमा ने कहा कि इस कानून को खत्म करने का मकसद लैंगिक न्याय और बाल विवाह को कम करने का है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने घोषणा की कि विधेयक विधानसभा के आगामी मानसून सत्र के दौरान पेश किया जाएगा। इस निर्णय का उद्देश्य बाल विवाह के मुद्दों को संबोधित करना और विवाह और तलाक के पंजीकरण में समानता लाना है।
1935 के अधिनियम ने विशेष परिस्थितियों में कम उम्र में विवाह की अनुमति दी और मुस्लिम विवाहों और तलाक के स्वैच्छिक पंजीकरण का प्रावधान किया। इसने 94 व्यक्तियों को ये पंजीकरण करने के लिए अधिकृत किया। मंत्रिमंडल का यह कदम समकालीन सामाजिक मानदंडों और कानूनी मानकों के साथ तालमेल बिठाते हुए पुराने अधिनियम को निरस्त करने के अपने फरवरी के फैसले के बाद आया है। सरकार का लक्ष्य बाल विवाह के खिलाफ सख्त सुरक्षा उपाय लागू करना है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि इस कानून का मकसद असम मुस्लिम विवाह और तलाक एक्ट 1935 और असम मुस्लिम विवाह और तलाक रजिस्ट्रेशन नियम 1935 को निरस्त करना है। असम मंत्रिमंडल ने यह भी निर्देश दिया है कि राज्य में मुस्लिम विवाहों के रजिस्ट्रेशन के लिए कानून लाया जाए। इस मुद्दे पर भी विधानसभा में चर्चा की जाएगी।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि हमने बाल विवाह के खिलाफ अतिरिक्त सुरक्षा उपाय करके अपनी बेटियों और बहनों के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आज असम कैबिनेट की बैठक में हमने असम निरसन विधेयक 2024 के जरिए असम मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम 1935 को निरस्त करने का निर्णय लिया है।
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