लोकसभा ने प्रस्ताव पारित कर दिया है और अमरावती को आंध्र प्रदेश की एकमात्र राजधानी घोषित कर दिया गया है। यह कदम राज्य की राजधानी संरचना को लेकर वर्षों से चल रही राजनीतिक बहस और नीतिगत बदलावों के बाद उठाया गया है। यह कदम संसद में बनी मज़बूत आम सहमति को दर्शाता है और साथ ही राज्य में चल रही राजनीतिक बहसों पर भी विराम लगाता है।
लोकसभा ने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 में संशोधन किया है और आधिकारिक तौर पर अमरावती को आंध्र प्रदेश की एकमात्र राजधानी घोषित किया है।
यह संशोधन:
2014 में आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद, हैदराबाद ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना, दोनों राज्यों की साझा राजधानी के रूप में कार्य किया। और यह व्यवस्था 10 वर्षों तक जारी रहने वाली थी।
कानून के अनुसार, अंततः हैदराबाद केवल तेलंगाना की राजधानी बन जाएगा, और आंध्र प्रदेश को अपनी अलग राजधानी स्थापित करनी होगी। इस कदम से, एक लंबे समय से लंबित आवश्यकता पूरी हो गई है।
राज्य की राजधानी का मुद्दा पिछले कुछ वर्षों में एक बड़े राजनीतिक बदलाव के तौर पर देखा गया है।
पिछले मॉडल (तीन राजधानियों की योजना) के तहत—इस योजना को YS जगन मोहन रेड्डी ने पेश किया था, जो उस समय (2019-2024) राज्य के मुख्यमंत्री थे।
इस तरह के विकेंद्रीकृत मॉडल का उद्देश्य संतुलित क्षेत्रीय विकास करना था, लेकिन इसे आलोचनाओं और कानूनी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा।
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