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इसरो के 42वें पीएसएलवी के सफल लॉन्च के सन्दर्भ में पूर्ण जानकारी

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के प्रथम लॉन्च पैड से अपने 42वें पोलर सॅटॅलाइट लॉन्च वेहिकल(पीएसएलवी) का शुभारंभ किया. PSLV-C40 पर दो कक्षाओं में सात देशों से उत्पन्न 31 उपग्रहों को स्थापित किया गया था. 

यह प्राथमिक पेलोड उन्नत रिमोट सेंसिंग कार्टोसैट-2 श्रृंखला में चौथा उपग्रह था. उपग्रह का डिजाइन जीवनकाल पांच वर्ष है. इसरो ने भारत की 100वीं सैटेलाइट के अलावा 30 अन्य सैटलाइट भी अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक लॉन्च की. 
लॉन्च सैटेलाइट के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य-
  1. 30 अन्य उपग्रहों में भारत के दो अन्य उपग्रह और छह देशों-कनाड, फिनलैंड, फ्रांस, कोरिया, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका से 28 उपग्रह शामिल हैं.
  2. जिसे वैज्ञानिक “मल्टी बर्न टेक्नोलॉजी” कहते हैं यह उसके द्वारा पूर्ण किया गया, जिसके तहत रॉकेट का इंजन बंद हो जाता है और फिर इसकी ऊंचाई को नियंत्रित करने के लिए स्विच ऑन हो जाता है.
  3. पृथ्वी अवलोकन के लिए 710 किलोग्राम का काटरेसेट-2 सीरीज मिशन का प्राथमिक उपग्रह है. सीरीज़ का अंतिम उपग्रह जून 2016 में सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था.
  4. चौथे चरण के पीएसएलवी-सी-40 का वजन 320 टन और ऊंचाई 44.4 मीटर होगी, एक 15 मंजिला इमारत के बराबर.
IBPS Clerk Mains 2017 परीक्षा के लिए उपरोक्त समाचार से परीक्षा उपयोगी तथ्य –

  • रॉकेट वैज्ञानिक सिवान के. को हाल ही में इसरो के 9वें अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया.
  • इसरो की स्थापना 1969 में हुई थी.
  • इसरो के संस्थापक और प्रथम अध्यक्ष-विक्रम अम्बालाल साराभाई, मुख्यालय- कर्नाटक के बेंगलुरू में.
स्रोत- द हिंदू


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