Indian Army की बढ़ी ताकत, भारतीय सेना को ‘प्रहार’ LMGs का पहला बैच मिला

भारतीय सेना (Indian Army) की मारक क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। सेना को 7.62 मिमी कैलिबर की 2000 ‘प्रहार’ लाइट मशीन गन (एलएमजी) की पहली खेप मिल गई है। यह अत्याधुनिक हथियार ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत देश में ही निर्मित किए गए हैं। इन मशीन गनों का निर्माण अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस द्वारा किया गया है। कंपनी ने तय समय से पहले इनकी डिलीवरी कर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।

प्रहार LMG की खासियत क्या है?

इजरायली ‘नेगेव 7.62×51 लाइट मशीन गन, जिसे हम प्रहार कहते हैं, ज्यादा मारक क्षमता और भरोसे वाली एडवांस मशीन गन है। ये 7.62 mm कैलिबर की एक बेहद शक्तिशाली गन है। इसकी सबसे बड़ी खूबी इसका वजन है। यह केवल 7.6 किलो की है, जो अपनी कैटेगरी की दूसरी बंदूकों से 20 से 30 प्रतिशत तक हल्की है। इसका साइज छोटा किया जा सकता है, जिससे पैराट्रूपर्स (आसमान से कूदने वाले सैनिक) इसे आसानी से ले जा सकते हैं। यह युद्ध के मैदान में सैनिकों की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी।

एलएमजी आधुनिक तकनीक से लैस

नई ‘प्रहार’ एलएमजी आधुनिक तकनीक से लैस है, जिससे सैनिकों को युद्ध के दौरान अधिक सटीकता और बेहतर फायरपावर मिलेगी। इनका वजन अपेक्षाकृत हल्का है, जिससे इन्हें कठिन इलाकों में आसानी से इस्तेमाल किया जा सकेगा।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी स्तर पर इस तरह के हथियारों का निर्माण न केवल आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा, बल्कि सेना की परिचालन क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि करेगा। यह कदम भारत की रक्षा तैयारियों को और सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

समय से पहले डिलीवरी?

यह खेप तय समय से 11 महीने पहले ही डिलीवर कर दी गई। रक्षा मंत्रालय के महानिदेशक (अधिग्रहण) ए. अनबरसु ने इसे ‘समय के खिलाफ दौड़’ जीतना बताया। कंपनी के CEO आशीष राजवंशी के मुताबिक, कुल 40,000 बंदूकों का ऑर्डर है, जिसे अगले 3 साल में पूरा कर लिया जाएगा। ग्वालियर की यह यूनिट प्रत्येक वर्ष 1 लाख हथियार बनाने की क्षमता रखती है।

विदेशों पर हमारी निर्भरता कम

यह केवल एक हथियार की डिलीवरी नहीं है, बल्कि भारत का कंपोनेंट बनाने वाली कंपनी से ‘ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर’ (OEM) बनने का सफर है। अब भारत में ही पिस्तौल, स्नाइपर और असॉल्ट राइफलें बन रही हैं, जिससे विदेशों पर हमारी निर्भरता कम हो रही है।

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vikash

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