अरुण शौरी, जो भारत के सबसे सम्मानित बौद्धिक विचारकों में से एक हैं, ने अपनी लेखन यात्रा की सबसे महत्वपूर्ण पुस्तक ‘द न्यू आइकन: सावरकर एंड द फैक्ट्स’ लिखी है। यह पुस्तक 31 जनवरी 2024 को प्रकाशित हुई और विनायक दामोदर सावरकर की विवादास्पद विरासत पर एक तीखा विश्लेषण प्रस्तुत करती है। इसमें सावरकर के आधुनिक भारतीय राजनीति पर प्रभाव की गहन आलोचना की गई है।
यह पुस्तक शौरी की 1997 में प्रकाशित कृति ‘वर्शिपिंग फॉल्स गॉड्स: अंबेडकर एंड द फैक्ट्स विच हैव बीन इरेज़्ड’ की तरह इतिहास की स्थापित धारणाओं को चुनौती देती है। हालांकि, बी.आर. अंबेडकर की आलोचना राजनीतिक रूप से विवादास्पद बनी हुई है, लेकिन सावरकर को ऐसा कोई सामाजिक या राजनीतिक संरक्षण नहीं प्राप्त है, जिससे यह पुस्तक राष्ट्रीय विमर्श को और अधिक प्रभावित कर सकती है।
शौरी की इस पुस्तक की सबसे विस्फोटक जानकारी सावरकर की गांधी हत्या में कथित भूमिका से जुड़ी है। यह पुस्तक पहले 30 जनवरी को, गांधी जी की पुण्यतिथि पर, प्रकाशित होने वाली थी, लेकिन सावरकर समर्थकों के विरोध के कारण इसे एक दिन के लिए स्थगित कर दिया गया।
इसमें लेखक ने विस्तृत साक्ष्यों के आधार पर यह दर्शाया है कि सावरकर की विचारधारा महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे से कैसे जुड़ी हुई थी। वे सावरकर के न्यायालय में दिए गए बयानों की गहराई से जांच करते हुए उन्हें “पूरी तरह मनगढ़ंत” बताते हैं और लिखते हैं कि “उनके किसी भी कथन में सच्चाई का अंश नहीं बचता”। यह साहसिक दावा सावरकर को भारतीय राजनीतिक इतिहास की सबसे विवादास्पद बहसों में केंद्र में ला खड़ा करता है।
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