एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ़ इंडिया (Associated Chambers of Commerce and Industry of India) के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था FY27 में 7% से अधिक की विकास दर बनाए रख सकती है। यह अनुमान दर्शाता है कि वैश्विक आर्थिक मंदी की आशंकाओं के बावजूद भारत की मजबूत घरेलू मांग और बढ़ते निवेश आर्थिक वृद्धि को सहारा देते रहेंगे। उद्योग संगठन के अनुसार FY26 में GDP वृद्धि लगभग 7.6% रहने का अनुमान है और इसके बाद भी वृद्धि दर 7% से ऊपर बनी रह सकती है।
घरेलू मांग और निवेश: विकास की मुख्य ताकत
भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति के पीछे सबसे बड़ा कारण घरेलू मांग है। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में बढ़ती खपत ने आर्थिक गतिविधियों को स्थिर और विस्तारशील बनाए रखा है।
साथ ही, भारत के परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) के आंकड़े भी इस मजबूती को दर्शाते हैं। फरवरी 2026 में मैन्युफैक्चरिंग PMI 56.9 और सर्विसेज PMI 58.1 रहा, जो अमेरिका, चीन और जर्मनी जैसी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है।
निर्यात वृद्धि से मिल रहा सहारा
भारत का निर्यात क्षेत्र भी आर्थिक वृद्धि का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना हुआ है। अप्रैल–फरवरी FY26 के दौरान देश का कुल निर्यात 791 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष के 748 अरब डॉलर से अधिक है।
मुख्य निर्यात क्षेत्र शामिल हैं:
- इंजीनियरिंग उत्पाद
- इलेक्ट्रॉनिक्स
- रसायन (केमिकल्स)
- रत्न एवं आभूषण
- कृषि उत्पाद
अनुमान है कि FY26 में निर्यात 870 अरब डॉलर को पार कर सकता है, जो पिछले वर्ष के 824 अरब डॉलर से अधिक होगा।
वैश्विक जोखिम और भू-राजनीतिक चुनौतियां
हालांकि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताएं एक बड़ी चिंता बनी हुई हैं। विशेष रूप से पश्चिम एशिया में जारी तनाव वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और ऊर्जा बाजारों को प्रभावित कर सकता है।
यदि संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान जैसे देशों के बीच संघर्ष बढ़ता है, तो इसके परिणामस्वरूप:
- लॉजिस्टिक्स और परिवहन लागत में वृद्धि
- वस्तुओं की कीमतों में अस्थिरता
- वैश्विक व्यापार मार्गों में बाधा
जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं, जो भारत की अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव डाल सकती हैं।


