भारतीय सेना ने उत्तरी सिक्किम में फँसे 1,400 से ज़्यादा पर्यटकों और स्थानीय लोगों को बचाने के लिए ‘ऑपरेशन हिमसेतु’ शुरू किया है। यह घटना बड़े पैमाने पर हुए भूस्खलन और लाचेन के पास हाल ही में बने एक पुल के अचानक टूट जाने के कारण हुई, और इस संकट ने इस क्षेत्र में संपर्क व्यवस्था को बाधित कर दिया है। भारत-चीन सीमा के पास भारी बर्फबारी सहित मौसम की बेहद खराब परिस्थितियों के बावजूद, भारतीय सेना की बचाव टीमों ने देश के सबसे दुर्गम इलाकों में से एक में 48 घंटों के भीतर एक सुव्यवस्थित बचाव अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है।
ऑपरेशन हिमसेतु: अत्यंत कठिन परिस्थितियों में बचाव अभियान
ऑपरेशन हिमसेतु, जो कि एक बचाव अभियान था, का नेतृत्व भारतीय सेना की त्रिशक्ति कोर ने अपनी पूर्वी कमान के अंतर्गत किया।
इस अभियान के तहत 1,321 पर्यटकों और 84 स्थानीय निवासियों को सफलतापूर्वक सुरक्षित निकाला गया।
खराब मौसम और मुश्किल इलाके की चुनौतियों का सामना करते हुए, नागरिकों को निकालने का सारा काम 48 घंटों के भीतर, बिना किसी घटना के और तेज़ी से पूरा कर लिया गया।
सेना की बचाव टीमों ने ज़मीन पर लगातार काम किया, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि मेडिकल इमरजेंसी को प्राथमिकता दी जाए और सभी लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुँचाया जाए।
उत्तरी सिक्किम में संकट की वजह क्या थी?
यह स्थिति बड़े पैमाने पर हुए भूस्खलन और लगातार हो रही बर्फबारी के कारण पैदा हुई, जिसके परिणामस्वरूप:
- तारुम चू के पास हाल ही में बना पुल ढह गया।
- साथ ही, उस क्षेत्र को जोड़ने वाली सड़कों को भी भारी नुकसान पहुँचा।
- और सिक्किम के लाचेन क्षेत्र तक पहुँच पूरी तरह से बाधित हो गई।
इस पुल का उद्घाटन दो महीने पहले, फरवरी 2026 में किया गया था; लेकिन मौसम की अत्यधिक प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण यह महज़ एक महीने के भीतर ही ढह गया। यह घटना इस अत्यंत दुर्गम भूभाग की संवेदनशीलता को उजागर करती है।
सेना की ज़मीनी प्रतिक्रिया और बुनियादी ढाँचागत सहायता
भारतीय सेना ने इस संकट से निपटने के लिए तत्काल समाधान लागू किए हैं।
अस्थायी पुल का निर्माण
भारतीय सेना के जवानों ने पैदल चलने के लिए एक अस्थायी पुल बनाया है, जिससे फँसे हुए लोग सुरक्षित रूप से दूसरी ओर जा पा रहे हैं।
निकासी की व्यवस्था
- सेना के कई वाहनों ने लोगों को क्रॉसिंग पॉइंट्स से दूसरी ओर पहुँचाया है।
- इसके अलावा, नागरिक वाहनों को भी दुर्गम इलाकों से खींचकर पार कराया गया।
राहत और सहायता केंद्र
इस निकासी अभियान के दौरान, भोजन और आश्रय, चिकित्सा सहायता तथा आपातकालीन देखभाल उपलब्ध कराने के लिए स्वागत केंद्र भी स्थापित किए गए थे।
यह अभियान सीमा सड़क संगठन (BRO) और नागरिक प्रशासन के समन्वय से चलाया गया, जिन्होंने एक साथ मिलकर निम्नलिखित कार्यों पर काम किया:
- बर्फ हटाना
- सड़क की बहाली
- संपर्क व्यवस्था की मरम्मत



