पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहसिना किदवई का निधन

देश की वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री, पूर्व केंद्रीय मंत्री और उत्तर प्रदेश की राजनीति का अहम चेहरा रहीं मोहसिना किदवई का 8 अप्रैल, 2026 को दिल्ली में निधन हो गया। 94 वर्ष की आयु में उन्होंने सुबह करीब चार बजे अस्पताल में आखिरी सांस ली। उनके निधन से कांग्रेस पार्टी सहित पूरे राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

मोहसिना किदवई का राजनीतिक जीवन

मोहसिना किदवई का राजनीतिक जीवन बेहद लंबा और प्रभावशाली रहा है। वह कांग्रेस पार्टी की कद्दावर नेतओं में गिनी जाती थीं और गांधी परिवार के काफी करीबी मानी जाती थीं। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के कार्यकाल में केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली थी। उनके कार्यकाल के दौरान उन्होंने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, शहरी विकास, पर्यटन, परिवहन और ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों का सफलतापूर्वक संचालन किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार में भी खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, समाज कल्याण और लघु उद्योग जैसे विभागों में मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

मोहसिना किदवई का जन्म

मोहसिना किदवई का जन्म 1 जनवरी 1932 को एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। वह उच्च शिक्षित थीं और शुरुआत से ही सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहीं। उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति से अपने करियर की शुरुआत की और धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में उत्तर प्रदेश विधान परिषद एवं विधानसभा की सदस्यता के साथ-साथ कई बार लोकसभा और राज्यसभा सांसद के रूप में देश की सेवा की। वह मेरठ से लोकसभा सांसद रहीं एवं बाद में राज्यसभा के लिए भी निर्वाचित हुईं।

मोहसिना किदवई एक मजबूत और अनुभवी नेता

मोहसिना किदवई को एक मजबूत, अनुभवी और जमीन से जुड़ी नेता के रूप में जाना जाता था। उनकी पहचान एक सुलझी हुई और प्रभावशाली राजनेता की रही, जिनका प्रदेश और केंद्र की राजनीति में लंबे समय तक दबदबा रहा। उनके निधन पर कांग्रेस नेताओं समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है। मसौली एवं बाराबंकी के लोगों के लिए यह क्षति केवल एक नेता के जाने की नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र की उस बेटी को खोने की है जिसने राष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन किया।

 

 

 

ब्लैंका व्लासिक वर्ल्ड 10K बेंगलुरु 2026 की ग्लोबल एम्बेसडर नियुक्त

मशहूर TCS वर्ल्ड 10k बेंगलुरु रेस (TCS World 10k Bengaluru race) 26 अप्रैल 2026 को होगी, और इस साल इसमें एक खास बात है। जानी-मानी एथलीट ब्लैंका व्लासिक को इंटरनेशनल इवेंट एम्बेसडर बनाया गया है, जिससे इस इवेंट को दुनिया भर में पहचान और उत्साह मिलेगा।

ब्लैंका व्लासिक कौन हैं?

ब्लैंका व्लासिक क्रोएशिया की एक पूर्व हाई जंप स्टार हैं और उन्हें इस खेल की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में से एक माना जाता है। उनका करियर काफी लंबा और सफल रहा है। उन्होंने 2008 के बीजिंग ओलंपिक में रजत पदक और 2016 के रियो ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था।

उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में भी कई पदक जीते हैं। 2009 में हासिल की गई उनकी 2.08 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग, आज भी क्रोएशिया का राष्ट्रीय रिकॉर्ड है और महिलाओं की हाई जंप के इतिहास में अब तक की सबसे ऊंची छलाँगों में से एक है।

प्रतिभागियों के लिए उनका संदेश

ब्लैंका व्लासिक ने इस कार्यक्रम में शामिल होने पर अपनी खुशी ज़ाहिर की। उन्होंने कहा कि उन्हें इस इतनी बड़ी दौड़ का हिस्सा बनकर गर्व महसूस हो रहा है, जो हज़ारों लोगों को एक साथ लाती है।

उन्होंने सभी प्रतिभागियों को अच्छी तैयारी करने, अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने और इस सफ़र का आनंद लेने के लिए प्रोत्साहित किया। उनके अनुसार, दौड़ना केवल फ़िटनेस के बारे में ही नहीं है, बल्कि मानसिक रूप से मज़बूत बने रहने के बारे में भी है।

खेलों से परे उनकी भूमिका

अपने सक्रिय खेल करियर के बाद भी, व्लासिक एथलेटिक्स से जुड़ी हुई हैं। वह “चैंपियंस फॉर पीस” पहल का हिस्सा हैं और क्रोएशियाई ओलंपिक समिति की उपाध्यक्ष के रूप में भी कार्य करती हैं। वह युवा एथलीटों का समर्थन करना और खेलों को बढ़ावा देना जारी रखती हैं।

आयोजकों ने क्या कहा?

प्रोकाम इंटरनेशनल (Procam International) के विवेक सिंह ने कहा कि वे ब्लैंका व्लासिक को एम्बेसडर के तौर पर पाकर बेहद खुश हैं। उन्होंने बताया कि उनकी उपलब्धियाँ और अनुभव कई धावकों को प्रेरित करेंगे और इस कार्यक्रम को और भी ज़्यादा खास बना देंगे।

TCS वर्ल्ड 10k बेंगलुरु के बारे में

TCS वर्ल्ड 10k बेंगलुरु दुनिया की सबसे लोकप्रिय 10-किलोमीटर की दौड़ में से एक है। इसमें शीर्ष एथलीटों के साथ-साथ आम धावक भी हिस्सा लेते हैं। यह आयोजन केवल प्रतिस्पर्धा के बारे में ही नहीं, बल्कि फिटनेस और सामुदायिक भावना को बढ़ावा देने के बारे में भी है।

 

Bank of Baroda ने बहुभाषी एआई प्लेटफॉर्म ‘बॉब संवाद’ शुरू किया

बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) ने अपने ग्राहकों के अनुभव को और बेहतर बनाने हेतु एक नया डिजिटल पहल शुरू किया है। बैंक ने हाल ही में अपनी शाखाओं में बहुभाषी, कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित (AI platform) संवाद मंच ‘बीओबी संवाद’ लॉन्च किया। इस मंच का मुख्य उद्देश्य ग्राहकों और बैंक कर्मचारियों के बीच भाषाई बाधाओं को कम करना और संवाद को सरल और सहज बनाना है। वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम नागराजू ने इस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उद्घाटन किया।

मुंबई में औपचारिक शुभारंभ

इस प्लेटफॉर्म का औपचारिक शुभारंभ 28 मार्च, 2026 को मुंबई में वित्त मंत्रालय के अंतर्गत वित्तीय सेवा विभाग के सचिव श्री एम. नागराजू द्वारा किया गया। उन्होंने ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाने तथा बैंकिंग सेवाओं को सभी के लिए अधिक समावेशी और सुलभ बनाने हेतु आधुनिक तकनीक के उपयोग के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा की सराहना की।

पसंदीदा भाषा में संवाद करने की सुविधा

‘बीओबी संवाद’ प्लेटफॉर्म ग्राहकों और शाखा कर्मचारियों को उनकी पसंदीदा भाषा में संवाद करने की सुविधा देता है। इसका मतलब यह है कि ग्राहक अपनी भाषा में सवाल पूछ सकते हैं या टाइप कर सकते हैं, और बैंक कर्मचारी उसी समय अपने उत्तर अपनी चुनी हुई भाषा में दे सकते हैं। इस प्रक्रिया में कोई समय की बाधा नहीं आती और संवाद प्राकृतिक और सटीक रहता है। बैंक ने बयान में कहा कि यह मंच भाषाई बाधाओं को दूर करने के लिए डिजाइन किया गया है और ग्राहकों एवं शाखा कर्मचारियों को उनकी पसंदीदा भाषा में सहज संवाद करने में सक्षम बनाता है।

AI तकनीक पर आधारित

पूरी तरह आंतरिक स्तर पर विकसित यह मंच एआई-संचालित भाषण और भाषा प्रौद्योगिकियों का उपयोग करता है और यह 22 भाषाओं में वास्तविक समय, दोतरफा संवाद को सक्षम बनाता है। यह सुनिश्चित करता है कि बातचीत संदर्भ के अनुरूप सटीक और प्राकृतिक प्रवाह वाली हो।

पसंदीदा भाषा में सवाल पूछना

बैंक ने कहा कि इस मंच के जरिये ग्राहक सेवा काउंटर पर अपनी पसंदीदा भाषा में सवाल पूछ सकते हैं या टाइप कर सकते हैं जिसका कर्मचारी की चुनी हुई भाषा में तुरंत अनुवाद किया जाता है। इसी तरह, कर्मचारियों के उत्तर भी ग्राहक की भाषा में तुरंत उपलब्ध होते हैं।

 

INS सुनयना माले पहुंचा, भारत-मालदीव समुद्री सहयोग मजबूत

भारत ने अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को मज़बूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। भारतीय नौसेना का जहाज़ INS सुनायना हाल ही में ‘IOS SAGAR’ नामक एक विशेष मिशन के तहत मालदीव की राजधानी माले पहुँचा। यह यात्रा हिंद महासागर क्षेत्र में मित्रता, सहयोग और सुरक्षा के प्रति भारत की मज़बूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

मालदीव में गर्मजोशी भरा स्वागत

INS सुनायना 6 अप्रैल 2026 को माले पहुँचा, जहाँ मालदीव नेशनल डिफेंस फोर्स (MNDF) ने उसका गर्मजोशी से स्वागत किया। यह मैत्रीपूर्ण स्वागत भारत और मालदीव के बीच घनिष्ठ संबंधों को दर्शाता है, विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा और सहयोग के क्षेत्रों में।

राष्ट्रीय रक्षा बल के दो कर्मी भी शामिल

आईएनएस सुनयना पर तैनात बहुराष्ट्रीय नाविक दल में मालदीव राष्ट्रीय रक्षा बल के दो कर्मी भी शामिल हैं। यह पहल क्षेत्रीय सहयोग और आपसी विश्वास को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

यात्रा के दौरान प्रशिक्षण

माले की यात्रा के दौरान, चालक दल ने कई प्रशिक्षण गतिविधियाँ कीं। इनमें जहाज़ को संभालने के बुनियादी कौशल (सीमैनशिप), छोटे हथियारों से फायरिंग और नुकसान नियंत्रण (damage control) जैसे आपातकालीन अभ्यास शामिल थे। ये अभ्यास आपसी तालमेल को बेहतर बनाने में मदद करते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि चालक दल के सभी सदस्य विभिन्न स्थितियों को मिलकर संभालने के लिए तैयार रहें।

भारतीय उच्चायुक्त का दौरा

माले पहुँचने के बाद, मालदीव में भारत के उच्चायुक्त श्री जी. बालासुब्रमण्यम ने INS सुनायना का दौरा किया। उन्होंने चालक दल से मुलाकात की और उनके प्रयासों की सराहना की। इस तरह के दौरे मनोबल बढ़ाने और राजनयिक संबंधों को मज़बूत करने में सहायक होते हैं।

बंदरगाह दौरे के दौरान नियोजित गतिविधियाँ

मालदीव में अपने प्रवास के दौरान, कई गतिविधियों की योजना बनाई गई है। इनमें पेशेवर बैठकें, सामाजिक मेल-जोल और खेल कार्यक्रम शामिल हैं। इन सभी गतिविधियों का उद्देश्य भाग लेने वाले देशों के बीच बेहतर समझ, मित्रता और सहयोग को बढ़ावा देना है।

संयुक्त नौसेना अभ्यास (PASSEX)

जब INS सुनायना माले से रवाना होगा, तो वह MNDF कोस्ट गार्ड के साथ एक ‘पैसेज एक्सरसाइज’ (PASSEX) में हिस्सा लेगा। यह संयुक्त अभ्यास दोनों नौसेनाओं को आपसी तालमेल बेहतर बनाने और वास्तविक परिस्थितियों में मिलकर बेहतर ढंग से काम करने में मदद करेगा।

आईओएस सागर मिशन का उद्देश्य

‘आईओएस सागर’ पहल के तहत 16 मित्र देशों के साथ मिलकर हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, सहयोग और अंतरसंचालनीयता को बढ़ाया जा रहा है। यह भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति और सागर दृष्टिकोण के अनुरूप है।

महाराष्ट्र में नई हेल्थ पहल: ‘मेरा गांव, स्वस्थ गांव’ योजना शुरू

विश्व स्वास्थ्य दिवस के विशेष अवसर पर 07 अप्रैल 2026 को महाराष्ट्र सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्यव्यापी महत्वाकांक्षी अभियान “मेरा गांव, स्वस्थ गांव” (माझं गाव, आरोग्यसंपन्न गांव) का औपचारिक शुभारंभ किया। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजीत पवार और सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री प्रकाश आबिटकर सहित मंत्रिमंडल के अन्य वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे। इस अवसर पर अभियान की मार्गदर्शिका पुस्तिका एवं सूचनात्मक वीडियो का भी विमोचन किया गया।

राज्य सरकार का लक्ष्य

राज्य सरकार का लक्ष्य इस अभियान के माध्यम से ग्रामीण महाराष्ट्र की स्वास्थ्य प्रणाली को अधिक सक्षम, रोगमुक्त और आत्मनिर्भर बनाना है। सरकार की योजना इसे मात्र एक सरकारी कार्यक्रम तक सीमित न रखकर एक व्यापक जन आंदोलन के रूप में विकसित करने की है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि गांव स्तर से लेकर राज्य स्तर तक स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण से ग्रामीण जनता को उनके घर के दरवाजे पर ही उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं प्राप्त हो सकेंगी।

इस अभियान की मुख्य विशेषता

इस अभियान की मुख्य विशेषता उपचार के बजाय “बचाव” पर अधिक ध्यान केंद्रित करना है। इसके तहत स्वच्छता, शुद्ध पेयजल की आपूर्ति, अपशिष्ट जल प्रबंधन और बेहतर पोषण जैसे बुनियादी कारकों पर काम किया जाएगा। साथ ही, संक्रामक एवं गैर-संक्रामक रोगों के नियंत्रण के साथ-साथ मातृ-बाल स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य और बदलती जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के प्रति नागरिकों को जागरूक किया जाएगा।

ग्राम पंचायत स्तर तक समितियों का गठन

अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक समितियों का गठन किया गया है। बेहतर प्रदर्शन करने वाले गांवों को “स्वस्थ गांव” के रूप में सम्मानित किया जाएगा। इसके लिए सरकार ने 65।25 करोड़ रुपए के पुरस्कारों का प्रावधान किया है, जो जिला परिषदों, पंचायत समितियों और ग्राम पंचायतों को दिए जाएंगे।

मार्च 2026 में भारत के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में गुरुग्राम शीर्ष पर

भारत में वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या बनी हुई है, और एक नई रिपोर्ट ने नई चिंताएँ पैदा कर दी हैं। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के अनुसार, मार्च महीने में गुरुग्राम देश का सबसे प्रदूषित शहर था, जिससे पता चलता है कि कई क्षेत्रों में हवा की गुणवत्ता का स्तर कितना खतरनाक बना हुआ है।

मार्च में गुरुग्राम बना सबसे ज़्यादा प्रदूषित शहर

रिपोर्ट में बताया गया है कि मार्च में गुरुग्राम में प्रदूषण का स्तर सबसे ज़्यादा दर्ज किया गया, जहाँ औसत PM2.5 का स्तर 116 µg/m³ रहा। यह स्तर सुरक्षित सीमा से काफी अधिक है और लोगों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचा सकता है, विशेष रूप से बच्चों और बुज़ुर्गों को।

प्रदूषित शहरों की संख्या में हरियाणा सबसे आगे

भारत के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में से चार शहर हरियाणा के हैं। इनमें बहादुरगढ़, फरीदाबाद, गुरुग्राम और मानेसर शामिल हैं। इससे पता चलता है कि राज्य में वायु प्रदूषण एक बड़ी समस्या है।

टॉप 10 की सूची में शामिल अन्य शहर सिंगरौली, मंडीदीप, गाजियाबाद, भिवाड़ी, नोएडा और नंदेसरी थे, जो मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात जैसे अलग-अलग राज्यों से हैं।

गाज़ियाबाद पूरे साल रहा सबसे ज़्यादा प्रदूषित

जहां मार्च महीने में गुरुग्राम इस सूची में सबसे ऊपर रहा, वहीं पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए गाज़ियाबाद सबसे ज़्यादा प्रदूषित शहर पाया गया। यह दर्शाता है कि प्रदूषण केवल मौसमी समस्या नहीं है, बल्कि कई शहरों में यह एक दीर्घकालिक समस्या है।

कई शहर वायु गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं

रिपोर्ट से यह भी पता चला है कि कई शहर राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (NAAQS) को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे शहरों की संख्या हरियाणा में सबसे ज़्यादा थी, जहाँ 24 में से 9 शहरों में प्रदूषण का सुरक्षित स्तर पार हो गया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश का नंबर आया, जहाँ 21 में से 8 शहर इन मानकों को पूरा करने में असफल रहे।

स्वच्छ वायु कार्यक्रम की सीमित सफलता

भारत का ‘राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम’ (NCAP), जिसे प्रदूषण के स्तर को कम करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, उसके परिणाम मिले-जुले रहे हैं। सात साल बीत जाने के बाद भी, केवल कुछ ही शहर अपने निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार प्रदूषण के स्तर को सफलतापूर्वक कम कर पाए हैं।

कुछ शहरों, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के शहरों में, काफी अच्छा सुधार देखने को मिला है; यहाँ नौ शहरों ने PM10 के स्तर में 40% से अधिक की कमी दर्ज की है। महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, पंजाब और राजस्थान जैसे अन्य राज्यों के भी कुछ शहरों में सुधार की खबरें मिली हैं।

कुछ इलाकों में प्रदूषण बढ़ रहा है

दूसरी ओर, कुछ राज्यों में प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी देखी गई है। ओडिशा में PM10 का स्तर बढ़ने वाले शहरों की संख्या सबसे ज़्यादा थी, जिसके बाद मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश का नंबर आता है। असम, बिहार, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तमिलनाडु के भी कुछ शहरों में प्रदूषण बढ़ता हुआ दिखा।

सबसे अच्छे और सबसे बुरे बदलाव दिखाने वाले शहर

देहरादून में सबसे बड़ा सुधार दर्ज किया गया, जहाँ 2017-18 की तुलना में PM10 का स्तर 75% तक कम हो गया। इसके विपरीत, विशाखापत्तनम में प्रदूषण में सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी देखी गई, जिसमें 73% की वृद्धि हुई। दिल्ली अपने PM10 के स्तर को 17% तक कम करने में कामयाब रहा, जिससे कुछ प्रगति दिखाई दी।

विशेषज्ञों ने और कड़े कदम उठाने की मांग की

विशेषज्ञों का मानना ​​है कि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए और अधिक गंभीर तथा विज्ञान-आधारित कदमों की आवश्यकता है। वे सुझाव देते हैं कि हर क्षेत्र में प्रदूषण के मुख्य स्रोतों पर ध्यान केंद्रित किया जाए और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

वे यह भी सलाह देते हैं कि NCAP का विस्तार करके उसमें और अधिक प्रदूषित शहरों को शामिल किया जाए, एक क्षेत्रीय दृष्टिकोण अपनाया जाए, और उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए और भी सख्त नियमों को लागू किया जाए।

 

PM मुद्रा योजना ने लघु और सूक्ष्म उद्यमियों को शसक्त बनाने के 11 वर्ष पूरे किये

भारत, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) के 11 सफल वर्ष मना रहा है। यह एक प्रमुख सरकारी योजना है जिसने लाखों छोटे उद्यमियों को अपना व्यवसाय शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने में मदद की है। 8 अप्रैल, 2015 को नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई यह योजना, उन लोगों को आसानी से और बिना किसी गारंटी के ऋण उपलब्ध कराने पर केंद्रित है, जो पहले औपचारिक बैंकिंग सेवाओं का लाभ नहीं उठा पाते थे।

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना क्या है?

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना एक सरकारी पहल है, जिसके तहत छोटे और सूक्ष्म व्यवसायों को 20 लाख रुपये तक का लोन दिया जाता है। यह मुख्य रूप से गैर-कॉर्पोरेट और गैर-कृषि क्षेत्रों, जैसे कि छोटी दुकानों, सेवा प्रदाताओं और ग्रामीण व्यवसायों को सहायता प्रदान करती है।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य “फंड द अनफंडेड” (Fund the Unfunded) है, जिसका अर्थ है उन लोगों की मदद करना जिन्हें पहले बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा नज़रअंदाज़ किया जाता था।

भारत में MSMEs का महत्व

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) भारत की अर्थव्यवस्था में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे:

  • लाखों लोगों के लिए रोज़गार के अवसर पैदा करते हैं
  • बड़े उद्योगों को सहयोग देते हैं
  • शहरों और गाँवों के संतुलित विकास में मदद करते हैं
  • स्थानीय और वैश्विक, दोनों तरह के बाज़ार की माँगों को पूरा करते हैं

उनके महत्व के कारण, PMMY जैसी योजनाएँ उनके विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

PMMY की मुख्य विशेषताएं

यह योजना व्यवसाय के चरण के आधार पर चार श्रेणियों में ऋण प्रदान करती है:

  • शिशु: ₹50,000 तक का ऋण
  • किशोर: ₹50,000 से ₹5 लाख तक का ऋण
  • तरुण: ₹5 लाख से ₹10 लाख तक का ऋण
  • तरुण प्लस: ₹10 लाख से ₹20 लाख तक का ऋण

ये लोन हैं:

  • बिना किसी कोलैटरल (गिरवी) के दिए जाते हैं
  • मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेडिंग और सर्विस सेक्टर के लिए उपलब्ध हैं
  • डेयरी, पोल्ट्री और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियों को भी कवर करते हैं
  • RBI के दिशानिर्देशों के अनुसार, रीपेमेंट के लचीले विकल्पों के साथ दिए जाते हैं

11 सालों में मुख्य उपलब्धियाँ

पिछले एक दशक में, PMMY ने बहुत बड़ा असर डाला है:

  • 57.79 करोड़ लोन दिए गए हैं
  • लोन की कुल रकम 40.07 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गई है
  • लगभग दो-तिहाई लोन महिला उद्यमियों को दिए गए
  • लगभग पाँच में से एक लोन पहली बार उद्यमी बनने वालों को दिया गया

इससे पता चलता है कि इस योजना ने आम लोगों को कारोबारी बनने में कैसे मदद की है।

महिलाओं और कमज़ोर वर्गों के लिए सहायता

इस योजना से विशेष रूप से इन्हें मदद मिली है:

  • महिला उद्यमी (लगभग 67% लाभार्थी)
  • SC/ST और OBC समुदाय (लगभग 51% लाभार्थी)
  • छोटे और पहली बार व्यवसाय शुरू करने वाले लोग

इससे वित्तीय समावेशन बढ़ा है और स्थानीय साहूकारों पर निर्भरता कम हुई है।

योजना पर सरकार का नज़रिया

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि PMMY ने लाखों लोगों को अपना खुद का कारोबार शुरू करने का आत्मविश्वास देकर देश में एक “खामोश बदलाव” लाया है।

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने भी इस बात पर ज़ोर दिया कि इस योजना ने स्वरोज़गार के अवसर पैदा किए हैं और अनौपचारिक कर्ज़दाताओं द्वारा होने वाले शोषण को कम किया है।

वित्तीय समावेशन के तीन मुख्य स्तंभ

PMMY की सफलता तीन महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर आधारित है:

  • बैंकिंग से वंचितों को बैंकिंग से जोड़ना: लोगों को बैंकिंग प्रणाली में शामिल करना
  • असुरक्षितों को सुरक्षा प्रदान करना: वित्तीय सुरक्षा उपलब्ध कराना
  • वित्त से वंचितों को वित्त उपलब्ध कराना: उन लोगों को ऋण देना जिनकी पहुँच वित्त तक नहीं है

ये स्तंभ यह सुनिश्चित करते हैं कि समाज के सबसे गरीब वर्ग भी आर्थिक रूप से आगे बढ़ सकें।

योजना की वर्ष-वार वृद्धि

पिछले कुछ वर्षों में, इस योजना में लगातार वृद्धि हुई है। 2015-16 में 1.37 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर, ऋण राशि 2025-26 (मार्च 2026 तक) में 5.65 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। यह इस योजना के प्रति बढ़ते विश्वास और मांग को दर्शाता है।

पायल नाग का कमाल: दिव्यांगता को हराकर जीता तीरंदाजी खिताब

खेल जगत की हाल की एक प्रेरणादायक खबर में, ओडिशा की 18 वर्षीय पायल नाग ने एक अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। उनकी इस उपलब्धि ने दुनिया भर के लोगों को हैरान और प्रेरित किया है, क्योंकि वह पैरा तीरंदाजी में इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करने वाली पहली ‘क्वाड्रपल एम्प्यूटी’ (चारों अंग गंवा चुकी) खिलाड़ी बन गई हैं।

जीवन बदलने वाली एक घटना

पायल नाग का जन्म ओडिशा के बालांगीर ज़िले के एक छोटे से गाँव में हुआ था। उनका परिवार बहुत गरीब था और उनके पिता दिहाड़ी मज़दूर के तौर पर काम करते थे। जब वह सिर्फ़ आठ साल की थीं, तब बिजली के एक गंभीर झटके की दुर्घटना के कारण उनकी ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल गई। दुख की बात है कि इस घटना में उन्होंने अपने दोनों हाथ और पैर खो दिए। इस दुखद घटना के बाद, उन्हें एक अनाथालय में रहना पड़ा, जहाँ उन्होंने धीरे-धीरे अपनी ज़िंदगी को फिर से संवारना शुरू किया।

साहस और नई शुरुआतें

इतने बड़े नुकसान के बाद भी, पायल ने हार नहीं मानी। उसने अपनी रोज़मर्रा की कई गतिविधियाँ अपने ही तरीके से करना सीख लिया। एक दिन, अपने मुँह से पेंटिंग करते हुए उसका एक वीडियो इंटरनेट पर काफ़ी मशहूर हो गया। इससे उसकी मज़बूत इच्छाशक्ति और प्रतिभा सामने आई, और कई लोगों ने उसके साहस पर गौर करना शुरू कर दिया।

तीरंदाज़ी की दुनिया में कदम

पायल की ज़िंदगी में एक सकारात्मक मोड़ तब आया, जब कोच कुलदीप कुमार वेदवान ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। वह उन्हें कटरा स्थित ‘माता वैष्णो देवी श्राइन तीरंदाज़ी अकादमी’ ले गए। वहाँ उन्होंने तीरंदाज़ी सीखना शुरू किया। कोच ने उन्हें प्रशिक्षित करने के लिए विशेष तरीकों का इस्तेमाल किया, क्योंकि उनकी स्थिति अन्य खिलाड़ियों से अलग थी। समय के साथ, पायल और अधिक आत्मविश्वासी और कुशल बन गईं।

खेलने का एक अनोखा तरीका

चूँकि पायल के हाथ नहीं हैं, इसलिए वह तीर चलाने के लिए एक खास तकनीक का इस्तेमाल करती है। धनुष को पकड़ने के लिए वह एक प्रोस्थेटिक सपोर्ट का उपयोग करती है। फिर, एक ट्रिगर सिस्टम की मदद से वह अपने कंधे और मुँह का इस्तेमाल करके धनुष की डोरी खींचती है। यह तरीका बहुत ही दुर्लभ है और उसकी रचनात्मकता तथा दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। इसी वजह से, वह तीरंदाजी में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने वाली अपनी तरह की पहली एथलीट बन गईं।

ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीत

पायल ने 4 अप्रैल, 2026 को बैंकॉक में आयोजित वर्ल्ड पैरा आर्चरी सीरीज़ फ़ाइनल में एक बड़ी जीत हासिल की। ​​यह उनकी पहली सीनियर अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता थी। फ़ाइनल मुक़ाबले में, उन्होंने अपनी आदर्श शीतल देवी को 139-136 के स्कोर से हराकर स्वर्ण पदक जीता। इसके साथ ही, वह तीरंदाज़ी में अंतर्राष्ट्रीय स्वर्ण पदक जीतने वाली दुनिया की पहली ‘क्वाड्रपल एम्प्यूटी’ (चारों अंग गंवाने वाली) खिलाड़ी बन गईं।

परीक्षाओं के लिए मुख्य तथ्य

  • पायल नाग पहली ऐसी तीरंदाज हैं जिनके चारों अंग कटे हुए हैं और जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीता है।
  • उन्होंने यह पदक बैंकॉक में आयोजित 2026 विश्व पैरा तीरंदाजी सीरीज़ फ़ाइनल में जीता।
  • वैश्विक स्तर पर पैरा तीरंदाजी का प्रबंधन ‘विश्व तीरंदाजी महासंघ’ (World Archery Federation) द्वारा किया जाता है।
  • भारत में, ‘खेलो इंडिया पैरा गेम्स’ जैसे आयोजन युवाओं के बीच पैरा खेलों को बढ़ावा देने में सहायक होते हैं।

रूस और चीन ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के UN प्रस्ताव को वीटो किया

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस और चीन ने उस प्रस्ताव को वीटो कर दिया, जिसका मकसद हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना था। यह प्रस्ताव ऐसे समय में पारित नहीं हो सका, जब ईरान से समझौते के लिए अमेरिका की समय सीमा नजदीक आ रही है। यह जानकारी एसोसिएटेड प्रेस (एपी) की रिपोर्ट में दी गई।

प्रस्ताव के पक्ष में वोट

सुरक्षा परिषद के 15 में से 11 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया। पाकिस्तान और कोलंबिया ने मतदान से दूरी बनाई। जरूरी 09 वोट मिल गए थे। फिर भी प्रस्ताव पारित नहीं हो पाया। रूस और चीन स्थायी सदस्य हैं। उनके पास वीटो शक्ति है। इसी का इस्तेमाल कर प्रस्ताव को रोक दिया गया। शुरुआत में प्रस्ताव में अनुच्छेद 7 शामिल था। इससे सदस्य देशों को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए बल प्रयोग की अनुमति मिल सकती थी। रूस और चीन इसका विरोध कर रहे थे। इसी वजह से लंबे समय तक बातचीत चली। अंत में जो प्रस्ताव लाया गया, उसमें केवल देशों से रक्षात्मक तरीके से सहयोग करने की बात कही गई।

बहरीन ने UNSC में क्या कहा?

बहरीन को उम्मीद थी कि रूस और चीन कम से कम मतदान से दूरी बनाएंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सुरक्षा परिषद इस मुद्दे पर बंटी हुई नजर आई। रूस और चीन ने वीटो कर साफ कर दिया कि वे ईरान के साथ खड़े हैं। दोनों देशों का कहना है कि प्रस्ताव में ईरान की बहुत कड़ी आलोचना की गई थी।

बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल्लतीफ बिन राशिद अल जयानी ने यूएनएससी में कहा कि ईरान को होर्मुजल जलडमरूमध्य बंद करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा, यह प्रस्ताव खाड़ी क्षेत्र के इस अहम जलमार्ग के गंभीर हालात को देखते हुए लाया गया है। दुनिया के तेल और गैस का करीब एक-पांचवां हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है।

क्या होता UNSC में प्रस्ताव पारित होता तो?

बता दें कि, यह संदेहजनक है कि यदि यह प्रस्ताव पारित भी हो जाता, तो भी पांचवें सप्ताह में पहुंच चुके इस युद्ध पर इसका कोई प्रभाव पड़ता, क्योंकि रूस और चीन को ‘वीटो’ करने से रोकने के लिए उन्हें मतदान से दूर रखने के उद्देश्य से इस प्रस्ताव को काफी कमजोर कर दिया गया था।

बहरीन के प्रस्ताव में क्या-क्या शामिल था?

इसमें व्यापारिक और वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षा मुहैया करना और जलडमरूमध्य के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय नौवहन को बंद करने, बाधित करने या उसमें हस्तक्षेप करने के प्रयासों को रोकना शामिल किया गया था। प्रस्ताव में यह भी मांग की गई थी कि ईरान व्यापारिक और वाणिज्यिक जहाजों पर हमले तुरंत बंद करे और होर्मुज जलडमरूमध्य से उनके आवागमन की स्वतंत्रता में बाधा डालना और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमला करना बंद करे।

RBI MPC बैठक 2026: आरबीआई ने रेपो रेट 5.25% पर रखा बरकरार

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अप्रैल 2026 की मौद्रिक नीति के फैसले की घोषणा कर दी। इसमें रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर बरकरार रखने का फैसला लिया गया। फिलहाल रेपो रेट 5.25 फीसदी रहेगी। केंद्रीय बैंक ने इस फैसले के पीछे बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों को प्रमुख कारण बताया। यह निर्णय केंद्रीय बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा द्वारा घोषित किया गया। उन्होंने बताया कि मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से लिक्विडिटी एडजस्टमेंट फैसिलिटी (LAF) के तहत रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखने का फैसला किया।

RBI गवर्नर ने क्‍या बताया?

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि मौद्रिक नीति समिति ने तटस्थ रुख को बनाये रखने का निर्णय किया है। उन्‍होंने कहा कि घरेलू महंगाई के मोर्चे पर राहत भरे आंकड़े हैं। महंगाई नियंत्रण में है और ग्रोथ आउटलुक भी सकारात्‍मक है। हालांकि खाद्य पदार्थों के दाम थोड़े बढ़े हैं। उन्‍होंने कहा कि सभी ग्‍लोबल अनिश्चितताओं के बीच भारतीय इकोनॉमी जुझारू बनी हुई है।

GDP ग्रोथ अनुमान में संशोधन

आरबीआई ने भविष्य के विकास अनुमानों को लेकर सावधानी बरतते हुए वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए GDP ग्रोथ के अनुमान को संशोधित किया है। पहले जहां विकास दर 7.6% रहने का अनुमान लगाया गया था, उसे अब घटाकर 7.3% कर दिया गया है। ये संशोधन वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित असर को ध्यान में रखकर किया गया है।

मुख्य नीतिगत निर्णय

  • रेपो रेट: 5.25% पर अपरिवर्तित
  • स्टैंडिंग डिपॉज़िट फ़ैसिलिटी (SDF): 5.00%
  • मार्जिनल स्टैंडिंग फ़ैसिलिटी (MSF) और बैंक रेट: 5.50%
  • नीतिगत रुख: तटस्थ

MPC ने सर्वसम्मति से मौजूदा दरों को बनाए रखने के पक्ष में मतदान किया, और बदलते वैश्विक तथा घरेलू हालात को देखते हुए “इंतज़ार करो और देखो” (wait and watch) के दृष्टिकोण पर ज़ोर दिया।

भारत के लिए विकास का दृष्टिकोण

भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार मज़बूत लचीलापन दिखा रही है:

  • GDP वृद्धि (2025-26): अनुमानित 7.6%
  • GDP अनुमान (2026-27): 6.9%

विकास के मुख्य चालक हैं:

  • मज़बूत निजी उपभोग
  • निवेश की बढ़ती मांग
  • मज़बूत सेवा और विनिर्माण क्षेत्र

हालाँकि, वैश्विक संघर्ष और आपूर्ति में रुकावट जैसे जोखिम विकास की गति को प्रभावित कर सकते हैं।

महंगाई का अनुमान

CPI महंगाई (फरवरी 2026): 3.2%

अनुमानित महंगाई (2026-27): 4.6%

महंगाई को प्रभावित करने वाले कारक:

  • वैश्विक ऊर्जा कीमतों में वृद्धि
  • आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान
  • मौसम संबंधी जोखिम (जैसे अल नीनो)

मुख्य महंगाई दर मध्यम बनी हुई है, जो कीमतों पर नियंत्रण को दर्शाता है।

वैश्विक और घरेलू चुनौतियाँ

MPC ने कई बाहरी जोखिमों पर प्रकाश डाला:

  • पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव
  • वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान
  • वस्तुओं और ऊर्जा की कीमतों में अस्थिरता

घरेलू स्तर पर, भारत इन कारणों से स्थिर बना हुआ है:

मज़बूत वित्तीय संस्थाएँ

  • विनिर्माण और बुनियादी ढाँचे पर सरकार का ज़ोर
  • माँग की अनुकूल स्थितियाँ
  • निर्णय के पीछे का तर्क

MPC ने इन कारणों से दरों को अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया:

  • संतुलित मुद्रास्फीति स्तर, लेकिन बढ़ते जोखिम
  • मज़बूत, लेकिन संवेदनशील विकास परिदृश्य
  • वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में अनिश्चितता

समिति ने भविष्य के आंकड़ों और घटनाक्रमों के आधार पर कार्रवाई करने के लिए लचीलेपन और तत्परता पर ज़ोर दिया।

आने वाला MPC शेड्यूल

  • मिनट्स जारी होने की तारीख: 22 अप्रैल, 2026
  • अगली MPC बैठक: 3–5 जून, 2026

परीक्षाओं के लिए ज़रूरी तथ्य

  • रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI कमर्शियल बैंकों को पैसा उधार देता है
  • MPC भारत की मॉनेटरी पॉलिसी तय करने के लिए ज़िम्मेदार है
  • RBI का महंगाई का लक्ष्य 4% (±2%) है।
  • RBI का मुख्यालय: मुंबई

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