भारत और भारतीय उपमहाद्वीप में बढ़ती गर्मी और लंबे होते ग्रीष्मकाल के बीच एक महत्वपूर्ण लेकिन अक्सर अनदेखा खतरा तेजी से बढ़ रहा है—अल्ट्रावायलेट (UV) विकिरण। जहां लोग तापमान और वायु गुणवत्ता पर ध्यान देते हैं, वहीं UV इंडेक्स (UVI) को नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि यह त्वचा को होने वाले नुकसान का सीधा संकेतक है। बादल या ठंडे मौसम में भी UV विकिरण खतरनाक स्तर पर बना रह सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, UV इंडेक्स को नजरअंदाज करने से दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
UV इंडेक्स क्या है और कैसे मापा जाता है?
UV इंडेक्स एक मानकीकृत माप है, जो पृथ्वी की सतह तक पहुंचने वाले अल्ट्रावायलेट विकिरण की तीव्रता और उससे होने वाले त्वचा नुकसान के जोखिम को दर्शाता है। यह विशेष रूप से “एरिथेमली इफेक्टिव UV रेडिएशन” पर आधारित होता है, जिसमें UVA और UVB किरणें शामिल होती हैं।
इसे मापने के लिए:
- ग्राउंड-बेस्ड उपकरण (जैसे स्पेक्ट्रोरैडियोमीटर) वास्तविक समय में UV स्तर मापते हैं
- सैटेलाइट डेटा और वायुमंडलीय मॉडल ओजोन, बादल और सूर्य की स्थिति के आधार पर अनुमान लगाते हैं
भारत में UV इंडेक्स और उसका स्तर
भारत में UV स्तर का आकलन भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा किया जाता है। इसका पैमाना इस प्रकार है:
- 0–2: कम जोखिम
- 3–5: मध्यम जोखिम
- 6–7: उच्च जोखिम
- 8–10: बहुत अधिक जोखिम
- 11+: अत्यधिक जोखिम
ध्यान देने वाली बात यह है कि UV इंडेक्स तापमान नहीं, बल्कि विकिरण की तीव्रता को दर्शाता है।
UV स्तर को प्रभावित करने वाले कारक
- अक्षांश: भूमध्य रेखा के पास (जैसे भारत) UV अधिक होता है
- समय: दोपहर में UV सबसे अधिक होता है
- ऊंचाई: अधिक ऊंचाई पर UV अधिक
- ओजोन परत: कम ओजोन = अधिक UVB
- बादल: UV कम करते हैं, लेकिन पूरी तरह नहीं रोकते
- परावर्तन: पानी, रेत, कंक्रीट UV को बढ़ाते हैं
भारत में UV कब सबसे ज्यादा होता है?
भारत में UV विकिरण आमतौर पर सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे के बीच सबसे अधिक होता है, खासकर मार्च से जून के दौरान। हालांकि, सालभर मध्यम से उच्च स्तर बना रहता है। यहां तक कि UVA किरणें कांच के पार भी अंदर आ सकती हैं, जिससे घर के अंदर भी जोखिम बना रहता है।
स्वास्थ्य पर प्रभाव
UV विकिरण केवल सनबर्न ही नहीं बल्कि कई गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है:
- DNA को नुकसान और त्वचा कैंसर का खतरा
- समय से पहले बुढ़ापा और झुर्रियां
- पिगमेंटेशन (जैसे मेलाज़्मा)
- इम्यून सिस्टम कमजोर होना
- आंखों की समस्याएं (जैसे मोतियाबिंद)
बचाव के उपाय
- SPF 30+ सनस्क्रीन का नियमित उपयोग करें
- हर 2–3 घंटे में दोबारा लगाएं
- टोपी, चश्मा और ढके हुए कपड़े पहनें
- दोपहर के समय सीधी धूप से बचें
UVA और UVB किरणों का अंतर
- UVA किरणें: त्वचा की गहराई तक जाती हैं, एजिंग का कारण बनती हैं, कांच से भी गुजरती हैं
- UVB किरणें: सनबर्न और त्वचा कैंसर के लिए जिम्मेदार


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