वर्ल्ड 10K बेंगलुरु 2026: ब्लांका व्लासिक बनीं ग्लोबल एम्बेसडर, इवेंट को मिलेगा इंटरनेशनल आकर्षण

बेंगलुरु में आयोजित होने वाली प्रतिष्ठित रोड रेस TCS World 10K Bengaluru 2026 इस बार एक खास वजह से चर्चा में है। अंतरराष्ट्रीय स्तर की मशहूर एथलीट Blanka Vlašić को इस इवेंट का ग्लोबल एम्बेसडर नियुक्त किया गया है। यह आयोजन 26 अप्रैल 2026 को आयोजित होगा और इसमें देश-विदेश के हजारों धावकों के शामिल होने की उम्मीद है।

कौन हैं ब्लांका व्लासिक?

Blanka Vlašić क्रोएशिया की पूर्व हाई जंप एथलीट हैं और अपने समय की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में गिनी जाती हैं।

  1. 2008 बीजिंग ओलंपिक में सिल्वर मेडल
  2. 2016 रियो ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल
  3. वर्ल्ड चैंपियनशिप में कई पदक
  4. 2.08 मीटर का पर्सनल बेस्ट (2009), जो क्रोएशिया का नेशनल रिकॉर्ड भी है

उनकी यह उपलब्धि महिला हाई जंप के इतिहास की सर्वश्रेष्ठ परफॉर्मेंस में से एक मानी जाती है।

प्रतिभागियों के लिए क्या कहा?

ब्लांका व्लासिक ने इस आयोजन से जुड़ने पर खुशी जताई और कहा कि इतने बड़े इवेंट का हिस्सा बनना उनके लिए सम्मान की बात है।

उन्होंने प्रतिभागियों को संदेश दिया कि:

  • बेहतर तैयारी करें
  • अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दें
  • इस इवेंट का आनंद लें

उन्होंने यह भी कहा कि रनिंग केवल फिटनेस नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती का भी प्रतीक है।

खेल से आगे भी सक्रिय भूमिका

अपने खेल करियर के बाद भी व्लासिक खेल जगत से जुड़ी हुई हैं।

  • “Champions for Peace” पहल से जुड़ी हैं
  • Croatian Olympic Committee की वाइस प्रेसिडेंट हैं
  • युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करने और खेल को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं

आयोजकों की प्रतिक्रिया

  • इवेंट आयोजक Procam International के प्रतिनिधि ने कहा कि ब्लांका व्लासिक का जुड़ना इस आयोजन के लिए बड़ी उपलब्धि है।
  • उनके अनुभव और उपलब्धियां न केवल धावकों को प्रेरित करेंगी, बल्कि इवेंट को वैश्विक स्तर पर और अधिक पहचान दिलाएंगी।

TCS World 10K Bengaluru के बारे में

TCS World 10K Bengaluru दुनिया की प्रमुख 10 किलोमीटर रेस में से एक है।

  • इसमें प्रोफेशनल एथलीट और आम लोग दोनों हिस्सा लेते हैं
  • यह इवेंट फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल को बढ़ावा देता है
  • साथ ही, यह सामुदायिक भागीदारी और खेल भावना का भी प्रतीक है

IIM रोहतक ने जीता BIMTECH का ‘Hermes Dialogue 6.0’, 12 देशों के प्रतिभागियों के बीच मारी बाजी

मैनेजमेंट छात्रों के लिए आयोजित एक बड़े राष्ट्रीय स्तर के डिबेट इवेंट में IIM रोहतक ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया है। Hermes Dialogue 6.0 नाम के इस प्रतिष्ठित आयोजन में 12 देशों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिससे यह प्रतियोगिता और भी हाई-प्रोफाइल बन गई।

क्या है पूरा आयोजन?

यह कार्यक्रम Birla Institute of Management Technology (BIMTECH), ग्रेटर नोएडा द्वारा आयोजित किया गया था।

  • “Hermes Dialogue” BIMTECH का एक फ्लैगशिप इवेंट है, जिसे हर साल PGDM-International Business के छात्र आयोजित करते हैं।
  • इसका उद्देश्य छात्रों को ग्लोबल इश्यूज पर चर्चा और विचार-विमर्श का मंच देना है।

इस साल का बड़ा मुद्दा (Theme)

इस बार प्रतियोगिता का विषय था: “Should Countries Focus on Energy Independence to Ensure Global Energy Security in Times of Geopolitical Uncertainty?” यानि “क्या देशों को ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर ध्यान देना चाहिए?”

यह विषय आज के समय में बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि:

  1. ऊर्जा का सीधा संबंध आर्थिक विकास से है
  2. वैश्विक राजनीति में ऊर्जा एक बड़ा फैक्टर बन चुकी है
  3. देशों के बीच तनाव के समय ऊर्जा सप्लाई पर असर पड़ता है

12 देशों की भागीदारी, 250+ रजिस्ट्रेशन

इस प्रतियोगिता में देश-विदेश से जबरदस्त भागीदारी देखने को मिली:

250 से अधिक छात्रों ने रजिस्ट्रेशन किया

12 देशों का प्रतिनिधित्व रहा, जिनमें शामिल हैं:

  1. India
  2. United States
  3. China
  4. Russia
  5. Japan
  6. Germany
  7. Brazil
  8. Australia
  9. South Africa
  10. Saudi Arabia
  11. Indonesia
  12. United Arab Emirates

इससे प्रतियोगिता का स्तर इंटरनेशनल हो गया।

तीन चरणों में हुई कड़ी टक्कर

इस डिबेट प्रतियोगिता को तीन राउंड में आयोजित किया गया:

1. ऑनलाइन टेस्ट (Unstop प्लेटफॉर्म)

ज्ञान और क्विक थिंकिंग का परीक्षण

2. केस स्टडी राउंड

टीमों ने अपने समाधान और रणनीतियाँ प्रस्तुत कीं

3. फाइनल डिबेट राउंड

प्रतिभागियों ने अलग-अलग देशों का प्रतिनिधित्व किया

यह राउंड United Nations और G20 जैसी वैश्विक बैठकों जैसा रहा

विजेताओं की सूची

  1. पहला स्थान: IIM रोहतक (Team LeBroom)
  2. दूसरा स्थान: FORE School of Management (Team Magnus)
  3. तीसरा स्थान: Shri Ram College of Commerce (Team Strategy)

कुल पुरस्कार राशि: ₹60,000

फाइनलिस्ट और जज पैनल

इस इवेंट के फाइनल राउंड में देश के कई टॉप संस्थानों के छात्र पहुंचे, जैसे:

  • IIM Udaipur
  • IIT Patna
  • IMI
  • Great Lakes Institute of Management
  • NIA Pune

जज पैनल में शामिल रहे:

  1. Rajeev Kher
  2. Sumanta Chaudhari

इन विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को ट्रेड, पॉलिसी और डिप्लोमेसी की समझ के आधार पर परखा।

बड़ी उपलब्धि: भारतीय मूल के वैज्ञानिक दीप जरीवाला को मिला अमेरिका में प्रतिष्ठित ‘Governor’s Chair’ पद

वैज्ञानिक जगत से एक बड़ी खबर सामने आई है। भारतीय मूल के प्रसिद्ध वैज्ञानिक दीप जरीवाला को अमेरिका में एक बेहद प्रतिष्ठित रिसर्च पद के लिए चुना गया है। यह नियुक्ति न सिर्फ उनकी उपलब्धियों को दर्शाती है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारतीय प्रतिभा की बढ़ती पहचान को भी मजबूत करती है।

क्या है पूरा मामला?

Deep Jariwala को UT-ORNL Governor’s Chair for Quantum Devices के लिए चुना गया है।

यह पद अमेरिका के दो बड़े संस्थानों—

  • University of Tennessee
    Oak Ridge National Laboratory

के संयुक्त सहयोग से संचालित होता है।

जरीवाला इस पद को जनवरी 2027 से संभालेंगे।

क्यों खास है यह पद?

‘Governor’s Chair’ प्रोग्राम अमेरिका के सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पदों में से एक माना जाता है।

इसकी खासियतें:

  • यूनिवर्सिटी और रिसर्च लैब के बीच सीधा तालमेल
  • टॉप वैज्ञानिकों को इनोवेशन के लिए प्लेटफॉर्म
  • अत्याधुनिक रिसर्च सुविधाओं तक पहुंच

यही कारण है कि इसे दुनिया के बेहतरीन वैज्ञानिकों के लिए एक ड्रीम रोल माना जाता है।

क्वांटम साइंस में जरीवाला का योगदान

  • वर्तमान में Deep Jariwala
  • University of Pennsylvania में प्रोफेसर हैं।

उनका शोध मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में रहा है:-

  1. Quantum Materials
  2. Microelectronics
  3. Future Computing Technologies

उनकी उपलब्धियाँ:

  • 180+ रिसर्च पेपर्स
  • कई पेटेंट
  • उच्च स्तर के वैश्विक सिटेशन

उनके काम का उपयोग इन तकनीकों में हो रहा है:

  • Quantum Computing
  • Advanced Sensors
  • Optoelectronic Devices

नई भूमिका में क्या होगा काम?

नई जिम्मेदारी में जरीवाला दोहरी भूमिका निभाएंगे:

University of Tennessee

  • छात्रों को पढ़ाना और गाइड करना

Oak Ridge National Laboratory

  • एडवांस रिसर्च को लीड करना

साथ ही, वे एक नया रिसर्च सेंटर स्थापित करने की योजना बना रहे हैं, जो वैज्ञानिक खोजों को तेजी से रियल-वर्ल्ड टेक्नोलॉजी में बदलने में मदद करेगा।

अमेरिका के लिए क्यों अहम है यह नियुक्ति?

यह नियुक्ति अमेरिका की Quantum Technology Strategy का हिस्सा मानी जा रही है।

इसके जरिए अमेरिका का लक्ष्य है:

  • वैज्ञानिक प्रतिभा को मजबूत करना
  • रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देना
  • वैश्विक टेक्नोलॉजी रेस में आगे रहना

महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Point View)

  1. Oak Ridge Lab: अमेरिका की सबसे बड़ी रिसर्च लैब्स में से एक
  2. Quantum Devices: क्वांटम फिजिक्स पर आधारित एडवांस टेक्नोलॉजी
  3. Governor’s Chair: यूनिवर्सिटी + रिसर्च लैब का संयुक्त पद
  4. Quantum Materials: भविष्य की कंप्यूटिंग की नींव

COP33 Summit 2028: भारत ने अचानक क्यों वापस लिया मेज़बानी का फैसला? जानिए पूरी खबर

वैश्विक जलवायु मंच पर एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। भारत ने 2028 में होने वाले COP33 Climate Summit की मेज़बानी करने की अपनी योजना वापस ले ली है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दुनिया जलवायु संकट से निपटने के लिए एकजुट हो रही है।

क्या है पूरा मामला?

भारत ने पहले 2028 में होने वाले 33वें Conference of Parties (COP33) की मेज़बानी में रुचि दिखाई थी, लेकिन अब सरकार ने इस प्रस्ताव से पीछे हटने का निर्णय लिया है।

इस संबंध में भारत ने आधिकारिक रूप से United Nations Framework Convention on Climate Change (UNFCCC) को पत्र भेजकर अपने फैसले की जानकारी दी।

क्यों बदला भारत का फैसला?

सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत ने अपने 2028 के दीर्घकालिक योजनाओं और संसाधनों की समीक्षा की।

  1. समीक्षा के बाद यह निष्कर्ष निकला कि इतने बड़े वैश्विक आयोजन की मेज़बानी करना फिलहाल प्राथमिकता में नहीं है।
  2. इसलिए भारत ने रणनीतिक रूप से इस जिम्मेदारी से पीछे हटना बेहतर समझा।

पहले से चल रही थी तैयारी

दिलचस्प बात यह है कि भारत ने इस समिट के लिए तैयारी भी शुरू कर दी थी—

  1. जुलाई 2025 में पर्यावरण मंत्रालय ने एक विशेष टीम बनाई थी
  2. आयोजन के लिए शुरुआती प्लानिंग और लॉजिस्टिक्स पर काम शुरू हो चुका था
  3. भारत को BRICS देशों का भी समर्थन मिला हुआ था

COP Summit कैसे तय होता है?

COP समिट हर साल आयोजित होता है और इसकी मेज़बानी क्षेत्रीय समूहों के अनुसार तय होती है। भारत एशिया-प्रशांत समूह का हिस्सा है, जिसे 2028 में यह मौका मिल सकता था।

आने वाले COP Host देश:

  • COP30: Brazil
  • COP31: Turkey और Australia
  • COP32: Ethiopia

अब भारत के हटने के बाद South Korea को COP33 की मेज़बानी का प्रमुख दावेदार माना जा रहा है।

क्या भारत के क्लाइमेट टारगेट पर असर पड़ेगा?

  • भारत के इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि वह अपने जलवायु लक्ष्यों से पीछे हट रहा है।
  • भारत ने स्पष्ट किया है कि उसकी क्लाइमेट कमिटमेंट्स पूरी तरह ट्रैक पर हैं

भारत के प्रमुख लक्ष्य:

  • 2035 तक 60% क्लीन एनर्जी कैपेसिटी
  • GDP की 47% एमिशन इंटेंसिटी में कमी
  • वन क्षेत्र में वृद्धि करके कार्बन अवशोषण बढ़ाना

COP33 की मेज़बानी से पीछे हटना भारत का एक रणनीतिक और योजनाबद्ध निर्णय माना जा रहा है। हालांकि, यह कदम चौंकाने वाला जरूर है, लेकिन भारत की जलवायु प्रतिबद्धता और वैश्विक भूमिका पर इसका कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत वैश्विक क्लाइमेट मंच पर अपनी भूमिका को कैसे और मजबूत करता है।

पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहसिना किदवई का निधन

देश की वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री, पूर्व केंद्रीय मंत्री और उत्तर प्रदेश की राजनीति का अहम चेहरा रहीं मोहसिना किदवई का 8 अप्रैल, 2026 को दिल्ली में निधन हो गया। 94 वर्ष की आयु में उन्होंने सुबह करीब चार बजे अस्पताल में आखिरी सांस ली। उनके निधन से कांग्रेस पार्टी सहित पूरे राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

मोहसिना किदवई का राजनीतिक जीवन

मोहसिना किदवई का राजनीतिक जीवन बेहद लंबा और प्रभावशाली रहा है। वह कांग्रेस पार्टी की कद्दावर नेतओं में गिनी जाती थीं और गांधी परिवार के काफी करीबी मानी जाती थीं। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के कार्यकाल में केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली थी। उनके कार्यकाल के दौरान उन्होंने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, शहरी विकास, पर्यटन, परिवहन और ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों का सफलतापूर्वक संचालन किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार में भी खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, समाज कल्याण और लघु उद्योग जैसे विभागों में मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

मोहसिना किदवई का जन्म

मोहसिना किदवई का जन्म 1 जनवरी 1932 को एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। वह उच्च शिक्षित थीं और शुरुआत से ही सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहीं। उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति से अपने करियर की शुरुआत की और धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में उत्तर प्रदेश विधान परिषद एवं विधानसभा की सदस्यता के साथ-साथ कई बार लोकसभा और राज्यसभा सांसद के रूप में देश की सेवा की। वह मेरठ से लोकसभा सांसद रहीं एवं बाद में राज्यसभा के लिए भी निर्वाचित हुईं।

मोहसिना किदवई एक मजबूत और अनुभवी नेता

मोहसिना किदवई को एक मजबूत, अनुभवी और जमीन से जुड़ी नेता के रूप में जाना जाता था। उनकी पहचान एक सुलझी हुई और प्रभावशाली राजनेता की रही, जिनका प्रदेश और केंद्र की राजनीति में लंबे समय तक दबदबा रहा। उनके निधन पर कांग्रेस नेताओं समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है। मसौली एवं बाराबंकी के लोगों के लिए यह क्षति केवल एक नेता के जाने की नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र की उस बेटी को खोने की है जिसने राष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन किया।

 

 

 

ब्लैंका व्लासिक वर्ल्ड 10K बेंगलुरु 2026 की ग्लोबल एम्बेसडर नियुक्त

मशहूर TCS वर्ल्ड 10k बेंगलुरु रेस (TCS World 10k Bengaluru race) 26 अप्रैल 2026 को होगी, और इस साल इसमें एक खास बात है। जानी-मानी एथलीट ब्लैंका व्लासिक को इंटरनेशनल इवेंट एम्बेसडर बनाया गया है, जिससे इस इवेंट को दुनिया भर में पहचान और उत्साह मिलेगा।

ब्लैंका व्लासिक कौन हैं?

ब्लैंका व्लासिक क्रोएशिया की एक पूर्व हाई जंप स्टार हैं और उन्हें इस खेल की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में से एक माना जाता है। उनका करियर काफी लंबा और सफल रहा है। उन्होंने 2008 के बीजिंग ओलंपिक में रजत पदक और 2016 के रियो ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था।

उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में भी कई पदक जीते हैं। 2009 में हासिल की गई उनकी 2.08 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग, आज भी क्रोएशिया का राष्ट्रीय रिकॉर्ड है और महिलाओं की हाई जंप के इतिहास में अब तक की सबसे ऊंची छलाँगों में से एक है।

प्रतिभागियों के लिए उनका संदेश

ब्लैंका व्लासिक ने इस कार्यक्रम में शामिल होने पर अपनी खुशी ज़ाहिर की। उन्होंने कहा कि उन्हें इस इतनी बड़ी दौड़ का हिस्सा बनकर गर्व महसूस हो रहा है, जो हज़ारों लोगों को एक साथ लाती है।

उन्होंने सभी प्रतिभागियों को अच्छी तैयारी करने, अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने और इस सफ़र का आनंद लेने के लिए प्रोत्साहित किया। उनके अनुसार, दौड़ना केवल फ़िटनेस के बारे में ही नहीं है, बल्कि मानसिक रूप से मज़बूत बने रहने के बारे में भी है।

खेलों से परे उनकी भूमिका

अपने सक्रिय खेल करियर के बाद भी, व्लासिक एथलेटिक्स से जुड़ी हुई हैं। वह “चैंपियंस फॉर पीस” पहल का हिस्सा हैं और क्रोएशियाई ओलंपिक समिति की उपाध्यक्ष के रूप में भी कार्य करती हैं। वह युवा एथलीटों का समर्थन करना और खेलों को बढ़ावा देना जारी रखती हैं।

आयोजकों ने क्या कहा?

प्रोकाम इंटरनेशनल (Procam International) के विवेक सिंह ने कहा कि वे ब्लैंका व्लासिक को एम्बेसडर के तौर पर पाकर बेहद खुश हैं। उन्होंने बताया कि उनकी उपलब्धियाँ और अनुभव कई धावकों को प्रेरित करेंगे और इस कार्यक्रम को और भी ज़्यादा खास बना देंगे।

TCS वर्ल्ड 10k बेंगलुरु के बारे में

TCS वर्ल्ड 10k बेंगलुरु दुनिया की सबसे लोकप्रिय 10-किलोमीटर की दौड़ में से एक है। इसमें शीर्ष एथलीटों के साथ-साथ आम धावक भी हिस्सा लेते हैं। यह आयोजन केवल प्रतिस्पर्धा के बारे में ही नहीं, बल्कि फिटनेस और सामुदायिक भावना को बढ़ावा देने के बारे में भी है।

 

Bank of Baroda ने बहुभाषी एआई प्लेटफॉर्म ‘बॉब संवाद’ शुरू किया

बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) ने अपने ग्राहकों के अनुभव को और बेहतर बनाने हेतु एक नया डिजिटल पहल शुरू किया है। बैंक ने हाल ही में अपनी शाखाओं में बहुभाषी, कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित (AI platform) संवाद मंच ‘बीओबी संवाद’ लॉन्च किया। इस मंच का मुख्य उद्देश्य ग्राहकों और बैंक कर्मचारियों के बीच भाषाई बाधाओं को कम करना और संवाद को सरल और सहज बनाना है। वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम नागराजू ने इस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उद्घाटन किया।

मुंबई में औपचारिक शुभारंभ

इस प्लेटफॉर्म का औपचारिक शुभारंभ 28 मार्च, 2026 को मुंबई में वित्त मंत्रालय के अंतर्गत वित्तीय सेवा विभाग के सचिव श्री एम. नागराजू द्वारा किया गया। उन्होंने ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाने तथा बैंकिंग सेवाओं को सभी के लिए अधिक समावेशी और सुलभ बनाने हेतु आधुनिक तकनीक के उपयोग के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा की सराहना की।

पसंदीदा भाषा में संवाद करने की सुविधा

‘बीओबी संवाद’ प्लेटफॉर्म ग्राहकों और शाखा कर्मचारियों को उनकी पसंदीदा भाषा में संवाद करने की सुविधा देता है। इसका मतलब यह है कि ग्राहक अपनी भाषा में सवाल पूछ सकते हैं या टाइप कर सकते हैं, और बैंक कर्मचारी उसी समय अपने उत्तर अपनी चुनी हुई भाषा में दे सकते हैं। इस प्रक्रिया में कोई समय की बाधा नहीं आती और संवाद प्राकृतिक और सटीक रहता है। बैंक ने बयान में कहा कि यह मंच भाषाई बाधाओं को दूर करने के लिए डिजाइन किया गया है और ग्राहकों एवं शाखा कर्मचारियों को उनकी पसंदीदा भाषा में सहज संवाद करने में सक्षम बनाता है।

AI तकनीक पर आधारित

पूरी तरह आंतरिक स्तर पर विकसित यह मंच एआई-संचालित भाषण और भाषा प्रौद्योगिकियों का उपयोग करता है और यह 22 भाषाओं में वास्तविक समय, दोतरफा संवाद को सक्षम बनाता है। यह सुनिश्चित करता है कि बातचीत संदर्भ के अनुरूप सटीक और प्राकृतिक प्रवाह वाली हो।

पसंदीदा भाषा में सवाल पूछना

बैंक ने कहा कि इस मंच के जरिये ग्राहक सेवा काउंटर पर अपनी पसंदीदा भाषा में सवाल पूछ सकते हैं या टाइप कर सकते हैं जिसका कर्मचारी की चुनी हुई भाषा में तुरंत अनुवाद किया जाता है। इसी तरह, कर्मचारियों के उत्तर भी ग्राहक की भाषा में तुरंत उपलब्ध होते हैं।

 

INS सुनयना माले पहुंचा, भारत-मालदीव समुद्री सहयोग मजबूत

भारत ने अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को मज़बूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। भारतीय नौसेना का जहाज़ INS सुनायना हाल ही में ‘IOS SAGAR’ नामक एक विशेष मिशन के तहत मालदीव की राजधानी माले पहुँचा। यह यात्रा हिंद महासागर क्षेत्र में मित्रता, सहयोग और सुरक्षा के प्रति भारत की मज़बूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

मालदीव में गर्मजोशी भरा स्वागत

INS सुनायना 6 अप्रैल 2026 को माले पहुँचा, जहाँ मालदीव नेशनल डिफेंस फोर्स (MNDF) ने उसका गर्मजोशी से स्वागत किया। यह मैत्रीपूर्ण स्वागत भारत और मालदीव के बीच घनिष्ठ संबंधों को दर्शाता है, विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा और सहयोग के क्षेत्रों में।

राष्ट्रीय रक्षा बल के दो कर्मी भी शामिल

आईएनएस सुनयना पर तैनात बहुराष्ट्रीय नाविक दल में मालदीव राष्ट्रीय रक्षा बल के दो कर्मी भी शामिल हैं। यह पहल क्षेत्रीय सहयोग और आपसी विश्वास को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

यात्रा के दौरान प्रशिक्षण

माले की यात्रा के दौरान, चालक दल ने कई प्रशिक्षण गतिविधियाँ कीं। इनमें जहाज़ को संभालने के बुनियादी कौशल (सीमैनशिप), छोटे हथियारों से फायरिंग और नुकसान नियंत्रण (damage control) जैसे आपातकालीन अभ्यास शामिल थे। ये अभ्यास आपसी तालमेल को बेहतर बनाने में मदद करते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि चालक दल के सभी सदस्य विभिन्न स्थितियों को मिलकर संभालने के लिए तैयार रहें।

भारतीय उच्चायुक्त का दौरा

माले पहुँचने के बाद, मालदीव में भारत के उच्चायुक्त श्री जी. बालासुब्रमण्यम ने INS सुनायना का दौरा किया। उन्होंने चालक दल से मुलाकात की और उनके प्रयासों की सराहना की। इस तरह के दौरे मनोबल बढ़ाने और राजनयिक संबंधों को मज़बूत करने में सहायक होते हैं।

बंदरगाह दौरे के दौरान नियोजित गतिविधियाँ

मालदीव में अपने प्रवास के दौरान, कई गतिविधियों की योजना बनाई गई है। इनमें पेशेवर बैठकें, सामाजिक मेल-जोल और खेल कार्यक्रम शामिल हैं। इन सभी गतिविधियों का उद्देश्य भाग लेने वाले देशों के बीच बेहतर समझ, मित्रता और सहयोग को बढ़ावा देना है।

संयुक्त नौसेना अभ्यास (PASSEX)

जब INS सुनायना माले से रवाना होगा, तो वह MNDF कोस्ट गार्ड के साथ एक ‘पैसेज एक्सरसाइज’ (PASSEX) में हिस्सा लेगा। यह संयुक्त अभ्यास दोनों नौसेनाओं को आपसी तालमेल बेहतर बनाने और वास्तविक परिस्थितियों में मिलकर बेहतर ढंग से काम करने में मदद करेगा।

आईओएस सागर मिशन का उद्देश्य

‘आईओएस सागर’ पहल के तहत 16 मित्र देशों के साथ मिलकर हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, सहयोग और अंतरसंचालनीयता को बढ़ाया जा रहा है। यह भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति और सागर दृष्टिकोण के अनुरूप है।

महाराष्ट्र में नई हेल्थ पहल: ‘मेरा गांव, स्वस्थ गांव’ योजना शुरू

विश्व स्वास्थ्य दिवस के विशेष अवसर पर 07 अप्रैल 2026 को महाराष्ट्र सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्यव्यापी महत्वाकांक्षी अभियान “मेरा गांव, स्वस्थ गांव” (माझं गाव, आरोग्यसंपन्न गांव) का औपचारिक शुभारंभ किया। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजीत पवार और सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री प्रकाश आबिटकर सहित मंत्रिमंडल के अन्य वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे। इस अवसर पर अभियान की मार्गदर्शिका पुस्तिका एवं सूचनात्मक वीडियो का भी विमोचन किया गया।

राज्य सरकार का लक्ष्य

राज्य सरकार का लक्ष्य इस अभियान के माध्यम से ग्रामीण महाराष्ट्र की स्वास्थ्य प्रणाली को अधिक सक्षम, रोगमुक्त और आत्मनिर्भर बनाना है। सरकार की योजना इसे मात्र एक सरकारी कार्यक्रम तक सीमित न रखकर एक व्यापक जन आंदोलन के रूप में विकसित करने की है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि गांव स्तर से लेकर राज्य स्तर तक स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण से ग्रामीण जनता को उनके घर के दरवाजे पर ही उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं प्राप्त हो सकेंगी।

इस अभियान की मुख्य विशेषता

इस अभियान की मुख्य विशेषता उपचार के बजाय “बचाव” पर अधिक ध्यान केंद्रित करना है। इसके तहत स्वच्छता, शुद्ध पेयजल की आपूर्ति, अपशिष्ट जल प्रबंधन और बेहतर पोषण जैसे बुनियादी कारकों पर काम किया जाएगा। साथ ही, संक्रामक एवं गैर-संक्रामक रोगों के नियंत्रण के साथ-साथ मातृ-बाल स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य और बदलती जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के प्रति नागरिकों को जागरूक किया जाएगा।

ग्राम पंचायत स्तर तक समितियों का गठन

अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक समितियों का गठन किया गया है। बेहतर प्रदर्शन करने वाले गांवों को “स्वस्थ गांव” के रूप में सम्मानित किया जाएगा। इसके लिए सरकार ने 65।25 करोड़ रुपए के पुरस्कारों का प्रावधान किया है, जो जिला परिषदों, पंचायत समितियों और ग्राम पंचायतों को दिए जाएंगे।

मार्च 2026 में भारत के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में गुरुग्राम शीर्ष पर

भारत में वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या बनी हुई है, और एक नई रिपोर्ट ने नई चिंताएँ पैदा कर दी हैं। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के अनुसार, मार्च महीने में गुरुग्राम देश का सबसे प्रदूषित शहर था, जिससे पता चलता है कि कई क्षेत्रों में हवा की गुणवत्ता का स्तर कितना खतरनाक बना हुआ है।

मार्च में गुरुग्राम बना सबसे ज़्यादा प्रदूषित शहर

रिपोर्ट में बताया गया है कि मार्च में गुरुग्राम में प्रदूषण का स्तर सबसे ज़्यादा दर्ज किया गया, जहाँ औसत PM2.5 का स्तर 116 µg/m³ रहा। यह स्तर सुरक्षित सीमा से काफी अधिक है और लोगों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचा सकता है, विशेष रूप से बच्चों और बुज़ुर्गों को।

प्रदूषित शहरों की संख्या में हरियाणा सबसे आगे

भारत के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में से चार शहर हरियाणा के हैं। इनमें बहादुरगढ़, फरीदाबाद, गुरुग्राम और मानेसर शामिल हैं। इससे पता चलता है कि राज्य में वायु प्रदूषण एक बड़ी समस्या है।

टॉप 10 की सूची में शामिल अन्य शहर सिंगरौली, मंडीदीप, गाजियाबाद, भिवाड़ी, नोएडा और नंदेसरी थे, जो मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात जैसे अलग-अलग राज्यों से हैं।

गाज़ियाबाद पूरे साल रहा सबसे ज़्यादा प्रदूषित

जहां मार्च महीने में गुरुग्राम इस सूची में सबसे ऊपर रहा, वहीं पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए गाज़ियाबाद सबसे ज़्यादा प्रदूषित शहर पाया गया। यह दर्शाता है कि प्रदूषण केवल मौसमी समस्या नहीं है, बल्कि कई शहरों में यह एक दीर्घकालिक समस्या है।

कई शहर वायु गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं

रिपोर्ट से यह भी पता चला है कि कई शहर राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (NAAQS) को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे शहरों की संख्या हरियाणा में सबसे ज़्यादा थी, जहाँ 24 में से 9 शहरों में प्रदूषण का सुरक्षित स्तर पार हो गया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश का नंबर आया, जहाँ 21 में से 8 शहर इन मानकों को पूरा करने में असफल रहे।

स्वच्छ वायु कार्यक्रम की सीमित सफलता

भारत का ‘राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम’ (NCAP), जिसे प्रदूषण के स्तर को कम करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, उसके परिणाम मिले-जुले रहे हैं। सात साल बीत जाने के बाद भी, केवल कुछ ही शहर अपने निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार प्रदूषण के स्तर को सफलतापूर्वक कम कर पाए हैं।

कुछ शहरों, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के शहरों में, काफी अच्छा सुधार देखने को मिला है; यहाँ नौ शहरों ने PM10 के स्तर में 40% से अधिक की कमी दर्ज की है। महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, पंजाब और राजस्थान जैसे अन्य राज्यों के भी कुछ शहरों में सुधार की खबरें मिली हैं।

कुछ इलाकों में प्रदूषण बढ़ रहा है

दूसरी ओर, कुछ राज्यों में प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी देखी गई है। ओडिशा में PM10 का स्तर बढ़ने वाले शहरों की संख्या सबसे ज़्यादा थी, जिसके बाद मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश का नंबर आता है। असम, बिहार, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तमिलनाडु के भी कुछ शहरों में प्रदूषण बढ़ता हुआ दिखा।

सबसे अच्छे और सबसे बुरे बदलाव दिखाने वाले शहर

देहरादून में सबसे बड़ा सुधार दर्ज किया गया, जहाँ 2017-18 की तुलना में PM10 का स्तर 75% तक कम हो गया। इसके विपरीत, विशाखापत्तनम में प्रदूषण में सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी देखी गई, जिसमें 73% की वृद्धि हुई। दिल्ली अपने PM10 के स्तर को 17% तक कम करने में कामयाब रहा, जिससे कुछ प्रगति दिखाई दी।

विशेषज्ञों ने और कड़े कदम उठाने की मांग की

विशेषज्ञों का मानना ​​है कि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए और अधिक गंभीर तथा विज्ञान-आधारित कदमों की आवश्यकता है। वे सुझाव देते हैं कि हर क्षेत्र में प्रदूषण के मुख्य स्रोतों पर ध्यान केंद्रित किया जाए और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

वे यह भी सलाह देते हैं कि NCAP का विस्तार करके उसमें और अधिक प्रदूषित शहरों को शामिल किया जाए, एक क्षेत्रीय दृष्टिकोण अपनाया जाए, और उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए और भी सख्त नियमों को लागू किया जाए।

 

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