प्रकृति 2026 पहल: कार्बन मार्केट पोर्टल के मुख्य उद्देश्य और फायदे

प्रकृति 2026 शिखर सम्मेलन 19 से 22 मार्च तक नई दिल्ली में आयोजित किया गया, जो जलवायु कार्रवाई और ग्रीन फाइनेंस की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस कार्यक्रम के दौरान सरकार ने इंडियन कार्बन मार्केट पोर्टल लॉन्च किया, जिसका उद्देश्य कार्बन ट्रेडिंग और उत्सर्जन की निगरानी को मजबूत करना है। इस सम्मेलन का आयोजन ऊर्जा दक्षता ब्यूरो(BEE) द्वारा किया गया और इसका फोकस भारत के जलवायु लक्ष्यों को डिजिटल नवाचार के साथ जोड़ना था।

प्रकृति 2026 क्या है? 

प्रकृति 2026 का पूरा नाम परिवर्तनकारी पहलों के एकीकरण हेतु सुदृढ़ता, जागरूकता, ज्ञान और संसाधनों को बढ़ावा देना (Promoting Resilience, Awareness, Knowledge and Resources for Integrating Transformational Initiatives) है। यह कार्बन मार्केट्स पर आयोजित दूसरा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन है, जिसका उद्देश्य जलवायु वित्त और सतत विकास को बढ़ावा देना है। यह एक वैश्विक मंच के रूप में कार्य करता है, जहाँ नीति-निर्माता, उद्योग जगत के नेता और विशेषज्ञ एक साथ आकर उत्सर्जन कम करने और हरित तकनीकों को अपनाने की रणनीतियों पर चर्चा करते हैं। यह पहल जलवायु परिवर्तन के प्रति भारत के सक्रिय दृष्टिकोण और आर्थिक विकास के साथ स्थिरता को जोड़ने के प्रयासों को दर्शाती है।

इंडियन कार्बन मार्केट पोर्टल: मुख्य उद्देश्य 

इंडियन कार्बन मार्केट पोर्टल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे ऊर्जा दक्षता ब्यूरो द्वारा विद्युत मंत्रालय और पर्यावरण मंत्रालय के अंतर्गत विकसित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन को प्रभावी ढंग से ट्रैक करना, सत्यापित करना और उसका व्यापार (ट्रेडिंग) सुनिश्चित करना है। यह पोर्टल भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) को भी समर्थन देता है और उत्सर्जन में कमी की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखता है।

इस पोर्टल के प्रमुख उद्देश्यों में वित्तीय प्रोत्साहनों के माध्यम से उत्सर्जन में कमी को बढ़ावा देना, कार्बन क्रेडिट का सटीक ट्रैकिंग और सत्यापन सुनिश्चित करना तथा वैश्विक समझौतों के तहत भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं को समर्थन देना शामिल है।

कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) कैसे काम करती है?

यह योजना एक बाजार-आधारित प्रणाली पर आधारित है, जिसका उद्देश्य उत्सर्जन को कम करना है। यह उद्योगों को आर्थिक प्रोत्साहनों के माध्यम से अपने कार्बन उत्सर्जन को घटाने के लिए प्रेरित करती है।

मुख्य कार्यप्रणाली:

  • उत्सर्जन सीमाएँ (Emission Caps): उद्योगों के लिए कार्बन उत्सर्जन की सीमा निर्धारित की जाती है
  • कार्बन क्रेडिट (Carbon Credits): जो कंपनियाँ उत्सर्जन कम करती हैं, उन्हें कार्बन क्रेडिट प्राप्त होते हैं
  • ट्रेडिंग प्रणाली (Trading System): निर्धारित सीमा से अधिक उत्सर्जन करने वाली कंपनियाँ इन क्रेडिट को खरीद सकती हैं

इस प्रकार, यह प्रणाली पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को भी संतुलित करने में मदद करती है।

डिजिटल MRV तकनीक: पारदर्शिता सुनिश्चित करना 

इंडियन कार्बन मार्केट पोर्टल की एक प्रमुख विशेषता डिजिटल मापन, रिपोर्टिंग और सत्यापन (MRV) प्रणाली का उपयोग है। यह तकनीक सुनिश्चित करती है कि उत्सर्जन से संबंधित डेटा सटीक और विश्वसनीय हो।

प्रयुक्त प्रमुख तकनीकें:

  • इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) डिवाइस
  • सैटेलाइट मॉनिटरिंग
  • ब्लॉकचेन आधारित सत्यापन

वैश्विक एकीकरण: पेरिस समझौता और कार्बन ट्रेड

भारत का कार्बन मार्केट पेरिस समझौता के आर्टिकल 6 के अनुरूप विकसित किया जा रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्बन ट्रेडिंग की अनुमति देता है। इस एकीकरण से भारतीय कार्बन क्रेडिट का वैश्विक स्तर पर व्यापार संभव होता है। साथ ही, यह अंतरराष्ट्रीय जलवायु वित्त को आकर्षित करने में मदद करता है और वैश्विक जलवायु बाजार में भारत की स्थिति को मजबूत बनाता है।

समावेशी विकास: किसान और MSME की भागीदारी

प्रकृति 2026 में समावेशी विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिसमें किसानों और MSME क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित किया गया है। किसान सतत कृषि पद्धतियों को अपनाकर कार्बन क्रेडिट अर्जित कर सकते हैं। इस पहल के माध्यम से जलवायु कार्रवाई को ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आर्थिक अवसर में बदला जा रहा है, जिससे सतत विकास को बढ़ावा मिलता है।

 

हिमालय में तेजी से पिघलती बर्फ: क्या गंगा-ब्रह्मपुत्र पर मंडरा रहा है संकट?

हिमालय अब खतरे में है। हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रही है। पहले ये धीरे-धीरे बपिघल रहे थे लेकिन अब ये दोगुनी रफ्तार से पिघल रहे हैं। ध्रुवीय क्षेत्रों के बाद हिमालय विश्व का तीसरा सबसे बड़ा बर्फ का भंडार है, जिसे ‘तीसरा ध्रुव’ भी कहा जाता है। सवाल बड़ा है यदि यही हाल रहा तो क्या गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी जीवनदायिनी नदियां भी सूख जाएंगी? क्या यह किसी आने वाले संकट का संकेत है? हालिया रिपोर्ट चेतावनी देती है।

यह केवल बर्फ नहीं पिघल रही। यह आने वाले जल संकट की नींव है। करोड़ों लोगों की जिंदगी इससे जुड़ी है। खेती, पानी, अर्थव्यवस्था सब दांव पर है। यह कोई दूर की बात नहीं। यह अभी हो रहा है। और तेजी से हो रहा है।

ग्लेशियर क्षेत्र का करीब 12% हिस्सा खत्म

रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियर पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा तेजी से सिकुड़ रहे हैं। 1990 से 2020 के बीच ग्लेशियर क्षेत्र का करीब 12 प्रतिशत हिस्सा खत्म हो चुका है। बर्फ का भंडार भी 9 प्रतिशत कम हो गया है। चिंता की बात यह है कि 21वीं सदी में बर्फ पिघलने की रफ्तार 20वीं सदी के मुकाबले लगभग दोगुनी हो गई है। खासकर 2010 के बाद यह गिरावट और तेज हो गई है। छोटे ग्लेशियर सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. कई तो पूरी तरह गायब होने की कगार पर हैं।

बेसिन में ग्लेशियरों का सबसे ज्यादा नुकसान

रिपोर्ट बताती है कि गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी बेसिन में ग्लेशियरों का सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। पिछले तीन दशकों में इन इलाकों में क्रमशः लगभग 21 प्रतिशत और 16 प्रतिशत तक ग्लेशियर क्षेत्र घटा है। ये वही नदियां हैं जिन पर भारत समेत कई देशों की बड़ी आबादी निर्भर है। यदि ग्लेशियर सिकुड़ते रहे, तो इन नदियों का जलस्तर भी प्रभावित होगा. खासकर सूखे मौसम में पानी की उपलब्धता घट सकती है।

हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में ज्यादा ग्लेशियर

हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में करीब 63,000 से ज्यादा ग्लेशियर हैं। ये ग्लेशियर सिर्फ बर्फ के पहाड़ नहीं हैं। ये प्राकृतिक जल भंडार हैं। गर्मियों में यही बर्फ पिघलकर नदियों को पानी देती है। लेकिन अब यह संतुलन बिगड़ रहा है। तापमान बढ़ रहा है। बारिश का पैटर्न बदल रहा है। 5500 मीटर से नीचे के ग्लेशियर सबसे ज्यादा तेजी से पिघल रहे हैं। वहीं, दक्षिण और पूर्व की ओर मुख वाले ग्लेशियर ज्यादा तेजी से खत्म हो रहे हैं क्योंकि उन्हें अधिक धूप मिलती है।

 

इजरायल के डिमोना को क्यों माना जाता था सबसे सुरक्षित शहर

ईरान और इजरायल के बढ़ते संघर्ष के दौरान 21 मार्च 2026 को एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। दरअसल ईरानी मिसाइलों ने डिमोना और अराद शहरों पर हमला किया। इस हमले में 100 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है, जिसमें डिमोना को शुरुआती हमले का सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। इस घटना को चौंकाने वाली बनाती है वह यह है कि डिमोना को लंबे समय से इजरायल के सबसे सुरक्षित शहरों में से एक माना जाता रहा है। आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह।

बहुस्तरीय हवाई रक्षा प्रणाली

डिमोना को इतना सुरक्षित इसकी एडवांस्ड और बहुस्तरीय हवाई रक्षा प्रणाली बनाती है। आने वाले खतरों को रोकने के लिए आयरन डोम और पैट्रियट मिसाइल प्रणाली जैसे सिस्टम तैनात किए गए थे। यह सिस्टम मिसाइलों का पता लगाने, उन पर नजर रखने और हवा में ही नष्ट करने के लिए डिजाइन किए गए हैं। इससे डिमोना जैसे जरूरी क्षेत्रों के ऊपर एक सुरक्षा कवच बन जाता है।

देश के सबसे ज्यादा सुरक्षित स्थानों में से एक

डिमोना का महत्व वहां मौजूद शिमोन पेरेस नेगेव परमाणु अनुसंधान केंद्र की वजह से है। यह इजरायल की सबसे गुप्त और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सुविधाओं में से एक है। ऐसा माना जाता है कि यह सुविधा इजरायल के परमाणु कार्यक्रम का मुख्य केंद्र है। इससे यह देश के सबसे ज्यादा सुरक्षित स्थानों में से एक बन जाता है।

शहर के ऊपर नो-फ्लाइट जोन घोषित

डिमोना के ऊपर का हवाई क्षेत्र दुनिया के सबसे ज्यादा प्रतिबंधित क्षेत्रों में से एक है। इसे एक सख्त नो-फ्लाइट जोन घोषित किया गया है। इसका मतलब है कोई भी अनाधिकृत विमान चाहे वह नागरिक हो या फिर सैन्य, इसमें प्रवेश नहीं कर सकता।

आसपास होने वाले नुकसान सीमित

डिमोना नेगेव रेगिस्तान के काफी अंदर तक बसा है। यह बड़े आबादी वाले केंद्रों से काफी दूर है। इस भौगोलिक एकांत ने इसे दुश्मनों के लिए एक कठिन लक्ष्य बना दिया है। यह दूरी अचानक होने वाले हमलों की संभावना को कम करती है। इससे आसपास होने वाले नुकसान सीमित हो जाते हैं।

परमाणु सुविधा के लिए जरूरी हिस्से

इन सबके अलावा परमाणु सुविधा के लिए जरूरी हिस्से भूमिगत बनाए गए हैं और कंक्रीट व स्टील की मोटी परतों से इन्हें सुरक्षा दी गई है। यह संरचनाएं खास तौर से भारी बमबारी का सामना करने के लिए डिजाइन की गई हैं। इससे इन्हें नष्ट करना और भी मुश्किल हो जाता है।

 

ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार अलर्ट: पीएम मोदी ने की उच्चस्तरीय बैठक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच 22 मार्च 2026 को कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की अहम बैठक की अध्यक्षता की। प्रधानमंत्री आवास पर तीन घंटे से ज्यादा देर तक चली इस बैठक में मौजूदा हालात, उसके भारत पर असर और सरकार की तैयारियों का व्यापक आकलन किया गया। कैबिनेट सेक्रेटरी ने वैश्विक स्थिति और अब तक उठाए गए कदमों पर डिटेल में प्रेजेंटेशन​ दिया।

सीसीएस की बैठक के दौरान जिन मुद्दों पर चर्चा हुई उनमें कृषि, फर्टिलाइजर, फूड सिक्योरिटी, पेट्रोलियम, पावर, MSME, एक्सपोर्ट, शिपिंग और सप्लाई चेन जैसे अहम सेक्टर शामिल रहे। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का इन सेक्टर्स पर पड़ने वाले असर और उससे निपटने के उपायों पर बैठक में चर्चा हुई। सरकार ने साफ किया कि बदलते हालात का असर शॉर्ट, मीडियम और लॉन्ग टर्म में देखने को मिल सकता है। आम नागरिकों के लिए जरूरी खाद्य वस्तुओं और ईंधन की उपलब्धता को प्राथमिकता दी गई।

क्या-क्या हुई चर्चा बैठक में?

कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सरकार के सभी अंग सही नजरिया अपनाकर नागरिकों को इस संकट के प्रभाव से सुरक्षित रखें। बैठक में भोजन, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा पर चर्चा हुई। किसानों के लिए खरीफ सीजन के लिए खाद की आवश्यकता का आकलन किया गया। PM ने आश्वस्त किया कि पिछले सालों में बनाए गए स्टॉक के कारण खाद की कोई कमी नहीं होगी। भविष्य के लिए वैकल्पिक स्रोतों पर भी चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त देश के सभी पावर प्लांटों में कोयले का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित करने का फैसला लिया गया, ताकि देश में बिजली की कोई किल्लत न हो।

जमाखोरी न हो: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री ने राज्य सरकारों के साथ उचित समन्वय के निर्देश दिए हैं ताकि युद्ध की आड़ में जरूरी वस्तुओं की कालाबाजारी और जमाखोरी न हो सके। उन्होंने कहा कि नागरिकों को कम से कम असुविधा होनी चाहिए। PM मोदी ने इस संकट से निपटने के लिए एक डेडीकेटेड ‘ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स’ और सचिवों के समूह के गठन का निर्देश दिया है। यह समूह अलग-अलग सेक्टर के हितधारकों के साथ मिलकर काम करेगा।

कैबिनेट मंत्री बैठक में मौजूद

पीएम हाउस पर हुई इस हाई लेवल मीटिंग में 13 कैबिनेट मंत्री भी मौजूद थे। इसमें गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन, विदेश मंत्री एस जयशंकर, पीयूष गोयल, हरदीप सिंह पुरी, प्रह्लाद जोशी, अश्विनी वैष्णव, के राम मोहन नायडू, जे पी नड्डा, सर्वानंद सोनोवाल, मनोहर लाल खट्टर और शिवराज सिंह चौहान शामिल थे। इसके अतिरिक्त बैठक में एनएसए अजीत डोभाल और पीएम के दोनों प्रिंसिपल सेक्रेटरी भी मौजूद रहे।

युद्ध की शुरुआत

अमेरिका और इसराइल द्वारा ईरान पर 28 फरवरी को हमला किए जाने के बाद युद्ध की शुरुआत हुई। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इसराइल और खाड़ी क्षेत्र के अपने कई पड़ोसी देशों पर हमला किया। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बाधित कर दिया है, जो एक प्रमुख समुद्री मार्ग है और इसके जरिए दुनिया की 20 प्रतिशत ऊर्जा की ढुलाई होती है। इसके कारण भारत समेत कई देशों में ऊर्जा आपूर्ति में गंभीर व्यवधान पैदा हो गया।

रेलवे की नई पहल: QR कोड से पहचान योग्य फूड पैकेट, अनधिकृत वेंडिंग पर सख्ती

रेल यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेलवे ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब ट्रेनों में कैटरिंग से जुड़े स्टाफ और वेंडर्स के लिए QR कोड आधारित आईडी कार्ड अनिवार्य कर दिए गए हैं। इस पहल का उद्देश्य अनधिकृत वेंडिंग पर रोक लगाना और यात्रियों को सुरक्षित व भरोसेमंद सेवा देना है।

खाने को लेकर अधिकतर रेलवे यात्रियों की काफी ज्यादा समस्याएं रहती हैं। यात्रियों की पुरानी शिकायत यही रही है, कि उन्हें बासी या बेस्वाद खाना परोसा जा रहा है। IRCTC ने इसी समस्या को देखते हुए क्यूआर कोड (QR कोड) की सुविधा शुरू की है, जो फूड पैकेट्स पर लगा होगा। इन QR कोड को स्कैन करते ही खाना बनने का समय, पैकिंग की तारीख समेत अन्य जरूरी डिटेल्स सामने आ जाएंगी। यह फैसिलिटी अवैध वेंडरों पर रोक लगाने और यात्रियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगी।

QR कोड से वेंडर की पूरी पहचान होगी

नई व्यवस्था के तहत हर अधिकृत वेडर, हेल्पर और कैटरिंग स्टाफ को QR कोड युक्त पहचान पत्र दिया जाएगा। यह QR कोड स्कैन करते ही संबंधित व्यक्ति की पूरी जानकारी सामने आ जाएगी, जिसमें नाम, आधार नंबर, मेडिकल फिटनेस और पुलिस वेरिफिकेशन जैसी डिटेल्स शामिल होंगी। इससे यात्रियों को यह पता लगाना आसान होगा कि जो व्यक्ति उन्हें खाना या सामान दे रहा है, वह अधिकृत है या नहीं।

खाने की गुणवत्ता पर भी फोकस

रेलवे ने सिर्फ पहचान व्यवस्था ही नहीं बदली, बल्कि खाने की गुणवत्ता और हाइजीन पर भी खास ध्यान दिया है। खाना अब तय बेस किचन से सप्लाई किया जा रहा है, जहां आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन किचन में CCTV कैमरे लगाए गए हैं, ताकि फूड प्रिपरेशन की निगरानी की जा सके। साथ ही, कुकिंग में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल के लिए ब्रांडेड और भरोसेमंद प्रोडक्ट्स का उपयोग सुनिश्चित किया गया है।

खाने के नमूनों की जांच हो रही

खाने की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए ब्रांडेड और प्रमाणित कच्चे माल का इस्तेमाल अनिवार्य किया गया है। तेल, आटा, चावल, दाल, मसाले और डेयरी उत्पाद जैसी चीजें तय मानकों के अनुसार ही ली जाएंगी।हर यूनिट के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण का प्रमाणन भी जरूरी कर दिया गया है।

खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की निगरानी में काम होगा। रेलवे द्वारा नियमित रूप से खाने के नमूनों की जांच भी की जा रही है। थर्ड पार्टी ऑडिट के जरिए पेंट्री कार और किचन की साफ-सफाई और गुणवत्ता का मूल्यांकन किया जा रहा है। साथ ही यात्रियों की संतुष्टि के लिए सर्वे भी कराया जा रहा है। कर्मचारियों को बेहतर सेवा और स्वच्छता के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

 

चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: चुनाव प्रचार के नए नियम, अब जरूरी होगा प्री-सर्टिफिकेशन!

चुनाव आयोग ने आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि अब सभी राजनीतिक विज्ञापनों को जारी करने से पहले मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी (एमसीएमसी) से प्री-सर्टिफिकेशन लेना अनिवार्य होगा।

6 राज्यों में उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित

चुनाव आयोग ने 15 मार्च को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के साथ-साथ 6 राज्यों में उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया था। इसके बाद चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए यह निर्देश जारी किए गए हैं।

विज्ञापनों के लिए स्वीकृति

आयोग के अनुसार कोई भी पंजीकृत राजनीतिक दल, संगठन, उम्मीदवार या व्यक्ति टीवी, रेडियो, सार्वजनिक स्थानों पर ऑडियो-वीडियो डिस्प्ले, ई-पेपर, बल्क एसएमएस/वॉयस मैसेज और सोशल मीडिया जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर विज्ञापन जारी करने से पहले एमसीएमसी से अनुमति लेगा। बिना प्री-सर्टिफिकेशन के कोई भी राजनीतिक विज्ञापन इंटरनेट या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी नहीं किया जा सकेगा।

एमसीएमसी के फैसलों के खिलाफ अपील

उम्मीदवार अपने विज्ञापनों के प्रमाणन के लिए जिला स्तर की एमसीएमसी में आवेदन कर सकते हैं जबकि राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में मुख्यालय रखने वाले राजनीतिक दल राज्यस्तरीय एमसीएमसी से अनुमति लेंगे। इसके साथ ही, जिला या राज्य एमसीएमसी के फैसलों के खिलाफ अपील के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी की अध्यक्षता में एक अपीलीय समिति भी बनाई गई है।

पेड न्यूज के संदिग्ध मामलों पर कड़ी नजर

चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि एमसीएमसी मीडिया में पेड न्यूज के संदिग्ध मामलों पर कड़ी नजर रखेगी और आवश्यक कार्रवाई करेगी। इसके अतिरिक्त, सभी उम्मीदवारों को नामांकन के समय अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स की जानकारी हलफनामे में देना अनिवार्य होगा, ताकि चुनावी प्रचार पर निगरानी रखी जा सके।

प्रचार-प्रसार पर खर्च का पूरा विवरण

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 77(1) और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, राजनीतिक दलों को चुनाव खत्म होने के 75 दिनों के भीतर इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए किए गए प्रचार-प्रसार पर खर्च का पूरा विवरण चुनाव आयोग को देना होगा। इसमें इंटरनेट कंपनियों को दिए गए भुगतान, विज्ञापन खर्च, कंटेंट निर्माण और सोशल मीडिया संचालन से जुड़े सभी खर्च शामिल होंगे।

इस बैठक का मुख्य उद्देश्य

इस संबंध में 19 मार्च को चुनाव आयोग ने सभी चुनावी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, राज्य पुलिस नोडल अधिकारियों, आईटी नोडल अधिकारियों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के प्रतिनिधियों के साथ बैठक भी की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य चुनाव के दौरान फेक न्यूज, गलत सूचना और भ्रामक खबरों पर समय रहते रोक लगाना और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना था।

विश्व मौसम विज्ञान दिवस 2026: बदलते जलवायु में मौसम विज्ञान की बढ़ती भूमिका

विश्व मौसम विज्ञान दिवस हर वर्ष 23 मार्च को मनाया जाता है। यह दिन मौसम और जलवायु विज्ञान के महत्व को उजागर करता है। वर्ष 2026 का थीम “आज का अवलोकन, कल की सुरक्षा” (Observing Today, Protecting Tomorrow) है, जो इस बात पर केंद्रित है कि सटीक मौसम डेटा कैसे जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में मदद करता है। यह दिन विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की स्थापना की भी स्मृति में मनाया जाता है, जिसने वैश्विक स्तर पर मौसम और जलवायु से जुड़ी सेवाओं को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

विश्व मौसम विज्ञान दिवस क्या है?

विश्व मौसम विज्ञान दिवस मौसम विज्ञान की उस महत्वपूर्ण भूमिका का उत्सव है, जो मौसम, जलवायु और जल प्रणालियों को समझने में मदद करती है। यह दर्शाता है कि वैज्ञानिक डेटा किस प्रकार सरकारों और समुदायों को पर्यावरणीय चुनौतियों के लिए तैयार होने में सहायक होता है। यह दिवस मौसम और जल विज्ञान सेवाओं के महत्व के प्रति जागरूकता भी बढ़ाता है, जो कृषि, विमानन, आपदा प्रबंधन और दैनिक जीवन के लिए आवश्यक जानकारी प्रदान करती हैं। साथ ही, यह देशों को बेहतर योजना और सुरक्षा के लिए अपनी मौसम पूर्वानुमान प्रणालियों को मजबूत करने के लिए प्रेरित करता है।

विश्व मौसम विज्ञान दिवस 2026 थीम

विश्व मौसम विज्ञान दिवस 2026 का थीम “Observing Today, Protecting Tomorrow” है। यह थीम भविष्य के जलवायु जोखिमों की भविष्यवाणी के लिए निरंतर अवलोकन और डेटा संग्रह के महत्व को रेखांकित करती है। आज के मौसम पैटर्न की निगरानी करने से प्राकृतिक आपदाओं को रोकने और उनके दीर्घकालिक प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है। यह थीम उपग्रह, रडार सिस्टम और विश्लेषण उपकरण जैसी उन्नत तकनीकों में निवेश की आवश्यकता पर भी जोर देती है, ताकि मौसम पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

विश्व मौसम विज्ञान दिवस का इतिहास

विश्व मौसम विज्ञान दिवस (WMO) 23 मार्च, 1950 को विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की स्थापना की याद दिलाता है। इस दिवस का पहला आयोजन वर्ष 1961 में किया गया था। WMO संयुक्त राष्ट्र की एक विशेषीकृत एजेंसी है, जो वैश्विक स्तर पर मौसम और जलवायु से जुड़ी गतिविधियों का समन्वय करती है। समय के साथ इस संगठन ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने, समय पर डेटा साझा करने और मौसम पूर्वानुमान क्षमताओं को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

वैश्विक मौसम में WMO की भूमिका 

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) विश्वभर में मौसम संबंधी जानकारी के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह रियल-टाइम डेटा साझा करने की सुविधा प्रदान करता है, जिससे मौसम पूर्वानुमान और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों की सटीकता बढ़ती है।

WMO की प्रमुख भूमिकाएँ:

  • वैश्विक स्तर पर मौसम संबंधी डेटा का आदान-प्रदान सुनिश्चित करना
  • जलवायु परिवर्तन से जुड़े अनुसंधान को समर्थन देना
  • जल संसाधनों और पर्यावरणीय परिवर्तनों की निगरानी करना
  • आपदा जोखिम न्यूनीकरण रणनीतियों को मजबूत बनाना

इस प्रकार, WMO वैश्विक स्तर पर मौसम विज्ञान को सुदृढ़ बनाकर मानव जीवन और पर्यावरण की सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

 

भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले नेता बने नरेंद्र मोदी: पूरी कहानी

भारत के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित सरकार प्रमुख बन गए हैं। उन्होंने कुल 8,931 दिनों का कार्यकाल पूरा करते हुए नेतृत्व के 25वें वर्ष में प्रवेश किया है। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने पवन कुमार चामलिंग का रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया है। यह उपलब्धि उनके गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर भारत के प्रधानमंत्री तक के लंबे और निरंतर नेतृत्व कार्यकाल को दर्शाती है।

पीएम मोदी: भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले नेता 

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह रिकॉर्ड भारतीय राजनीति में एक दुर्लभ उपलब्धि है, जहाँ किसी नेता ने इतनी लंबी अवधि तक लगातार सत्ता में रहते हुए नेतृत्व किया हो। उनका संयुक्त कार्यकाल राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उनके नेतृत्व को दर्शाता है। उन्होंने वर्ष 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की और बाद में 2014 में भारत के प्रधानमंत्री बने।

मुख्य बिंदु:

  • कुल कार्यकाल: 8,931 दिन
  • पार किया: पवन कुमार चामलिंग (8,930 दिन)
  • सार्वजनिक नेतृत्व का 25वां वर्ष शुरू

पीएम मोदी का राजनीतिक सफर

नरेंद्र मोदी ने 07 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने राजनीतिक नेतृत्व की शुरुआत की और उन्होंने 13 वर्षों से अधिक समय तक इस पद पर कार्य किया। वे गुजरात के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले मुख्यमंत्री भी रहे हैं। इसके बाद मई 2014 में वे भारत के 14वें प्रधानमंत्री बने और राष्ट्रीय राजनीति में एक नया अध्याय शुरू किया, जिससे देश की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव आया। वे पहले गैर-कांग्रेसी नेता थे जिन्होंने लोकसभा में पूर्ण बहुमत हासिल किया और 2014 से लगातार देश का नेतृत्व प्रधानमंत्री के रूप में कर रहे हैं।

मोदी की रिकॉर्ड तोड़ चुनावी सफलता 

नरेंद्र मोदी की इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे उनकी लगातार मजबूत चुनावी सफलता एक प्रमुख कारण रही है। उन्होंने 2014, 2019 और 2024 में लगातार तीन लोकसभा चुनाव जीते हैं।

वे कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल करने वाले नेता भी बने हैं:

  • पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री जिन्होंने दो पूर्ण कार्यकाल पूरे किए
  • हाल के दशकों में लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने वाले पहले नेता
  • मुख्यमंत्री के रूप में सबसे अधिक पूर्व अनुभव रखने वाले प्रधानमंत्री

पीएम मोदी की वैश्विक सोशल मीडिया उपस्थिति

राजनीतिक उपलब्धियों के अलावा, नरेंद्र मोदी ने डिजिटल दुनिया में भी कई रिकॉर्ड बनाए हैं। उनकी सोशल मीडिया पर मजबूत उपस्थिति ने उन्हें दुनिया के सबसे अधिक फॉलो किए जाने वाले नेताओं में शामिल कर दिया है।

मुख्य डिजिटल उपलब्धियाँ:

  • YouTube: 30 मिलियन से अधिक सब्सक्राइबर
  • Instagram: 100 मिलियन से अधिक फॉलोअर्स
  • X (Twitter): लगभग 106.4 मिलियन फॉलोअर्स

दीर्घकाल तक शासन करने वाले वैश्विक नेता (निर्वाचित/व्यवहारिक)

नेता देश पद सत्ता में कार्यकाल
ली कुआन यू सिंगापुर प्रधानमंत्री 31 वर्ष (1959–1990)
हुन सेन कंबोडिया प्रधानमंत्री 38 वर्ष (1985–2023)
नरेंद्र मोदी भारत प्रधानमंत्री (पूर्व मुख्यमंत्री भी) लगभग 25 वर्ष
शेख़ हसीना बांग्लादेश प्रधानमंत्री 17+ वर्ष (लगातार कार्यकाल)
एंजेला मर्केल जर्मनी चांसलर 16 वर्ष (2005–2021)

 

शहीद दिवस 2026: भगत सिंह का बलिदान और प्रेरणादायक जीवन

भारत में शहीद दिवस 23 मार्च 2026 को मनाया जाता है, जिसमें भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर के बलिदान को याद किया जाता है। इन्हें ब्रिटिश सरकार ने 1931 में इसी दिन फांसी दी थी। यह दिन केवल इतिहास का स्मरण नहीं है, बल्कि साहस, युवाओं की शक्ति और स्वतंत्रता की भावना का प्रतीक है। इतनी कम उम्र में दिया गया उनका बलिदान आज भी करोड़ों लोगों को प्रेरित करता है और आधुनिक समय में भी उनका योगदान प्रासंगिक बना हुआ है।

यह दिन उन वीर सपूतों, स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों को याद करने के लिए समर्पित है जिन्होंने भारत की आज़ादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। शहीद दिवस केवल भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की याद में ही नहीं मनाया जाता, बल्कि उन सभी वीरों के सम्मान में भी इसे मनाया जाता है जिन्होंने अपनी कुर्बानी से देश की स्वतंत्रता की राह को आसान बनाया। यह दिन हमें उनकी वीरता, साहस और बलिदान की याद दिलाता है और देशभक्ति की भावना को हर दिल में जगाता है।

शहीद दिवस का इतिहास

शहीद दिवस का इतिहास 1928 से जुड़ा है, जब ब्रिटिश सरकार ने साइमन कमीशन (Simon Commission) को भारत भेजा, जिसमें कोई भी भारतीय सदस्य शामिल नहीं था। इस कारण पूरे देश में व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। लाहौर में हुए एक प्रदर्शन के दौरान लाला लाजपत राय (पंजाब केसरी) पुलिस के लाठीचार्ज में गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना ने Bhagat Singh और उनके साथी क्रांतिकारियों को गहराई से प्रभावित किया, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने ब्रिटिश अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्णय लिया।

शहीद दिवस इसी वजह से मनाया जाता है 

शहीद दिवस मनाने का उद्देश्य केवल इन तीनों क्रांतिकारियों को याद करना नहीं है, बल्कि यह दिन हमें उन सभी वीरों की याद दिलाता है जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर देश को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराया। यह दिन हमें देशभक्ति, साहस और बलिदान की प्रेरणा देता है। इसके माध्यम से हम अपने युवा पीढ़ी को यह संदेश दे सकते हैं कि देश की सेवा में अपने कर्तव्य को निभाना सबसे बड़ा सम्मान है।

आज भी क्यों महत्वपूर्ण है शहीद दिवस

शहीद दिवस केवल एक स्मृति दिवस नहीं, बल्कि बलिदान और साहस का सशक्त प्रतीक है।

  • यह नई पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम के संघर्षों से जोड़ता है।
  • यह साहस, न्याय और देशभक्ति जैसे मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देता है।
  • देशभर में स्कूलों और संस्थानों में कार्यक्रम आयोजित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है।

भगत सिंह केवल एक क्रांतिकारी ही नहीं, बल्कि एक गहरे विचारक भी थे, जिनके विचार आज भी प्रेरणा देते हैं।

भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी

23 मार्च 1931 को ब्रिटिश सरकार ने लाहौर जेल में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी दे दी। यह घटना स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण क्षण बन गई। तीनों क्रांतिकारियों ने अपने साहस और देशभक्ति के बल पर पूरे देश में आज़ादी की चेतना को जगाया। उनके बलिदान ने यह संदेश दिया कि स्वतंत्रता केवल नेताओं या बड़ी संख्या में लोगों के प्रयास से ही नहीं आती, बल्कि व्यक्तिगत साहस और समर्पण से भी इसे हासिल किया जा सकता है।

 

भारतीय अभिनेत्री ऋतुपर्णा सेनगुप्ता को यूके में अंतरराष्ट्रीय सम्मान

भारतीय अभिनेत्री ऋतुपर्णा सेनगुप्ता को ‘महिला सशक्तिकरण पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है। उन्हें वर्ष 2026 में ब्रिटेन के प्रतिष्ठित ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ में सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कला और संस्कृति के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए दिया गया। इस समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियों को रेखांकित किया गया।

महिला सशक्तिकरण पुरस्कार क्या है?

महिला सशक्तिकरण पुरस्कार एक प्रतिष्ठित सम्मान है, जो महिलाओं की उपलब्धियों को मान्यता देने के लिए लंदन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान प्रदान किया गया। यह पुरस्कार कला और संस्कृति के क्षेत्र में वर्षों से किए गए प्रभावशाली योगदान के लिए ऋतुपर्णा सेनगुप्ता को दिया गया। यह सम्मान सीमा मल्होत्रा ​​और वीरेंद्र शर्मा द्वारा प्रदान किया गया, जबकि इस कार्यक्रम का आयोजन GloWomen CiC ने किया, जिसका उद्देश्य महिला सशक्तिकरण और नेतृत्व को बढ़ावा देना तथा वैश्विक स्तर पर जागरूकता फैलाना है।

यूके हाउस ऑफ कॉमन्स में आयोजित समारोह 

यह पुरस्कार समारोह यूनाइटेड किंगडम के लंदन स्थित प्रतिष्ठित हाउस ऑफ कॉमन्स (House of Commons) में आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) के अवसर पर हुआ, जिससे इस सम्मान का महत्व और बढ़ गया। इस अवसर पर कला, संस्कृति, नेतृत्व और सामाजिक कार्य जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया। अंतरराष्ट्रीय गणमान्य व्यक्तियों और नीति-निर्माताओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को वैश्विक स्तर पर महिलाओं की उपलब्धियों को मान्यता देने का एक महत्वपूर्ण मंच बना दिया।

ऋतुपर्णा सेनगुप्ता का सिनेमा में योगदान

ऋतुपर्णा सेनगुप्ता को यह सम्मान भारतीय सिनेमा और सांस्कृतिक प्रचार में उनके लंबे योगदान के लिए दिया गया। उन्होंने वैश्विक मंचों पर भारतीय कला का प्रभावी प्रतिनिधित्व किया है। उनका कार्य केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान और प्रतिनिधित्व को भी बढ़ावा देता है। यह सम्मान उन्हें एक वैश्विक सांस्कृतिक दूत के रूप में स्थापित करता है।

अभिनेत्री के लिए गर्व और भावनात्मक क्षण

पुरस्कार प्राप्त करते समय उन्होंने इस पल को अत्यंत खास और यादगार बताया। उन्होंने अपने परिवार, दर्शकों और समर्थकों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस समारोह में उनके पति संजय चक्रवर्ती भी उपस्थित थे। उनका वक्तव्य इस अंतरराष्ट्रीय सम्मान को लेकर गर्व और कृतज्ञता को दर्शाता है।

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