Worldline की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत का डिजिटल पेमेंट्स इकोसिस्टम तेज़ी से बढ़ रहा है, और 2025 में UPI QR कोड्स में 15% की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। देश में QR कोड्स की कुल संख्या 731.38 मिलियन तक पहुँच गई है, जो पूरे देश में व्यापारियों द्वारा इसके व्यापक रूप से अपनाए जाने को दर्शाता है। इसके साथ ही, ट्रांज़ैक्शन की संख्या में भी 33% की बढ़ोतरी हुई है, जो तेज़, आसान और कैशलेस पेमेंट्स के प्रति बढ़ती पसंद का संकेत है।
UPI QR ग्रोथ: 2025 की मुख्य बातें
QR-आधारित पेमेंट्स का बढ़ता चलन भारत के फिनटेक सेक्टर की एक खास पहचान बन गया है।
मुख्य बातें
- UPI QR कोड्स की संख्या 633.44 मिलियन (2024) से बढ़कर 731.38 मिलियन (2025) हो गई है।
- ग्रोथ रेट में भी साल-दर-साल 15% की बढ़ोतरी हुई है।
- 2025 में UPI ट्रांजैक्शन की संख्या भी बढ़कर 228.5 बिलियन हो गई है।
- ट्रांजैक्शन ग्रोथ में 33% की उछाल देखी गई है, जो 2024 के 172.2 बिलियन से बढ़कर इस स्तर पर पहुंची है।
यह ग्रोथ दिखाती है कि कैसे UPI QR कोड्स मर्चेंट पेमेंट्स के लिए, और खासकर छोटे व्यवसायों के लिए, एक रीढ़ की हड्डी बन गए हैं।
मर्चेंट द्वारा अपनाए जाने से विकास को मिल रहा बढ़ावा
इस तेज़ी के पीछे मुख्य कारणों में से एक, पूरे भारत में मर्चेंट द्वारा QR कोड को तेज़ी से अपनाया जाना है।
व्यापारी QR कोड को ज़्यादा पसंद करते हैं, क्योंकि POS मशीनों के मुकाबले इसे सेट अप करने का खर्च कम होता है और इसके लिए महंगे हार्डवेयर की ज़रूरत नहीं पड़ती। साथ ही, इससे पेमेंट सीधे बैंक अकाउंट में तुरंत आ जाता है और यह व्यापारियों और ग्राहकों, दोनों के लिए इस्तेमाल करना आसान है।
सड़क किनारे के विक्रेताओं से लेकर बड़े रिटेल स्टोर तक, इन QR कोड्स ने डिजिटल पेमेंट्स को हर किसी के लिए सुलभ बना दिया है।
UPI बनाम POS टर्मिनल्स: बदलते पेमेंट ट्रेंड्स
जैसे-जैसे QR कोड्स तेज़ी से बढ़ रहे हैं, पारंपरिक पेमेंट सिस्टम भी फैल रहे हैं, लेकिन उनकी गति थोड़ी धीमी है।
2025 में POS टर्मिनल्स की संख्या 15% बढ़कर 11.48 मिलियन हो गई।
हालाँकि, UPI QR का इस्तेमाल कहीं ज़्यादा व्यापक है, क्योंकि यह इस्तेमाल में आसान और किफ़ायती है।
यह कार्ड-आधारित सिस्टम्स के मुकाबले मोबाइल-आधारित कॉन्टैक्टलेस पेमेंट्स की ओर एक साफ़ बदलाव का संकेत देता है।
औसत टिकट साइज़ क्या है?
यह रिपोर्ट औसत ट्रांज़ैक्शन साइज़ के ज़रिए बदलते हुए उपभोक्ता व्यवहार को भी दर्शाती है।
मुख्य डेटा
- UPI औसत टिकट साइज़: ₹1,314 (2025)
- जो ₹1,437 (2024) से कम है
- क्रेडिट कार्ड औसत: ₹4,150
- डेबिट कार्ड औसत: ₹3,360
व्याख्या
- छोटे और रोज़मर्रा के लेन-देन के लिए UPI का इस्तेमाल बढ़ रहा है।
- ज़्यादा कीमत वाली खरीदारी के लिए अभी भी कार्ड को ही प्राथमिकता दी जाती है।
डिजिटल पेमेंट्स में भारत का वैश्विक नेतृत्व
भारत अब रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट्स के क्षेत्र में दुनिया के शीर्ष देशों में से एक है, और UPI अन्य देशों के लिए एक मिसाल कायम कर रहा है।
यह सिस्टम स्केलेबल और इंटरऑपरेबल होने के साथ-साथ कम खर्चीला और कुशल भी है। इसे सभी क्षेत्रों में व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है।
इसके अलावा, दुनिया भर के कई देश भारत के UPI मॉडल का अध्ययन कर रहे हैं और उसका उपयोग भी कर रहे हैं।


