भारत के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जून 15 से 17, 2026 तक फ्रांस में आयोजित होने वाले आगामी G7 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। उनकी भागीदारी की पुष्टि फ्रांस के विदेश मंत्रालय द्वारा आधिकारिक रूप से की गई, जो भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ हुई कूटनीतिक चर्चाओं के बाद सामने आई। यह शिखर सम्मेलन एवियन-लेस-बेंस में आयोजित होगा, जहां दुनिया की प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं के नेता और कुछ साझेदार देश एकत्रित होंगे।
G7 क्या है और इसका महत्व
G7 (ग्रुप ऑफ सेवन) दुनिया के प्रमुख औद्योगिक और आर्थिक रूप से मजबूत देशों—संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, फ़्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा—का एक अनौपचारिक समूह है, जिसमें यूरोपीय संघ भी शामिल होता है। इसकी स्थापना 1975 में हुई थी और यह वैश्विक स्तर पर आर्थिक नीति, सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और व्यापार से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों को प्रभावित करता है।
हालांकि भारत G7 का सदस्य नहीं है, फिर भी उसकी मजबूत अर्थव्यवस्था और “ग्लोबल साउथ” के प्रतिनिधि के रूप में भूमिका के कारण उसे नियमित रूप से आमंत्रित किया जाता है।
G7 समिट 2026 के प्रमुख मुद्दे
इस वर्ष के शिखर सम्मेलन में कई वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा होने की संभावना है।
- वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और मैक्रोइकोनॉमिक असंतुलन
- ऊर्जा सुरक्षा, खासकर Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव
- तेल और गैस आपूर्ति में बाधाओं का प्रभाव
- जलवायु परिवर्तन और सतत विकास
इन मुद्दों में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है, विशेष रूप से ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के संदर्भ में।
भारत की भूमिका और महत्व
भारत का आमंत्रण उसकी बढ़ती वैश्विक प्रभावशीलता को दर्शाता है। एक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में भारत निम्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देता है—
- वैश्विक आर्थिक विकास और स्थिरता
- विकास वित्त और सतत विकास
- जलवायु कार्रवाई और ऊर्जा परिवर्तन
हाल के वर्षों में भारत कई G7 आउटरीच सत्रों में भाग ले चुका है, जिससे वह विकसित और विकासशील देशों के बीच एक सेतु के रूप में उभरा है।


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