रिलायंस फाउंडेशन की फाउंडर और अध्यक्ष नीता अंबानी को कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (KISS) के मेंबर में KISS ह्यूमैनिटेरियन अवॉर्ड 2025 से सम्मानित किया गया। यह अवॉर्ड उन्हें उनके सामाजिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण बदलाव, महिला सशक्तिकरण और खेल को बढ़ावा देने के योगदान के लिए दिया गया। पुरस्कार श्रीलंका के नोबेल पुरस्कार विजेता मोहन मुनासिंघे ने प्रदान किया और कार्यक्रम में KIIT, KISS और KIMS के संस्थापक अच्युत सामंत, वरिष्ठ अधिकारी, छात्र एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
KISS ह्यूमैनिटेरियन अवॉर्ड 2025: मुख्य बातें
- KISS ह्यूमैनिटेरियन अवॉर्ड एक प्रतिष्ठित सम्मान है, जो सामाजिक विकास और मानव कल्याण में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को दिया जाता है।
- यह पुरस्कार मोहन मुनासिंघे द्वारा अच्युत सामंत और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में प्रदान किया गया।
- समारोह में KISS के छात्र, वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद और विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्ट अतिथि शामिल हुए।
नीता अंबानी का सामाजिक योगदान
नीता अंबानी ने रिलायंस फाउंडेशन के माध्यम से देशभर में कई महत्वपूर्ण पहलें शुरू की हैं।
मुख्य क्षेत्र:
- शिक्षा: छात्रवृत्ति, डिजिटल लर्निंग और स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर
- स्वास्थ्य: ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं और मेडिकल आउटरीच
- महिला सशक्तिकरण: कौशल विकास और आजीविका कार्यक्रम
- ग्रामीण विकास: गांवों में सतत विकास पहल
- खेल: जमीनी स्तर से लेकर प्रोफेशनल खेलों को बढ़ावा
छात्रों के लिए संदेश
- समारोह के दौरान नीता अंबानी ने छात्रों को संबोधित करते हुए उन्हें अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित किया।
- उन्होंने कहा कि सफलता के लिए कड़ी मेहनत, समर्पण और धैर्य आवश्यक है। साथ ही, उन्होंने आत्मविश्वास रखने और बड़े लक्ष्य निर्धारित करने पर जोर दिया।
KISS की भूमिका
- कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज जनजातीय छात्रों को निःशुल्क शिक्षा, भोजन और आवास प्रदान करने के लिए जाना जाता है।
- इसकी स्थापना अच्युत सामंत ने की थी, और यह संस्थान समाज के वंचित वर्गों के उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
पुरस्कार का महत्व
KISS ह्यूमैनिटेरियन अवॉर्ड उन व्यक्तियों को सम्मानित करता है, जिन्होंने समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
नीता अंबानी को मिला यह सम्मान—
- कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) के प्रभाव को दर्शाता है
- राष्ट्र निर्माण में परोपकार की भूमिका को उजागर करता है
- समावेशी और सतत विकास के महत्व को रेखांकित करता है


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