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इज़रायल vs ईरान: धर्म, जनसंख्या और कट्टरता पर बड़ा विश्लेषण

अमेरिका और इजराइल की तरफ से ईरान पर हमले (Israel Iran War) लगातार जारी हैं, जबकि ईरान भी जवाबी कार्रवाई कर रहा है। इससे पूरा मध्य पूर्व तनाव की चपेट में है और वैश्विक ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है। इजरायल ने ईरान के तेहरान के कई जगह बड़े धमाके किए हैं। इस जंग के बीच क्या आप जानते हैं कि दोनों देश में किस धर्म के लोग ज्यादा हैं और वहां हिंदुओं की आबादी कितनी है। चलिए जानें कि इन दो देशों में वहां सबसे ज्यादा किस धर्म के लोग रहते हैं? और क्या इन देशों में हिंदू समुदाय मौजूद है, और यदि है तो उसकी संख्या कितनी है।

इज़रायल की कुल आबादी

इज़रायल की कुल आबादी लगभग 01 करोड़ के आसपास मानी जाती है। यहां यहूदी धर्म मानने वाले लोग बहुसंख्यक हैं। यहां लगभग 73–75 प्रतिशत आबादी यहूदी है। यहां पर दूसरा सबसे बड़ा समुदाय मुस्लिमों है और इनकी हिस्सेदारी लगभग 18 प्रतिशत के आसपास है। इसके अलावा ईसाई और द्रूज़ समुदाय भी मौजूद हैं।

ईरान की आबादी

ईरान की आबादी लगभग 8.5 करोड़ से अधिक है। यहां इस्लाम प्रमुख धर्म है, और लगभग 99 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है। इनमें से अधिकांश शिया मुस्लिम हैं, क्योंकि ईरान आधिकारिक रूप से एक इस्लामिक गणराज्य है। यहां सुन्नी मुसलमानों के साथ-साथ छोटे पैमाने पर ईसाई, यहूदी और ज़ोरास्ट्रियन समुदाय भी रहते हैं।

हिंदू आबादी बहुत कम

इज़रायल और ईरान दोनों देशों में हिंदू आबादी बहुत कम है। इज़रायल में हिंदुओं की संख्या मुख्यतः भारतीय मूल के प्रवासियों और कुछ पेशेवरों तक सीमित है। अनुमानित तौर पर यह संख्या कुछ हजार के आसपास मानी जाती है, लेकिन यह कुल आबादी का बहुत छोटा हिस्सा है।

वहीं, ईरान में हिंदू समुदाय बहुत ही कम है। वहां कुछ भारतीय व्यापारी परिवार या अस्थायी कामगार मौजूद हो सकते हैं, पर स्थायी धार्मिक समुदाय के रूप में हिंदुओं की आबादी बेहद कम है।

यहूदी राष्ट्र के रूप में परिभाषित

इज़रायल खुद को यहूदी राष्ट्र के रूप में परिभाषित करता है। यहां लगभग तीन-चौथाई आबादी यहूदी है। मुस्लिम, ईसाई एवं द्रूज़ समुदाय भी नागरिक अधिकारों के साथ मौजूद हैं। संसद (केनेस्सेट) में धार्मिक और धर्मनिरपेक्ष दोनों और अलग-अलग विचारधाराओं की पार्टियां सक्रिय हैं। इज़रायल में यहूदी समुदाय के भीतर भी विविधता है।

ईरान आधिकारिक तौर पर इस्लामिक गणराज्य

ईरान आधिकारिक तौर पर इस्लामिक गणराज्य है। यहां लगभग 99 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है, जिनमें बहुसंख्यक शिया हैं। देश का संविधान इस्लामी सिद्धांतों पर आधारित है। सर्वोच्च धार्मिक नेता की भूमिका राजनीतिक ढांचे में केंद्रीय मानी जाती है। हालांकि ईरान में ईसाई, यहूदी एवं ज़ोरास्ट्रियन अल्पसंख्यकों को संवैधानिक मान्यता प्राप्त है, लेकिन सामाजिक तथा राजनीतिक ढांचा स्पष्ट रूप से इस्लामी पहचान से जुड़ा है।

कट्टरता पर बड़ा विश्लेषण

इज़रायल में धार्मिक और सेक्युलर समूहों के बीच बहस होती रहती है। कुछ धार्मिक दल सख्त धार्मिक नियमों की वकालत करते हैं, जबकि बड़ी आबादी उदार लोकतांत्रिक मूल्यों का समर्थन करती है. इसलिए पूरे देश को एक ही तरह से “कट्टर” कहना सही नहीं होगा।

वहीं, ईरान में राज्य व्यवस्था धार्मिक नेतृत्व के अधीन है, इसलिए सार्वजनिक जीवन में धार्मिक नियमों का प्रभाव अधिक स्पष्ट है जैसे ड्रेस कोड या सामाजिक आचरण से जुड़े कानून। फिर भी समाज के भीतर विचारों की विविधता मौजूद है, जिसे अक्सर सार्वजनिक बहसों और युवा पीढ़ी के दृष्टिकोण में देखा जा सकता है।

हिंदू आबादी बहुत सीमित

दोनों देशों में हिंदू आबादी बहुत सीमित है। यह मुख्यतः भारतीय मूल के पेशेवरों या व्यापारियों तक सीमित है। इनकी संख्या कुल आबादी के मुकाबले बहुत कम है और धार्मिक संरचना पर इसका कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ता।

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