अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने अपने इतिहास में सबसे बड़ी आपातकालीन तेल रिलीज़ की घोषणा की है। इसके तहत रणनीतिक भंडारों से 400 मिलियन बैरल तेल बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बढ़ रही है। इस कदम का उद्देश्य वैश्विक तेल आपूर्ति को स्थिर रखना और बाजार में संभावित व्यवधान को रोकना है। यह स्थिति विशेष रूप से फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों के लिए बढ़ते सुरक्षा खतरों के बाद उत्पन्न हुई है।
IEA द्वारा आपातकालीन तेल भंडार जारी करना
- IEA का यह आपातकालीन तेल भंडार जारी करना सदस्य देशों द्वारा किया गया एक समन्वित प्रयास है, जिसका उद्देश्य भू-राजनीतिक संकट के समय वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा करना है।
- इस योजना के तहत 400 मिलियन बैरल तेल सदस्य देशों के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा।
- ये भंडार अंतरराष्ट्रीय समझौतों के तहत बनाए रखे जाते हैं ताकि युद्ध, प्राकृतिक आपदा या अन्य आपात स्थितियों में तेल आपूर्ति में आने वाली बाधाओं का सामना किया जा सके।
- यह निर्णय दर्शाता है कि पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति को वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए गंभीर खतरे के रूप में देखा जा रहा है।
IEA सदस्य देशों के रणनीतिक तेल भंडार
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार IEA के सदस्य देशों के पास सामूहिक रूप से लगभग 1.2 अरब बैरल सार्वजनिक आपातकालीन तेल भंडार मौजूद हैं।
- इसके अतिरिक्त लगभग 600 मिलियन बैरल तेल निजी उद्योगों द्वारा सरकारी निर्देशों के तहत सुरक्षित रखा जाता है।
- ये भंडार किसी भी आपूर्ति संकट के समय सुरक्षा कवच (Safety Buffer) के रूप में काम करते हैं।
- जब तेल आपूर्ति में बाधा आती है, तब सरकारें इन भंडारों से तेल जारी करके बाजार को स्थिर रख सकती हैं।
IEA की यह आपातकालीन प्रणाली अचानक होने वाली कमी को रोकने और वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए बनाई गई है।
पश्चिम एशिया संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़
- IEA द्वारा यह कदम पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बाद उठाया गया है।
- रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने फारस की खाड़ी में व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाया।
- यह कार्रवाई संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल द्वारा किए गए सैन्य हमलों के जवाब में की गई बताई जा रही है।
- इन घटनाओं के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले कार्गो जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक है, क्योंकि वैश्विक तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इसलिए यहां किसी भी तरह की बाधा अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार के लिए बड़ी चिंता बन जाती है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की भूमिका
- अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसका मुख्यालय पेरिस, फ्रांस में स्थित है।
- इसकी स्थापना 1974 में वैश्विक तेल संकट के बाद की गई थी।
- इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक विकास और टिकाऊ ऊर्जा नीतियों को बढ़ावा देना है।


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