पाकिस्तान ने “ऑपरेशन ग़ज़ब लिल-हक़” नाम से एक बड़ा सीमापार सैन्य अभियान शुरू किया है, जिससे अफगानिस्तान के साथ तनाव में तीव्र वृद्धि हुई है। यह अभियान 26 फरवरी 2026 की तड़के उस समय शुरू हुआ, जब इस्लामाबाद ने अफगान तालिबान पर सीमा के कई संवेदनशील क्षेत्रों में “बिना उकसावे की गोलीबारी” शुरू करने का आरोप लगाया। पाकिस्तानी अधिकारियों ने इसे पिछले कई महीनों से बढ़ रही शत्रुता और सीमापार उग्रवादी गतिविधियों के खिलाफ एक निर्णायक जवाब बताया। रिपोर्टों के अनुसार काबुल सहित अफगानिस्तान के कई शहरों में हवाई हमले किए गए, जबकि दोनों देशों ने एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगाए। यह घटनाक्रम हाल के वर्षों में दोनों पड़ोसी देशों के बीच सबसे गंभीर टकरावों में से एक माना जा रहा है।
ऑपरेशन “ग़ज़ब लिल-हक़” क्या है?
पाकिस्तान द्वारा शुरू किया गया ऑपरेशन “ग़ज़ब लिल-हक़” (अर्थ: “न्याय के लिए क्रोध”) एक व्यापक सैन्य अभियान है, जिसे कथित अफ़गान तालिबान ठिकानों के विरुद्ध चलाया जा रहा है। पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय के अनुसार, यह अभियान तब शुरू किया गया जब खैबर पख्तूनख्वा के चितरल, खैबर, मोहम्मद, कुर्रम और बाजौर सेक्टरों में सीमापार गोलीबारी की घटनाएँ सामने आईं।
पाकिस्तान के सरकारी प्रसारक ने दावा किया कि सशस्त्र बलों ने काबुल, कंधार और पक्तिया में तालिबान के प्रमुख सैन्य ठिकानों पर समन्वित हवाई हमले किए। नंगरहार प्रांत में एक गोला-बारूद डिपो को भी नष्ट किए जाने की बात कही गई। पाकिस्तान ने बताया कि झड़पों में उसके दो सुरक्षाकर्मी मारे गए, जबकि 133 तालिबान लड़ाकों को मार गिराने का दावा किया गया है। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि अभी शेष है।
ताजा पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव की वजह
यह नया टकराव हाल के दिनों में बढ़ती सीमापार झड़पों के बाद सामने आया।
- पाकिस्तान ने पहले भी अफगानिस्तान के अंदर हवाई हमले किए थे।
- इस्लामाबाद का दावा है कि ये हमले पाकिस्तान में हुए आत्मघाती हमलों से जुड़े उग्रवादी शिविरों को निशाना बनाकर किए गए।
- अफगान अधिकारियों ने आरोप लगाया कि नागरिक घरों और एक धार्मिक स्कूल को निशाना बनाया गया, जिसमें महिलाओं और बच्चों की मौत हुई।
- तालिबान ने 26 फरवरी 2026 की रात “बड़े पैमाने पर” जवाबी कार्रवाई की घोषणा की।
- काबुल में जोरदार विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं, जबकि पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी सीमावर्ती इलाकों में भारी गोलीबारी की खबरें आईं।
हताहत और परस्पर विरोधी दावे
पाकिस्तान ने पुष्टि की कि खैबर पख्तूनख्वा में सीमा झड़पों के दौरान उसके दो सैनिक मारे गए और तीन घायल हुए।
तालिबान प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने दावा किया कि कई पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और कुछ को बंदी बना लिया गया, साथ ही कुछ सैन्य चौकियों पर कब्ज़ा कर लिया गया।
हालांकि, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif के कार्यालय ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि किसी भी आक्रामक कार्रवाई का “तत्काल और प्रभावी जवाब” दिया जाएगा।
नाजुक युद्धविराम पर संकट
अक्टूबर में हुए एक नाजुक युद्धविराम समझौते के बावजूद यह तनाव बढ़ा है। पाकिस्तान–अफगानिस्तान सीमा, जिसे आमतौर पर डूरंड रेखा कहा जाता है, लगभग 2,574 किमी लंबी और पहाड़ी व दुर्गम क्षेत्र से गुजरती है।
हालिया झड़पों के कारण—
- तोरखम सीमा पार के पास रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा।
- अफगान नागरिकों की निर्वासन प्रक्रिया अस्थायी रूप से रोकी गई।
- शरणार्थियों और व्यापारियों के लिए सीमा पार मार्ग बंद कर दिए गए।
रणनीतिक और सुरक्षा प्रभाव
यह नया संघर्ष क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान स्थित उग्रवादी समूह सीमापार हमले कर रहे हैं, जबकि काबुल बार-बार अपनी संप्रभुता के उल्लंघन का आरोप लगाता रहा है।
मुख्य प्रभाव:
- सीमावर्ती क्षेत्रों में अस्थिरता में वृद्धि
- व्यापार और शरणार्थी आवाजाही में बाधा
- व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का खतरा
- कूटनीतिक संबंधों में तनाव
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा विवाद ऐतिहासिक रूप से जटिल रहा है। डूरंड रेखा को लेकर लंबे समय से मतभेद रहे हैं, और तालिबान सरकार इसे औपचारिक अंतरराष्ट्रीय सीमा के रूप में मान्यता नहीं देती।
- 2021 में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद से सीमाई झड़पों में वृद्धि देखी गई है। पाकिस्तान लगातार अफगान क्षेत्र से संचालित कथित उग्रवादी समूहों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करता रहा है।
- यह घटनाक्रम दोनों देशों के बीच अविश्वास को और गहरा कर रहा है तथा दक्षिण एशिया में स्थिरता के लिए नई चुनौतियाँ खड़ी कर रहा है।


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