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पलामू टाइगर रिजर्व की ‘वनजीवी दीदी’ पहल, क्या ग्रामीण महिलाएँ बाघों को बचा सकती हैं?

पलामू टाइगर रिजर्व (Palamu Tiger Reserve) ने ग्रामीण महिलाओं को वन और वन्यजीव संरक्षण में सशक्त बनाने के उद्देश्य से ‘वनजीवी दीदी पहल’ (Vanjeevi Didi Initiative) शुरू की है। यह सामुदायिक आधारित संरक्षण कार्यक्रम 17 वन-सीमावर्ती गांवों में लागू किया गया है। इस पहल के तहत प्रत्येक गांव से 18 महिलाओं को शिकार (पोचिंग) रोकने, वनों की कटाई कम करने और पर्यावरण-अनुकूल आजीविका को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। झारखंड वन विभाग (Jharkhand Forest Department) द्वारा शुरू किया गया यह पायलट कार्यक्रम जमीनी स्तर पर पर्यावरणीय प्रशासन को मजबूत करने और संवेदनशील वन क्षेत्रों में एक सशक्त नागरिक निगरानी तंत्र विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

वनजीवी दीदी पहल (VDI) क्या है?

Palamu Tiger Reserve द्वारा शुरू की गई वनजीवी दीदी पहल (Vanjeevi Didi Initiative – VDI) एक सामुदायिक आधारित वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को वन संरक्षण और जैव विविधता सुरक्षा में सक्रिय भागीदार बनाना है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • झारखंड वन विभाग द्वारा शुरू की गई पहल
  • 17 वन-सीमावर्ती गांवों में लागू
  • प्रत्येक गांव से 18 महिलाओं का चयन
  • कुल 306 सदस्यीय संरक्षण नेटवर्क
  • प्रत्येक प्रतिभागी को ₹3,000 मासिक मानदेय

यह पहल महिलाओं को जमीनी स्तर पर वन प्रशासन और जैव विविधता संरक्षण से जोड़ती है।

वनजीवी दीदी पहल के उद्देश्य

इस कार्यक्रम का मुख्य फोकस सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करना है।

मुख्य उद्देश्य

  • शिकार (पोचिंग) और अवैध लकड़ी कटाई को रोकना
  • प्राकृतिक आवास (हैबिटेट) के विनाश को कम करना
  • पर्यावरण जागरूकता बढ़ाना
  • वन निगरानी तंत्र को मजबूत करना
  • पर्यावरण-अनुकूल आजीविका को बढ़ावा देना
  • ग्रामीण शिक्षा और स्कूल नामांकन में सुधार

इस पहल के माध्यम से स्थानीय महिलाएं “वन दूत” (Forest Ambassadors) के रूप में कार्य कर प्रशासन और समुदाय के बीच सेतु का काम करती हैं।

वनजीवी दीदी की जिम्मेदारियाँ

चयनित प्रतिभागियों को कई महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभानी होती हैं।

प्रमुख कर्तव्य

  • जंगलों में अवैध गतिविधियों की सूचना देना
  • शिकार और वनों की कटाई को हतोत्साहित करना
  • समुदाय को संरक्षण कार्यों में जोड़ना
  • माइक्रो-बैंकिंग और वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देना
  • सरकारी योजनाओं की जानकारी साझा करना
  • ग्रामीण शिक्षा प्रयासों में सहयोग करना

इस पहल से सामाजिक दबाव भी बढ़ा है, जिसके परिणामस्वरूप कुछ गांवों में अवैध हथियारों का स्वैच्छिक समर्पण हुआ है।

पलामू टाइगर रिजर्व के लिए यह पहल क्यों महत्वपूर्ण है?

स्टाफ की कमी का समाधान

पलामू टाइगर रिजर्व में लगभग 95% फ्रंटलाइन पद रिक्त रहे हैं। 306 सदस्यीय नागरिक नेटवर्क निगरानी को मजबूत करता है।

वैकल्पिक आजीविका मॉडल

₹3,000 मासिक प्रोत्साहन से अवैध वन निर्भरता कम होती है और महिलाएं वैध आय स्रोतों को बढ़ावा देती हैं।

वन्यजीव अपराध में कमी

महिलाओं का परिवार और समुदाय पर प्रभाव होता है, जिससे अवैध हथियार और शिकार जैसी गतिविधियों में कमी आई है।

प्रमुख प्रजातियों का संरक्षण

पलामू टाइगर रिजर्व में:

  • 6 बाघ
  • 51 तेंदुए
  • 180+ एशियाई हाथी
  • 174 पक्षी प्रजातियाँ
  • 56 स्तनधारी प्रजातियाँ

वनजीवी दीदी पहल आवास संरक्षण, स्वच्छता अभियान और नदी संगम क्षेत्रों के संरक्षण में भी सहयोग कर रही है।

कुल मिलाकर, यह पहल ग्रामीण महिलाओं को संरक्षण की अग्रिम पंक्ति में लाकर वन शासन को अधिक सहभागी, प्रभावी और टिकाऊ बना रही है।

Palamu Tiger Reserve : प्रमुख तथ्य

विशेषता विवरण
स्थान झारखंड
स्थापना 1974 (प्रोजेक्ट टाइगर के अंतर्गत)
कुल क्षेत्रफल 1,129.93 वर्ग किमी
कोर क्षेत्र 414.08 वर्ग किमी
बफर क्षेत्र 715.85 वर्ग किमी
प्रमुख नदियाँ नॉर्थ कोयल, औरंगा, बुरहा
वनस्पति उत्तरी उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती साल वन
विशेष उपलब्धि 1932 में पदचिह्न (Pugmark) के माध्यम से पहला बाघ गणना

पलामू टाइगर रिजर्व में महुआदानर में भारत का एकमात्र भेड़िया अभ्यारण्य भी है और इसमें चेरो राजवंश के किले भी हैं।

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