ऊर्जा और स्वच्छ वायु अनुसंधान केंद्र (CREA) के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 में भारत रूसी जीवाश्म ईंधन का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना रहा। इस अवधि में भारत ने लगभग 2.2 अरब यूरो (करीब 2.59 अरब डॉलर) मूल्य का ऊर्जा आयात किया। नवंबर के बाद से रूस से कच्चे तेल के आयात में कुछ कमी आई है, फिर भी कुल खरीद में कच्चे तेल की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही। वैश्विक प्रतिबंधों, यूरोपीय संघ की पाबंदियों और बदलते व्यापार प्रवाह के कारण भारत के रूसी तेल आयात और उसकी समग्र ऊर्जा रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहे हैं।
जनवरी 2026 में भारत का रूसी तेल आयात
CREA के अनुसार, जनवरी 2026 में भारत का रूसी जीवाश्म ईंधन आयात 2.2 अरब यूरो (2.59 अरब डॉलर) रहा, जो दिसंबर के 2.3 अरब यूरो से थोड़ा कम है।
आयात का विवरण
- कच्चा तेल: 2 अरब यूरो (2.36 अरब डॉलर) – 78% हिस्सेदारी
- कोयला: 442 मिलियन यूरो (520.6 मिलियन डॉलर)
- तेल उत्पाद: 30 मिलियन यूरो (35.3 मिलियन डॉलर)
नवंबर से 23% की गिरावट के बावजूद, रूस से जीवाश्म ईंधन खरीदने में भारत चीन के बाद दूसरे स्थान पर बना रहा। यह दर्शाता है कि रियायती रूसी तेल भारत की ऊर्जा सुरक्षा में अब भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
चीन ने बढ़ाया आयात, रूस का सबसे बड़ा खरीदार बना
जहां भारत ने खरीद में कमी की, वहीं चीन ने पिछले दो महीनों में रूसी तेल आयात में 29% की वृद्धि की। जनवरी में चीन का आयात 4 अरब यूरो (4.71 अरब डॉलर) तक पहुंच गया।
प्रमुख बिंदु
- चीनी रिफाइनरियों ने यूराल्स (Urals) ग्रेड कच्चे तेल की खरीद दोगुनी की।
- ESPO ग्रेड का आयात स्थिर रहा।
- रूस का तेल चीन के कुल आयात का लगभग 16% रहा।
इस प्रकार 2026 में चीन ने रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत की।
प्रतिबंधों और वैश्विक नीतियों का प्रभाव
भारत के रूसी तेल आयात पर कई भू-राजनीतिक कारकों का प्रभाव पड़ा:
- अमेरिकी प्रतिबंध एजेंसी विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) द्वारा Rosneft पर लगाए गए प्रतिबंधों का असर भारतीय रिफाइनरियों पर पड़ा।
- 21 जनवरी 2026 से यूरोपीय संघ द्वारा रूसी कच्चे तेल से बने उत्पादों पर प्रतिबंध लागू हुआ।
- 1 फरवरी से EU-UK मूल्य सीमा 44.1 डॉलर प्रति बैरल निर्धारित की गई।
जनवरी में Reliance Industries के जामनगर रिफाइनरी को समुद्री मार्ग से रूसी तेल नहीं मिला, हालांकि फरवरी में आपूर्ति फिर शुरू हो गई।
यूराल्स कच्चे तेल की कीमत और वैश्विक रुझान
रूस के यूराल्स कच्चे तेल की औसत कीमत जनवरी में 4% बढ़कर 54.2 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जो नई EU-UK मूल्य सीमा से ऊपर रही।
प्रमुख आंकड़े
- भारत ने जनवरी में 12 लाख बैरल प्रतिदिन (bpd) रूसी तेल आयात किया।
- सऊदी अरब ने भारत को 7,74,000 bpd की आपूर्ति की।
- मार्च में रूस से आयात घटकर 8,00,000 bpd तक आने की संभावना है, जो मई 2022 के बाद सबसे कम होगा।
इस बीच सऊदी अरब भारत के तेल आयात टोकरी में अपनी हिस्सेदारी फिर बढ़ा रहा है।
रूस से तेल आयात पर भारत की ऊर्जा रणनीति
हालांकि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि नए व्यापार समझौते के तहत भारत रूसी तेल खरीदना बंद कर सकता है, लेकिन भारत सरकार की ओर से इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
भारत की रणनीति निम्नलिखित पर आधारित दिखाई देती है:
- कच्चे तेल के स्रोतों का विविधीकरण
- दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना
- भू-राजनीतिक संतुलन बनाए रखना
- लागत प्रभावी आयात सुनिश्चित करना
कुल मिलाकर, भारत का रूसी तेल आयात मुख्यतः मूल्य लाभ और आपूर्ति स्थिरता पर आधारित है, न कि राजनीतिक झुकाव पर।


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