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राष्ट्रपति भवन में लुटियंस की जगह लगाई गई राजाजी की प्रतिमा

राष्ट्रपति भवन में 23 फरवरी 2026 को पहले भारतीय गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी के जीवन और विरासत को दर्शाने वाले ‘राजाजी उत्सव’ का आरंभ हुआ। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति भवन कल्चरल सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम में शामिल हुईं। इस खास मौके पर उन्होंने सी. राजगोपालाचारी की मूर्ति का अनावरण किया। राजगोपालाचारी भारत के पहले और एकमात्र भारतीय गवर्नर-जनरल थे।

राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, यह मूर्ति अशोक मंडप के पास बनी बड़ी सीढ़ियों पर लगाई गई है। यह मूर्ति वहां पहले से लगी एडविन लुटियंस की मूर्ति की जगह ली है। राष्ट्रपति ने कहा कि यह बदलाव गुलामी की सोच को पीछे छोड़ने की एक कोशिश है। यह भारत की संस्कृति, विरासत और परंपराओं को गर्व के साथ अपनाने का तरीका है।

राष्ट्रपति भवन में लुटियंस की प्रतिमा क्यों बदली जा रही है?

प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार, स्वतंत्रता के बाद भी राष्ट्रपति भवन परिसर में ब्रिटिश अधिकारियों की प्रतिमाएँ बनी रहीं, जबकि कई भारतीय नेताओं को समुचित सम्मान नहीं मिला।

इस निर्णय के प्रमुख कारण:

  • औपनिवेशिक प्रतीकों को हटाने का प्रयास
  • भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्रनिर्माताओं को सम्मान
  • ‘पंच-प्राण’ दृष्टि के तहत गुलामी की मानसिकता से मुक्ति

राजाजी की प्रतिमा को केंद्रीय प्रांगण (Central Courtyard) में राजाजी उत्सव के दौरान अनावरण किया जाएगा।

एडविन लुटियंस कौन थे?

एडविन लुटियंस एक प्रमुख ब्रिटिश वास्तुकार थे, जिन्हें 1912 में ब्रिटिश भारत की नई राजधानी दिल्ली के निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

लुटियंस द्वारा डिज़ाइन किए गए प्रमुख स्थल:

  • राष्ट्रपति भवन
  • नॉर्थ ब्लॉक
  • साउथ ब्लॉक
  • इंडिया गेट
  • हैदराबाद हाउस
  • कॉनॉट प्लेस

नई दिल्ली का केंद्रीय क्षेत्र आज भी “लुटियंस दिल्ली” के नाम से जाना जाता है।

सी. राजगोपालाचारी (राजाजी) कौन थे?

सी. राजगोपालाचारी, जिन्हें राजाजी के नाम से जाना जाता है, एक प्रसिद्ध वकील, स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता थे।

प्रमुख तथ्य:

  • भारत के एकमात्र और अंतिम गवर्नर-जनरल (1948–1950)
  • महात्मा गांधी के निकट सहयोगी
  • गांधीजी की जेल अवधि के दौरान ‘Young India’ का संपादन
  • जवाहरलाल नेहरू की कैबिनेट में गृह मंत्री
  • 1957 में स्वतंत्र पार्टी के संस्थापक

वे अपने स्वतंत्र विचार, अनुशासन और सार्वजनिक सेवा के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते हैं।

कार्यक्रम की मुख्य बातें

  • राष्ट्रपति भवन में प्रतिमा अनावरण
  • 24 फरवरी से 1 मार्च तक राजगोपालाचारी पर प्रदर्शनी
  • भारतीय लोकतंत्र में उनके योगदान को श्रद्धांजलि
  • औपनिवेशिक प्रतीकों से नई पहचान की ओर

राष्ट्रपति भवन में लुटियंस की प्रतिमा को बदलने का निर्णय एक व्यापक सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक परिवर्तन का हिस्सा बताया जा रहा है।

सरकार ने निम्न बिंदुओं पर बल दिया है:

  • ऐतिहासिक स्थलों का पुनः भारतीयकरण
  • भारतीय नेतृत्व और विरासत का सम्मान
  • राष्ट्रीय पहचान को सुदृढ़ करना

यह कदम भारत की उत्तर-औपनिवेशिक (Post-Colonial) परिवर्तन यात्रा के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।

स्टैटिक जीके

  • घोषणा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
  • कार्यक्रम: मन की बात
  • स्थान: राष्ट्रपति भवन
  • नई प्रतिमा: सी. राजगोपालाचारी
  • उत्सव: 23 फरवरी – राजाजी उत्सव
  • प्रदर्शनी: 24 फरवरी – 1 मार्च
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