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अडानी-मार्सिले समझौता ग्लोबल शिपिंग के लिए गेम-चेंजर क्यों हो सकता है

अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड (APSEZ) ने फ्रांस के सबसे बड़े बंदरगाह मार्सिले पोर्ट के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का उद्देश्य इंडिया–मिडिल ईस्ट–यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) के माध्यम से भारत–यूरोपीय संघ व्यापार को मजबूत करना है। साझेदारी के तहत व्यापार सुगमता, बंदरगाह नवाचार और ऊर्जा संक्रमण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही IMEC कॉरिडोर से जुड़े प्रमुख बंदरगाहों के समन्वय के लिए “IMEC पोर्ट्स क्लब” स्थापित करने का भी प्रस्ताव है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और समुद्री सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

अडानी पोर्ट्स–मार्सेई फोस समझौते की प्रमुख बातें

अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड और मार्सिले पोर्ट के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) में व्यापार और लॉजिस्टिक्स सहयोग को मजबूत करने के लिए कई रणनीतिक उद्देश्यों को शामिल किया गया है—

  • व्यापार सुगमता: कार्गो आवागमन और कस्टम प्रक्रियाओं को सरल बनाना।
  • बंदरगाह नवाचार: डिजिटलीकरण और स्वचालन में सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान।
  • ऊर्जा संक्रमण: हरित ईंधन और टिकाऊ बंदरगाह समाधान को बढ़ावा देना।
  • IMEC पोर्ट्स क्लब: IMEC कॉरिडोर से जुड़े बंदरगाहों के बुनियादी ढांचे और संचालन का समन्वय।
  • कनेक्टिविटी में वृद्धि: भारत–यूरोप लॉजिस्टिक्स गलियारों को मजबूत करना।

यह समझौता दक्षता, स्थिरता और बहु-मोडल लॉजिस्टिक्स एकीकरण पर केंद्रित गहरे सहयोग का संकेत देता है।

IMEC कॉरिडोर के लिए मार्सेई फोस का महत्व

मार्सेई फोस यूरोप के भूमध्यसागरीय प्रवेश द्वार के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है—

  • यूरोप के सबसे बड़े एकीकृत मल्टीमोडल बंदरगाहों में से एक।
  • समुद्र, रेल, नदी और सड़क परिवहन नेटवर्क से जुड़ा हुआ।
  • लगभग 70 मिलियन टन अतिरिक्त कार्गो क्षमता जोड़ता है।
  • IMEC कॉरिडोर के पश्चिमी हिस्से को मजबूत करता है।

अडानी पोर्ट्स के साथ साझेदारी कर मार्सेई फोस भारत–मध्य पूर्व–यूरोप व्यापार प्रवाह को एक संरचित मार्ग प्रदान करता है, जिससे लॉजिस्टिक्स अधिक पूर्वानुमेय और प्रतिस्पर्धी बनता है।

अडानी पोर्ट्स की रणनीतिक भूमिका – मुंद्रा और हजीरा का महत्व

IMEC कॉरिडोर के पूर्वी हिस्से में अडानी पोर्ट्स की परिसंपत्तियाँ अत्यंत महत्वपूर्ण हैं—

  • Mundra Port: भारत का सबसे बड़ा वाणिज्यिक बंदरगाह।
  • Hazira Port: कंटेनर और थोक कार्गो का प्रमुख केंद्र।
  • मिलकर एक मजबूत मल्टीमोडल लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम बनाते हैं।
  • दक्षिण एशिया को पश्चिम एशिया से जोड़ते हैं।

अब मार्सेई फोस के जुड़ने से अडानी पोर्ट्स को यूरोप में अंतिम कड़ी मिलती है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला की निरंतरता और मजबूती बढ़ती है।

भारत–यूरोप व्यापार और लॉजिस्टिक्स पर प्रभाव

यह साझेदारी भारत–यूरोप व्यापार संबंधों को नया आकार दे सकती है—

  • बंदरगाह दक्षता में सुधार और पारगमन समय में कमी।
  • आपूर्ति श्रृंखला की अधिक मजबूती।
  • भारत–यूरोप कनेक्टिविटी में वृद्धि।
  • हरित लॉजिस्टिक्स और ऊर्जा संक्रमण पर विशेष ध्यान।

उद्योग विशेषज्ञ इसे एक सुरक्षित, प्रतिस्पर्धी और दीर्घकालिक यूरेशियाई व्यापार मार्ग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं।

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