केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गांधीनगर में सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) आधारित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की शुरुआत की, जो भारत की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है। इस पहल के माध्यम से डिजिटल इंडिया अभियान को राशन वितरण प्रणाली से जोड़ा गया है, ताकि सस्ती दरों पर खाद्यान्न पारदर्शी और सुरक्षित डिजिटल ढांचे के जरिए गरीबों तक पहुंचे। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ के सुशासन दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य तकनीक के माध्यम से दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है।
CBDC आधारित PDS क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
- CBDC आधारित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) एक तकनीक-संचालित राशन वितरण व्यवस्था है, जिसमें सुरक्षित लेनदेन के लिए सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) का उपयोग किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य पारंपरिक पीडीएस में होने वाली गड़बड़ियों, बिचौलियों की भूमिका और भ्रष्टाचार को समाप्त करना है।
- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार, यह योजना पीएम नरेंद्र मोदी की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसमें राष्ट्र के संसाधनों पर पहला अधिकार गरीबों, दलितों, पिछड़े वर्गों और आदिवासी समुदायों का सुनिश्चित करने की बात कही गई है।
- खाद्यान्न वितरण प्रक्रिया के डिजिटलीकरण के माध्यम से सरकार खाद्य सुरक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाने का प्रयास कर रही है, ताकि लाभ सीधे पात्र लाभार्थियों तक बिना किसी बाधा के पहुंच सके।
डिजिटल सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की प्रमुख विशेषताएं
CBDC आधारित PDS कई नवाचारी विशेषताओं के साथ लागू किया गया है —
- सुरक्षित लेनदेन के लिए सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) का उपयोग
- डिजिटल इंडिया अवसंरचना के साथ एकीकरण
- प्रति व्यक्ति 5 किलोग्राम मुफ्त खाद्यान्न का प्रत्यक्ष वितरण
- धोखाधड़ी और दोहराव (डुप्लीकेशन) की समाप्ति
- अगले 3–4 वर्षों में देशव्यापी विस्तार की योजना
इस प्रणाली में ‘अन्नपूर्णा’ मशीन एक महत्वपूर्ण नवाचार है, जो मात्र 35 सेकंड में 25 किलोग्राम तक खाद्यान्न सटीकता के साथ वितरित कर सकती है। इससे मात्रा की शुद्धता और गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित होता है।
DBT और डिजिटल इंडिया की भूमिका
- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि पहले लगभग 60 करोड़ लोगों के पास बैंक खाते नहीं थे। डिजिटल इंडिया पहल के तहत वित्तीय समावेशन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, जिससे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगी।
- आज भारत विश्व के कुल डिजिटल लेनदेन का लगभग आधा हिस्सा करता है। CBDC आधारित PDS इसी डिजिटल आधार को आगे बढ़ाते हुए खाद्यान्न वितरण में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है। इस एकीकरण से लाभार्थियों को बिना किसी बिचौलिये के सीधे उनका हक प्राप्त होता है।
80 करोड़ नागरिकों के लिए खाद्य सुरक्षा सुदृढ़
- सरकार वर्तमान में लगभग 80 करोड़ लोगों को प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलोग्राम मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध करा रही है। नई CBDC आधारित PDS प्रणाली इस विशाल कल्याणकारी योजना को अधिक प्रभावी और पारदर्शी ढंग से लागू करने में सहायक होगी।
- अमित शाह के अनुसार, 1.07 लाख से अधिक गांवों तक कनेक्टिविटी पहुंच चुकी है, जिससे दूरदराज क्षेत्रों में भी डिजिटल माध्यम से राशन वितरण संभव हो पाया है। यह सुधार बेहतर मात्रा नियंत्रण, गुणवत्ता मानकों और रीयल-टाइम ट्रैकिंग सुनिश्चित करता है, जिससे खाद्य सुरक्षा प्रणाली और अधिक मजबूत बनती है।
CBDC के बारे में
परिभाषा: CBDC (Central Bank Digital Currency) केंद्रीय बैंक द्वारा जारी की गई डिजिटल वैध मुद्रा है, जो उसके बैलेंस शीट पर देनदारी (Liability) के रूप में दर्ज होती है। भारत में इसे Reserve Bank of India (RBI) द्वारा जारी किया जाता है।
1. होलसेल CBDC (Wholesale CBDC): यह बैंकों और लाइसेंस प्राप्त वित्तीय संस्थानों के लिए होती है। इसका उपयोग इंटरबैंक भुगतान और प्रतिभूति (securities) लेनदेन में किया जाता है।
2. रिटेल CBDC (Retail CBDC): यह आम जनता के लिए उपलब्ध होती है, जिसे डिजिटल वॉलेट या स्मार्टफोन ऐप के माध्यम से उपयोग किया जा सकता है।
3. टोकन-आधारित रिटेल CBDC: इसमें निजी और सार्वजनिक कुंजी (Private-Public Key) प्रमाणीकरण के माध्यम से अपेक्षाकृत गुमनाम (anonymous) लेनदेन संभव होते हैं।
4. अकाउंट-आधारित रिटेल CBDC: इसमें उपयोग के लिए डिजिटल पहचान आवश्यक होती है। इसका उदाहरण पूर्वी कैरेबियन क्षेत्र की डिजिटल मुद्रा DCash है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का विकास
- भारत की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की शुरुआत कमजोर और वंचित वर्गों को खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई थी। समय के साथ डिजिटलीकरण, आधार लिंकिंग और DBT जैसी पहलों से इसकी कार्यक्षमता में सुधार हुआ।
- हालांकि, कुछ क्षेत्रों में रिसाव (Leakages) और दोहराव (Duplication) की समस्याएं बनी रहीं। अब PDS में CBDC को शामिल करना कल्याणकारी योजनाओं की तकनीकी प्रगति का नया चरण माना जा रहा है।
- डिजिटल मुद्रा और राशन वितरण को एक साथ जोड़कर सरकार देशभर में एक पारदर्शी, भ्रष्टाचार-मुक्त और विस्तार योग्य (Scalable) खाद्य सुरक्षा तंत्र स्थापित करना चाहती है।


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