भारत और मालदीव ने मत्स्य पालन और जलीय कृषि के क्षेत्रों में सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं, जो द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मालदीव की राजकीय यात्रा के दौरान छह समझौता ज्ञापनों के तहत हस्ताक्षरित हुआ। इस MoU का उद्देश्य सतत मत्स्य पालन, जलीय कृषि विकास, इको-पर्यटन और वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देना है, जिससे खाद्य सुरक्षा, रोजगार सृजन और क्षेत्रीय आर्थिक विकास में योगदान मिलेगा।
पृष्ठभूमि
- भारत के मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला मत्स्य पालन विभाग और मालदीव का मत्स्य और महासागरीय संसाधन मंत्रालय इस समझौता ज्ञापन (MoU) के कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसियां हैं।
- मालदीव की अर्थव्यवस्था और आजीविका में मत्स्य पालन एक प्रमुख स्तंभ है, वहीं भारत की लंबी समुद्री सीमा इसे समुद्री संसाधनों के सतत विकास में एक महत्त्वपूर्ण भागीदार बनाती है।
- दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और भौगोलिक निकटता के चलते मत्स्य क्षेत्र में सहयोग स्वाभाविक साझेदारी का क्षेत्र बनता है।
MoU का महत्व
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द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना: समुद्री संसाधनों में रणनीतिक साझेदारी के ज़रिए भारत-मालदीव मित्रता को और गहराई मिलती है।
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सतत संसाधन प्रबंधन: पर्यावरण-सम्मत मछली पकड़ने की पद्धतियों को बढ़ावा देना, विशेषकर टूना और गहरे समुद्री मत्स्य पालन में।
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आर्थिक विकास: मछली प्रसंस्करण, जलीय कृषि उत्पादन और इको-पर्यटन को बढ़ावा देकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना।
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कौशल विकास: जलजीव स्वास्थ्य, प्रशीतन (रिफ्रिजरेशन) और समुद्री अभियंत्रण जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण देकर युवाओं को रोजगार योग्य बनाना।
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क्षेत्रीय खाद्य सुरक्षा: दोनों देशों में मछलियों की उपलब्धता बढ़ाकर और जलीय कृषि प्रजातियों में विविधता लाकर पोषण सुरक्षा को सुदृढ़ करना।
MoU के उद्देश्य
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सतत मत्स्य पालन और जलीय कृषि को प्रोत्साहित करना।
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मत्स्य क्षेत्र में मूल्य श्रृंखला और व्यापार सुविधा को विकसित करना।
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मालदीव में मछली प्रसंस्करण और शीत भंडारण अवसंरचना को बढ़ाना।
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अनुसंधान, नवाचार और ज्ञान-विनिमय को बढ़ावा देना।
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तकनीकी और प्रबंधकीय कौशलों में प्रशिक्षण के माध्यम से मानव संसाधन क्षमता का निर्माण करना।
समझौते की प्रमुख विशेषताएं
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मुख्य क्षेत्र: मूल्य श्रृंखला विकास, समुद्री कृषि (mariculture), इको-पर्यटन, व्यापार सुविधा।
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अवसंरचना विकास: कोल्ड स्टोरेज, हैचरी और प्रोसेसिंग यूनिट्स में निवेश।
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कौशल प्रशिक्षण: जैव-सुरक्षा परीक्षण, जलीय कृषि फार्म प्रबंधन, प्रशीतन और समुद्री अभियंत्रण में विशेष प्रशिक्षण।
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नवाचार और अनुसंधान: मत्स्य पालन में उत्पादकता और स्थिरता बढ़ाने के लिए संयुक्त कार्यक्रम।
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इको-पर्यटन: संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ आमदनी उत्पन्न करने के लिए मत्स्य आधारित इको-पर्यटन को बढ़ावा।


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