भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, केंद्र सरकार को ₹23,000 करोड़ के इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत लॉन्च के मात्र 15 दिनों के भीतर 70 आवेदन प्राप्त हुए हैं। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इनमें से अधिकांश आवेदक लघु और मध्यम उद्यम (SMEs) हैं, जो देश में इलेक्ट्रॉनिक आयात पर निर्भरता कम करने के लिए जमीनी स्तर की औद्योगिक रुचि को दर्शाता है।
क्यों है ख़बरों में?
ECMS, जिसे 1 मई 2025 को लॉन्च किया गया, का उद्देश्य भारत की इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेंट्स के आयात पर भारी निर्भरता को कम करना है और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है। योजना को तेज़ी से मिली प्रतिक्रिया (70 आवेदन) से इस क्षेत्र में SMEs (80%) की गहरी रुचि स्पष्ट होती है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, डिक्सन टेक्नोलॉजीज, और फॉक्सकॉन जैसे बड़े खिलाड़ी भी रुचि दिखा चुके हैं।
ECMS का उद्देश्य:
इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेंट्स क्षेत्र में बढ़ती मांग और आपूर्ति के अंतर को कम करना।
आत्मनिर्भर भारत के तहत महत्वपूर्ण विनिर्माण क्षमताओं का विकास करना।
आयात पर निर्भरता घटाना और एक मजबूत घरेलू सप्लाई चेन बनाना।
योजना की मुख्य विशेषताएँ:
कुल प्रावधान: ₹22,805 करोड़
लॉन्च तिथि: 1 मई 2025
आवेदन की स्थिति: पहले 15 दिनों में 70 प्रस्ताव प्राप्त
SME भागीदारी: 80% आवेदन लघु एवं मध्यम उद्यमों द्वारा किए गए
पृष्ठभूमि:
भारत का इलेक्ट्रॉनिक उत्पादन 2030 तक $500 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है।
ELCINA के अनुसार, यदि कोई नीति हस्तक्षेप न हुआ तो 2030 तक मांग-आपूर्ति का अंतर $248 बिलियन तक पहुंच सकता है।
यह योजना “मेक इन इंडिया” और “डिजिटल इंडिया” पहल के तहत भारत को एक मज़बूत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र बनाने का हिस्सा है।
उत्पादों का वर्गीकरण:
श्रेणी A: डिस्प्ले मॉड्यूल्स, कैमरा मॉड्यूल सब-असेंबलियां
श्रेणी B: नॉन-सर्फेस माउंट डिवाइसेज़, बेयर पीसीबी, लिथियम-आयन सेल्स, आईटी हार्डवेयर पार्ट्स
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