जलवायु वार्ता के 30 वर्ष: प्रगति, नुकसान और संकट में ग्रह

इस सप्ताह विश्व नेता ब्राज़ील के बेलें (Belém) शहर में संयुक्त राष्ट्र (U.N.) जलवायु सम्मेलन के लिए एकत्रित हुए — यह सम्मेलन जलवायु वार्ताओं की 30वीं वर्षगांठ को चिह्नित करता है।

तीन दशकों की बातचीत, वादों और वैश्विक शिखर बैठकों के बावजूद, 1995 से अब तक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 34% की वृद्धि हुई है, जीवाश्म ईंधनों का उपयोग उच्च स्तर पर बना हुआ है, और वैश्विक तापमान खतरनाक सीमाओं को पार करने की ओर अग्रसर है

हालाँकि नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में कुछ प्रगति हुई है, वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि विनाशकारी जलवायु प्रभावों से बचने के लिए अभी बहुत अधिक प्रयासों की आवश्यकता है।

पिछले 30 वर्षों की जलवायु कूटनीति से प्रमुख निष्कर्ष

उत्सर्जन और वैश्विक तापमान

  • 1995 के बाद से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में एक-तिहाई वृद्धि हुई है — यह वृद्धि दर पहले से धीमी है, लेकिन जलवायु स्थिरता के अनुकूल नहीं।

  • वैश्विक तापमान कुछ वर्षों में 1.5°C से अधिक दर्ज किया गया है, हालांकि 30-वर्षीय औसत अभी भी पेरिस समझौते की सीमा से थोड़ा नीचे है।

  • छोटे द्वीपीय विकासशील देश (SIDS) 1.5°C से ऊपर तापमान वृद्धि के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं, जिससे उनके अस्तित्व को गंभीर खतरा है।

जीवाश्म ईंधन की मांग

  • वैश्विक आर्थिक विकास और एआई व डिजिटल ढांचे की ऊर्जा मांग के कारण जीवाश्म ईंधनों का उपयोग उच्च बना हुआ है।

  • कोयले की मांग 2027 तक रिकॉर्ड स्तरों के आसपास बनी रहने की संभावना है, विशेष रूप से चीन और भारत जैसे विकासशील देशों में।

स्वच्छ ऊर्जा में प्रगति

  • सौर और पवन ऊर्जा का वैश्विक स्तर पर तेजी से विस्तार हुआ है।

  • इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की बिक्री में भारी वृद्धि हुई है, जिससे ऊर्जा दक्षता बढ़ी और जीवाश्म ईंधन की निर्भरता में आंशिक कमी आई।

  • वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा निवेश $2.2 ट्रिलियन तक पहुँच गया है, जो कि जीवाश्म ईंधनों में निवेश ($1 ट्रिलियन) से अधिक है।

राजनीतिक और नीतिगत चुनौतियाँ

  • पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों ने नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने की गति को बाधित किया, जबकि चीन इस क्षेत्र में निवेश का वैश्विक नेता बनकर उभरा।

  • सीओपी (COP) सम्मेलनों की सर्वसम्मति आधारित वार्ताओं की प्रक्रिया को धीमी निर्णय-प्रक्रिया और नौकरशाही के लिए आलोचना झेलनी पड़ रही है।

  • विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) जैसी मतदान आधारित प्रणाली अपनाई जा सकती है ताकि निर्णय तेजी से लिए जा सकें।

सीओपी प्रक्रिया की सफलताएँ और सीमाएँ

सफलताएँ

  • पेरिस समझौता अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है, जिसमें अधिकांश देशों ने जलवायु लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्धता दिखाई।

  • सीओपी सम्मेलनों ने तापमान वृद्धि के संभावित स्तर को 5°C से घटाकर 3°C से नीचे लाने में मदद की है।

  • तकनीकी नवाचार और निजी क्षेत्र की भूमिका ने स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को तेज किया है, कई बार सरकारों की नीतियों से स्वतंत्र रूप से।

सीमाएँ

  • वार्षिक शिखर सम्मेलनों के बावजूद उत्सर्जन और जीवाश्म ईंधनों की निर्भरता में गिरावट नहीं आई।

  • नौकरशाही प्रक्रियाएँ अक्सर ठोस कार्रवाई पर हावी रहती हैं।

  • लगभग 200 देशों की सर्वसम्मति से निर्णय लेने की प्रणाली तात्कालिक कदमों में देरी करती है।

जलवायु नेताओं के विचार

  • जुआन कार्लोस मॉन्टेरे (पनामा): पर्यावरणीय समझौतों को सरल बनाने और प्रणालीगत सुधार की आवश्यकता पर बल।

  • जॉन केरी (अमेरिकी जलवायु दूत): “यदि वादे पूरे किए जाएँ तो इस लड़ाई को जीता जा सकता है,” इस पर जोर दिया।

  • क्रिस्टियाना फिगेरेस (पेरिस समझौता वास्तुकार): स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में निजी क्षेत्र के बढ़ते योगदान को रेखांकित किया।

  • मैनुएल पुलगर विदाल (WWF): बहुपक्षीय प्रक्रिया को वैश्विक सहयोग के लिए अनिवार्य बताया।

यह सम्मेलन न केवल तीन दशकों की उपलब्धियों और कमियों की समीक्षा करता है, बल्कि यह भी याद दिलाता है कि जलवायु परिवर्तन से लड़ाई अब शब्दों से आगे बढ़कर तात्कालिक और सामूहिक कार्रवाई की माँग करती है।

[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

G7 Summit 2026: फ्रांस में दुनिया के 7 सबसे ताकतवर देशों की बैठक, जानिए 13 बड़े फैसले और भारत के लिए क्यों है खास

दुनिया की राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े कई बड़े फैसलों का मंच माने जाने…

3 days ago

दुनिया का सबसे जहरीला बिच्छू कौन सा है?, जानें कहाँ पाए जाते हैं सबसे ज्यादा बिच्छू

धरती पर मौजूद सबसे डरावने जीवों में बिच्छू (Scorpion) का नाम जरूर लिया जाता है।…

1 month ago

भारत में कहाँ है एशियाई शेरों का असली घर? दुनिया की इकलौती जगह जहाँ जंगल में आज़ादी से घूमते हैं Asiatic Lions

शेरों का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में अफ्रीका के विशाल जंगलों की तस्वीर…

1 month ago

भारत का कौन-सा राज्य कहलाता है “Spice Garden of India”? जिसके मसालें दुनिया-भर में है मशहूर

भारत अपने मसालों के लिए सदियों से पूरी दुनिया में प्रसिद्ध रहा है। भारतीय मसालों…

1 month ago

भारत का सबसे अमीर गांव कौन-सा है? यहां हर घर में करोड़ों की संपत्ति, बैंक में जमा हैं हजारों करोड़

भारत गांवों का देश कहा जाता है। यहां लाखों गांव हैं, जिनमें से कई आज…

1 month ago

क्या आप जानते हैं भारत का Tea Capital कौन-सा राज्य है? यहां उगती है सबसे ज्यादा चाय

रेलवे स्टेशन हो, ऑफिस हो या गांव की चौपाल — चाय हर जगह लोगों की…

1 month ago