पश्चिम एशिया में तनाव जारी है। इसी बीच ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच 45 दिन के संभावित युद्धविराम को लेकर कूटनीतिक कोशिशें तेज हो गई हैं। युद्ध की वजह से दुनियाभर में घरेलू गैस और कच्चे तेल की कीमतों पर असर पड़ रहा है। इन युद्धों ने देशों की सीमाओं में बदलाव करने के साथ राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर काफी बड़ा बदलाव किया, जिसका सीधा असर लोगों के जीवन पर पड़ा। इतिहास में युद्ध अक्सर उम्मीद से कहीं ज्यादा लंबे चले हैं। दरअसल कुछ लड़ाइयां तो पीढ़ियों तक चली हैं।
प्रथम विश्व युद्ध: प्रथम विश्व युद्ध 1914 से 1918 तक लड़ा गया था। प्रथम विश्व युद्ध का तात्कालिक वजह ऑस्ट्रिया-हंगरी के प्रिंस आर्कड्यूक फर्डिनेंड की सर्बिया में हुई हत्या को माना जाता है। इसमें एक तरफ केंद्रीय शक्तियों में जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी और ओटोमन साम्राज्य था, तो दूसरी तरफ मित्र देश फ्रांस ब्रिटेन, रूस, इटली एवं अमेरिका भी शामिल हुए थे। पहली बार इस युद्ध में टैंकों, जहाजों और जहरीली गैसों का इस्तेमाल हुआ था, जिससे युद्ध के परिणाम भयावह हो गए थे। इस युद्ध में जर्मनी की हार हुई थी तथा बाद में वर्साय की संधि हुई थी, जिससे द्वितीय विश्व युद्ध की नींव तैयार हो गई थी।
द्वितीय विश्व युद्ध: साल 1939 से 1945 तक चला द्वितीय विश्व युद्ध इतिहास का सबसे घातक संघर्ष था। इसमें ‘टोटल वॉर’ के कॉन्सेप्ट ने शहरों को भी निशाना बनाया, जिससे भारी संख्या में नागरिक मारे गए। अकेले सोवियत संघ ने 2.7 करोड़ और चीन ने 2 करोड़ लोगों को खोया। जर्मनी और जापान के क्रूर कब्जे ने दुनिया को हिला कर रख दिया था। यह युद्ध उस समय हुआ, जब जर्मनी ने पोलैंड पर आक्रमण कर दिया था। इसे देखते हुए ब्रिटेन और फ्रांस ने भी जर्मनी के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया था। यह युद्ध जर्मनी, इटली और जापान जैसे धुरी राष्ट्र और ब्रिटेन, सोवियत संघ, अमेरकिा, फ्रांस और चीन जैसे मित्र देशों के बीच हुआ था। इस युद्ध में अमेरिका द्वारा जापान के हिरोशिमा एवं नागासाकी पर परमाणु बम गिराया गया था। वहीं, यहूदियां को मारा गया। इस युद्ध में मित्र देश जीते थे और संयुक्त राष्ट्र की स्थापना हुई थी।
मंगोल आक्रमण: 13वीं शताब्दी में मंगोलों ने रूस से लेकर चीन और इराक तक अपना साम्राज्य फैलाया। वे जिस शहर से गुजरते, उसे कब्रिस्तान बना देते। फारस के निशापुर में 17 लाख और बगदाद में 10 लाख लोग मारे गए। अनुमान है कि उनके आक्रमणों में करीब 4 करोड़ लोग मारे गए और आज करोड़ों लोग चंगेज खान के वंशज हैं। इस युद्ध का परिणाम यह हुआ कि मंगलो साम्राज्य प्रशांत महासागर से पूर्वी यूरोप तक अपनी जगह बना चुका था। हालांकि, इस हमले में करोड़ों लोग मारे गए थे।
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