रूस के साथ चल रहे युद्ध के बाद की स्थिति को ध्यान में रखते हुए 26 देशों ने यूक्रेन को सुरक्षा गारंटी देने का संकल्प लिया है। यह घोषणा फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने 4 सितंबर 2025 को पेरिस में हुए शिखर सम्मेलन में की। इन गारंटियों में ज़मीनी, समुद्री और हवाई तैनाती की संभावनाएँ शामिल हैं, जो भविष्य में रूस की किसी भी आक्रामक कार्रवाई को रोकने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही हैं।
26 देशों का “Coalition of the Willing” ढांचा तैयार किया जा रहा है।
युद्ध समाप्त होते ही यह सुरक्षा ढांचा सक्रिय हो जाएगा।
कुछ देश सीधे यूक्रेन में सैनिक तैनात कर सकते हैं, जबकि अन्य प्रशिक्षण, हथियार आपूर्ति और वित्तीय सहयोग देंगे।
देशों को अपनी भूमिका चुनने की लचीलापन दी गई है।
फ्रांस और ब्रिटेन : युद्धोत्तर सैनिक भेजने की संभावना जताई।
जर्मनी और इटली : जर्मनी ने अमेरिका की भूमिका स्पष्ट होने तक इंतज़ार की बात कही, जबकि इटली केवल प्रशिक्षण देगा, सैनिक नहीं भेजेगा।
बुल्गारिया : ज़मीनी सैनिक नहीं भेजेगा, लेकिन काला सागर (Black Sea) में नौसैनिक गतिविधियों, खासकर माइन हटाने (De-mining) में योगदान देगा।
बुल्गारिया ने रोमानिया और तुर्की के साथ क्षेत्रीय नौसैनिक सुरक्षा समझौते का प्रस्ताव भी रखा।
ये सुरक्षा गारंटी निम्नलिखित उद्देश्यों को पूरा करने के लिए हैं –
युद्धविराम या शांति समझौते के बाद रूस की आक्रामकता को रोकना।
यूक्रेन की संप्रभुता और स्वतंत्रता की रक्षा।
भविष्य में नाटो या यूरोपीय संघ में एकीकरण की राह आसान करना।
यूक्रेन को दीर्घकालिक सुरक्षा कवच प्रदान करना, भले ही उसे तुरंत नाटो की सदस्यता न मिले।
यूरोपीय नेताओं ने ज़ोर दिया कि भले ही शांति अभी दूर हो, युद्धोत्तर सुरक्षा ढाँचे की तैयारी बेहद आवश्यक है, ताकि पिछली गलतियों को दोहराया न जाए।
मुख्य घोषणा : 26 देशों ने युद्धोपरांत यूक्रेन को सुरक्षा गारंटी देने का संकल्प लिया।
सहयोग का स्वरूप : भूमि, समुद्र, वायु, प्रशिक्षण, हथियार, वित्तीय सहायता, प्रतिबंध समन्वय।
यूक्रेन के राष्ट्रपति : वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की
रूस के राष्ट्रपति : व्लादिमीर पुतिन
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