Saturday, 6 August 2022

ताइवान पर अमेरिका-चीन में संघर्ष: जानें विस्तार से

ताइवान पर अमेरिका-चीन में संघर्ष: जानें विस्तार से



चीन और अमेरिका के बीच अमेरिकी कांग्रेस की स्पीकर नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा को लेकर तनाव पैदा हो गया है।  इसने दो शक्तिशाली देशों- चीन और अमेरिका के बीच तीव्र तनाव पैदा कर दिया है क्योंकि चीन ताइवान को अपने एक पृथकतावादी प्रांत के रूप में देखता है। पिछले 25 सालों में ये अमेरिका के किसी उच्चस्तरीय राजनेता की ये पहली ताइवान यात्रा है। 


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ताइवान को लेकर विवाद क्यों?


चीन ताइवान को अपने से अलग हुआ एक प्रांत मानता है और उसे लगता है कि अंततः वो चीन के नियंत्रण में आ जाएगा। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग कह चुके हैं कि ताइवान का "एकीकरण" पूरा होकर रहेगा. उन्होंने इसे हासिल करने के लिए ताक़त के इस्तेमाल को भी ख़ारिज नहीं किया है। मगर ताइवान ख़ुद को एक स्वतंत्र देश मानता है जिसका अपना संविधान और अपने चुने हुए नेताओं की सरकार है। 


ताइवान क्यों महत्वपूर्ण है?


ताइवान एक द्वीप है जो चीन के दक्षिण-पूर्वी तट से लगभग 100 मील दूर है। चीन मानता है कि ताइवान उसका एक प्रांत है, जो अंतत: एक दिन फिर से चीन का हिस्सा बन जाएगा।  दूसरी तरफ, ताइवान ख़ुद को एक आज़ाद देश मानता है। उसका अपना संविधान है और वहां लोगों द्वारा चुनी हुई सरकार का शासन है। ये ''फ़र्स्ट आइलैंड चेन'' या ''पहली द्वीप शृंखला' नाम से कहे जाने वाले उन टापुओं में गिना जाता है जिसमें अमेरिका के क़रीबी ऐसे क्षेत्र शामिल हैं जो अमेरिकी विदेश नीति के लिए अहम माने जाते हैं। 


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