तुर्की में 12,000 वर्ष पुराना मानव चेहरे वाला स्तंभ खोजा गया

एक ऐतिहासिक पुरातात्त्विक खोज में, दक्षिण-पूर्वी तुर्की के कराहांतेपे (Karahantepe) पुरास्थल पर 12,000 वर्ष पुराना एक टी-आकार का स्तंभ मिला है, जिस पर मानव चेहरे की आकृति उकेरी गई है। यह पहली बार है जब किसी स्तंभ पर सीधे मानव चेहरा उत्कीर्ण पाया गया है, जिससे नवपाषाण युग (Neolithic) की प्रतीकात्मकता और आत्म-अभिव्यक्ति की समझ में एक महत्वपूर्ण आयाम जुड़ गया है। इस खोज की घोषणा अक्टूबर 2025 में की गई और यह चल रहे “ताश तेपेलर” (Taş Tepeler – Stone Hills) परियोजना का हिस्सा है, जो प्रारंभिक मानव समाजों में स्थायी जीवन और आध्यात्मिक प्रथाओं के विकास का अध्ययन करती है।

कराहांतेपे और ताश तेपेलर परियोजना

  • यह स्थल तुर्की के शानलिउर्फ़ा प्रांत में स्थित है और प्रसिद्ध गोबेक्ली तेपे (Göbekli Tepe) सहित कई नवपाषाण स्थलों का हिस्सा है।

  • इन स्थलों की विशेषता विशाल टी-आकार के चूना पत्थर (limestone) स्तंभ हैं, जिन्हें मानव-सदृश आकृतियों का प्रतीक माना जाता है।

  • पहले इन स्तंभों पर केवल हाथ और भुजाओं की आकृतियाँ पाई गई थीं, परंतु मानव चेहरे की यह पहली स्पष्ट नक्काशी है।

खोज की विशेषता

  • नव-खोजे गए स्तंभ पर गहरी उकेरी गई आँखें, चौड़ी नाक और तीखे चेहरे के रेखाचित्र हैं।

  • यह केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि वास्तविक और व्यक्तिगत मानव छवि को दर्शाता है।

  • विशेषज्ञों के अनुसार, यह खोज इस विचार को पुष्ट करती है कि टी-आकार के स्तंभ वास्तव में मानव शरीर के प्रतीक थे — जिसमें क्षैतिज भाग सिर और ऊर्ध्वाधर भाग शरीर को दर्शाता है।

घरेलू जीवन में प्रतीकवाद

  • यह स्तंभ किसी धार्मिक परिसर में नहीं, बल्कि एक घरेलू संरचना के भीतर मिला है।

  • इससे संकेत मिलता है कि उस समय आध्यात्मिकता और दैनिक जीवन गहराई से जुड़े हुए थे, और प्रतीकात्मक अभिव्यक्तियाँ केवल पूजा स्थलों तक सीमित नहीं थीं।

स्थिर तथ्य और निष्कर्ष

  • स्थल का नाम: कराहांतेपे, शानलिउर्फ़ा प्रांत, दक्षिण-पूर्वी तुर्की

  • खोज की घोषणा: अक्टूबर 2025

  • आयु: लगभग 12,000 वर्ष (पूर्व-मृदभांड नवपाषाण काल)

  • महत्व: टी-आकार के स्तंभ पर पाया गया पहला मानव चेहरा

  • संबद्ध परियोजना: ताश तेपेलर (Taş Tepeler – स्टोन हिल्स) परियोजना

  • स्तंभ की शैली: टी-आकार का चूना पत्थर स्तंभ, पहले केवल हाथ/भुजा की आकृतियों के लिए प्रसिद्ध

यह खोज मानव सभ्यता के प्रारंभिक चरणों में स्व-परिचय (self-representation) और मानव प्रतीकवाद की नई झलक पेश करती है।

[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

दुनिया का सबसे जहरीला बिच्छू कौन सा है?, जानें कहाँ पाए जाते हैं सबसे ज्यादा बिच्छू

धरती पर मौजूद सबसे डरावने जीवों में बिच्छू (Scorpion) का नाम जरूर लिया जाता है।…

2 days ago

भारत में कहाँ है एशियाई शेरों का असली घर? दुनिया की इकलौती जगह जहाँ जंगल में आज़ादी से घूमते हैं Asiatic Lions

शेरों का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में अफ्रीका के विशाल जंगलों की तस्वीर…

4 days ago

भारत का कौन-सा राज्य कहलाता है “Spice Garden of India”? जिसके मसालें दुनिया-भर में है मशहूर

भारत अपने मसालों के लिए सदियों से पूरी दुनिया में प्रसिद्ध रहा है। भारतीय मसालों…

5 days ago

भारत का सबसे अमीर गांव कौन-सा है? यहां हर घर में करोड़ों की संपत्ति, बैंक में जमा हैं हजारों करोड़

भारत गांवों का देश कहा जाता है। यहां लाखों गांव हैं, जिनमें से कई आज…

6 days ago

क्या आप जानते हैं भारत का Tea Capital कौन-सा राज्य है? यहां उगती है सबसे ज्यादा चाय

रेलवे स्टेशन हो, ऑफिस हो या गांव की चौपाल — चाय हर जगह लोगों की…

6 days ago

भारत का कौन-सा शहर कहलाता है “Mini India”? जानिए क्यों मिली यह खास पहचान

भारत अपनी विविधता, संस्कृति, भाषाओं और परंपराओं के लिए दुनिया भर में जाना जाता है।…

1 week ago