गोवा में मिला 10वीं शताब्दी का कदंब शिलालेख

एक उल्लेखनीय पुरातात्विक खोज में, दक्षिणी गोवा के काकोडा में महादेव मंदिर में 10वीं शताब्दी ई. का एक शिलालेख मिला है।

एक उल्लेखनीय पुरातात्विक खोज में, दक्षिणी गोवा के काकोडा में महादेव मंदिर में 10वीं शताब्दी ई. का एक शिलालेख पाया गया है। कन्नड़ और संस्कृत दोनों में लिखा गया शिलालेख, कदंब काल के दौरान एक ऐतिहासिक प्रकरण पर प्रकाश डालता है, जो क्षेत्र के अतीत में मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।

खोज और अध्ययन

उडुपी जिले के मुल्की सुंदर राम शेट्टी कॉलेज में प्राचीन इतिहास और पुरातत्व में विशेषज्ञता वाले सेवानिवृत्त एसोसिएट प्रोफेसर टी. मुरुगेशी ने शिलालेख का सावधानीपूर्वक अध्ययन किया। पर्यावरणविद् राजेंद्र केरकर ने इस ऐतिहासिक रत्न को उजागर करने में सहयोगात्मक प्रयास पर प्रकाश डालते हुए इस खोज को प्रकाश में लाया।

पुरालेख विवरण

यह शिलालेख कन्नड़ और नागरी दोनों अक्षरों में उत्कीर्ण है, जो 10वीं शताब्दी के दौरान क्षेत्र की भाषाई विविधता को दर्शाता है। प्रोफेसर मुरुगेशी का विश्लेषण गोवा के कदंबों से संबंध का सुझाव देता है, जो उस अवधि के दौरान क्षेत्र में शासन करने वाली शक्ति थे।

ऐतिहासिक आख्यान

यह शिलालेख मंडला क्षेत्र पर शासन करने वाले तलारा नेवैया के शासन के दौरान एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना का वर्णन करता है। तलारा नेवैया के पुत्र गुंडैया ने गोवा के बंदरगाह गोपुरा पर कब्ज़ा करने की अपने पिता की महत्वाकांक्षा को साकार करने के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया। दुखद बात यह है कि गुंडैया ने इस लक्ष्य की बहादुरी से खोज करते हुए अपनी जान गंवा दी। यह शिलालेख इस ऐतिहासिक प्रकरण का एक मार्मिक अभिलेख है।

कदम्ब-षष्ठदेव की विजय

960 ई. में, कदंब शास्तादेव ने गोवा के चंदावर शहर पर कब्ज़ा करके एक उल्लेखनीय विजय हासिल की। इसके बाद, उसने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण गोपकपट्टन बंदरगाह पर कब्ज़ा कर लिया। इस जीत ने कदंब शासन में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ा, जिससे क्षेत्र में उनका प्रभुत्व और मजबूत हो गया।

ऐतिहासिक संदर्भ

प्रोफेसर मुरुगेशी ने गोवा के कदंबों और कल्याण के चालुक्यों के बीच जटिल संबंधों को रेखांकित करते हुए ऐतिहासिक संदर्भ पर प्रकाश डाला। चालुक्य सम्राट तैलपा द्वितीय द्वारा गोवा के महामंडलेश्वर के रूप में नियुक्त कदम्ब शास्तादेव ने राष्ट्रकूटों को उखाड़ फेंकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह ऐतिहासिक संबंध उस अवधि के दौरान राजनीतिक गतिशीलता के बारे में हमारी समझ को गहराई प्रदान करता है।

परीक्षा से सम्बंधित महत्वपूर्ण प्रश्न

1. 10वीं शताब्दी का शिलालेख कहाँ खोजा गया था?

(a) उत्तरी गोवा के काकोडा में महादेव मंदिर
(b) दक्षिण गोवा के काकोडा में महादेव मंदिर
(c) बेलगाम में कदंब राजवंश महल
(d) पट्टडकल में चालुक्य राजवंश महल

2. शिलालेख किन भाषाओं में लिखा गया था?

(a) केवल कन्नड़
(b) केवल संस्कृत
(c) कन्नड़ और संस्कृत
(d) तमिल और प्राकृत

3. इस काल में मंडला क्षेत्र पर किसका शासन था?

(a) कल्याण के चालुक्य
(b) राष्ट्रकूट
(c) गोवा के कदंब
(d) होयसल राजवंश

4. शिलालेख में वर्णित ऐतिहासिक घटना क्या थी?

(a) महादेव मंदिर का निर्माण
(b) एक नए कदंब राजा का राज्याभिषेक
(c) गुंडैया की गोपुरा बंदरगाह पर विजय
(d) कदंबों और चालुक्यों के बीच गठबंधन

5. गुंडैया का अंत कैसे हुआ?

(a) प्राकृतिक कारण
(b) महल की साज़िश
(c) गोपुरा बंदरगाह के लिए लड़ाई
(d) धार्मिक उत्पीड़न

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prachi

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